दुर्ग (DNH) – विश्व स्वास्थ संगठन के मुख्य वैज्ञानिक ने , एक वार्ता में कहा कि , कोरोना के साथ जीने की , अब आदत बनानी होगी ? क्योंकि , कोरोना की दवाई बनाने के लिए , कम से कम एक से दो वर्ष का समय लग सकता है , हावर्ड , एरिजोना और सिडनी विश्वविद्यालय सहित अमरीका की लगभग आधा दर्जन संस्थाओं ने शोध के बाद पाया है कि , हर पांच व्यक्ति में से चार व्यक्ति भी , यदि मास्क का उपयोग करते है , तो काफी हद तक कोरोना को फैलने से रोका जा सकता है , कुछ ही समय में देश कोरोना से मुक्त हो सकता है ? इस वायरस के गुणों में , यह सच्चाई है कि , यह खांसने से , बोलने से , छींकने से , जमीन पर थूकने से , फैलने वाली महामारी है , जबकि , वायु मंडल में , हमेशा इसके सूक्ष्म जीव घूमते रहते है , जो मनुष्यो के शरीर को कब्जा में लेने के लिए आतुर रहते है , इसलिए घर में बनाए गए काटन कपड़ों के मास्क भी कोरोना को , शरीर में प्रवेश करने से रोक सकते है , तो वहीं दो गज की , आपस में दूरियां भी आवश्यक है , तभी कोरोना से लड़ा जा सकता है , याद रहे सिर्फ लड़ा जा सकता है और अपना बचाव किया जा सकता है , परन्तु कोरोना को ख़त्म नहीं किया जा सकता है , इसके खात्मा में , अभी समय है , इसलिए सावधानी बहुत ज्यादा जरूरी है , जो भेड़ चाल , आज दुनिया चल रही है , वो आने वाले समय के लिए बहुत ही घातक है , जिसे जनता फिलहाल समझ नहीं पा रही है , और यदि समझकर , जानबूझकर गलती कर रही है , तो आने वाला समय मनुष्यो के लिए जानलेवा साबित होने वाली है , शायद इसका अनुमान वैज्ञानिक और डाक्टर लगा चुके है , तभी बार बार दावा कर रहे है कि , आने वाला जून – जुलाई – अगस्त का महीना , कोरोना वायरस के लिए , पावर फूल होगा , इसकी मारण क्षमता सबसे अधिक और तेज होगी , जहां मानव जीवन की बरबादी और तबाही तय है ,
*दवा नहीं है , इसलिए नियम का ही पालन करना बेहतर होगा ?*
किसी भी देश के पास दवाई नहीं है , जिस तरह से वायरस का प्रकोप लगातार , प्रतिदिन बढ़ता हुआ जा रहा है , थमने का नाम नहीं ले रहा है , उससे यही साबित होता है कि , सच में कोरोना का वीभत्स रूप जून – जुलाई – अगस्त में ही दिखाई देगा , जो विश्व के लिए विनाशकारी होगा ? आज अकेले भारत में मरीजों की संख्या एक लाख को पार कर चुकी है , विश्व की महाशक्ति खुद अपनी लापरवाही के कारण , आज जहां मरने वालो की संख्या एक लाख को पीछे छोड़ चुकी है , तो वहीं मरीजों की संख्या १५ लाख को गिनवा चुकी है , अमरीका की ये हालत , अपनी गलतियों के कारण हुई है , इसके बाद , इसी क्रम में अन्य पावर फूल देश है , जो महामारी से सिर्फ जूझ रहे है , मुकाबला कर रहे , लेकिन वायरस को ख़त्म नहीं कर पा रहे हैं , जबकि , इन पावरफुल देशों के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है , फिर भी आज लाचार है , और नियमो का पालन कर , काफी हद तक , अपने आपको बचा रही है ?
*भारत ने भी स्वीकार की आने वाला समय खतरनाक होगा ?*
देश ने भी अब स्वीकार कर लिया है कि , जून – जुलाई – अगस्त का महीना कोरोना के लिए पावरफुल समय होगा , क्योंकि , मरीजों की बढ़ती हुई संख्या और गणितीय अध्ययन के अनुसार महामारी अपना भयानक रूप ले लेगा , यदि मरीजों के दर में गिरावट आती है , तो भी सितम्बर माह का समय , अपने अंतिम चरणों में होगा , लेकिन इस महामारी के दोबारा पांव पसारने का समय पुनः आयेगा ? क्योंकि , जो मजदूर घर वापसी कर रहे है , वे जरा भी लापरवाही किए , तो खुद के लिए और दूसरो के लिए जानलेवा साबित होंगे ? जिसके लक्षण बिहार , यू पी , बंगाल , झारखंड में दिखाई देने लगे है , ये वहीं मजदूर है , जो दिल्ली , महाराष्ट्र , गुजरात और पंजाब से घर वापसी किए है , यही अपने – अपने राज्य के लोगो के लिए घातक साबित होगे ? जो अभी से दिखाई दे रहा है , और शायद इसी को लेकर वैज्ञानिक दावा कर रहे है कि , महामारी का दानविय रूप का आना अभी बाकी है ?
*लॉक डाउन में ढील देना घातक हो चुका है ?*
लॉक डाउन के चौथे चरण में , देश और व्यापार की बिगड़ चुकी अर्थ व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए , नियमो के साथ लॉक डाउन में थोड़ी ढील दी गई , कई कारोबार शुरू हो चुके है , परंतु कही भी नियमो का पालन करते हुए ना तो जनता को देखा जा रहा है और ना ही व्यापारी नियमो का पालन कर वा करवा रहे है , लोग तो बाजार में ऐसा व्यवहार कर रहे है , जैसे ना तो कभी बाजार को देखा है और ना ही कभी खरीदी की है , शराबियों को लाईन में लगाने के लिए डंडे बरसाए जाते है , उन्हें ताना मारा जाता है , लेकिन बाजार में घूम रहे लोग , जो अपने आपको पढ़े लिखे , समझदार बताते है , वही नियमो की धज्जियां उड़ा रहे है , जब कोई उन्हें नियमो की सीख देता है तो उसे , आज की होशियार और समझदार बताने व कहलाने वाली पीढ़ी , हमेशा की तरह उपहास उड़ाकर , पागल कहती है ?
*ग्रामीण क्षेत्रों में नियम को मान ही नहीं रहे है , जबकि घर वापसी करने वाले अधिकांश मजदूर ग्रामीण इलाकों के ही है ?*
पूरे देश भर में लॉक डाउन के नियमो को , यदि खुलेआम टूटते हुए देखा जा सकता है , तो वो है ग्रामीण क्षेत्र , जहां लोग आज तीन महीने बाद भी , ये स्वीकार नहीं कर सके है कि , कोरोना महामारी के कारण जान भी जा सकती है और यदि नियमो का पालन करे तो जान बच भी सकती है , नियम तो शहरो में भी खुलेआम तोड़े जा रहे है , लेकिन यहां तत्कालिक व्यवस्था है , कुछ अनहोनी हो भी गई तो , जान को बचाई जा सकती है , लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाए मिलने में देरी हो सकती है और जान भी जा सकती है , यदि ग्रामीण क्षेत्रों में महामारी ने जरा भी जोर पकड़ा तो , सभी किए कराए में पानी फिर सकता है , की हुए मेहनत बर्बाद हो सकती है , इसलिए समय रहते ग्रामीणों को मास्क पहनने से लेकर , दो गज की दूरी को स्वीकारने के लिए सख्ती पूर्वक बाध्य किया जाय , ताकि कोरोना को हराया जा सके ?