भू-माफिया–अधिकारियों की मिलीभगत से जमीन खरीदी का बड़ा खुलासा, कार्रवाई शून्य व्यापारियों ने लगाए गंभीर आरोप, किसानों को धोखा देकर अधिग्रहण क्षेत्र में खरीदी गई भूमि, उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज
दुर्ग (छत्तीसगढ़)। रिपोर्ट: ज्वाला एक्सप्रेस न्यूज, दुर्ग
खरसिया-दुर्ग-परमालकसा नई रेलवे लाइन परियोजना के तहत दुर्ग जिले में बड़े मुआवजा घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिले के व्यापारियों रूपेश जैन और रितेश जैन ने आरोप लगाया है कि भू-माफियाओं ने राजस्व अधिकारियों से मिलीभगत कर अधिग्रहण क्षेत्र की गोपनीय जानकारी लीक कराई, और फिर प्रभावित गांवों में जमीन की व्यवस्थित खरीददारी कर करोड़ों का मुआवजा हड़पने की साजिश रची।
व्यापारियों ने बताया कि 5 सितंबर 2018 को रेलवे लाइन से प्रभावित गांवों की सूची जैसे बोरिगारका, पुरई और घुधिसिडीह तैयार हुई थी। उसके एक-दो दिन बाद ही यह सूची गोपनीय रूप से भू-माफियाओं तक पहुंचा दी गई। इसके बाद एक 30-35 लोगों का गिरोह बनाकर भोले-भाले किसानों को झांसे और लालच में फंसा कर उनकी जमीनें खरीद ली गईं।
कानून की अनदेखी, नियमों की उड़ाई धज्जियां
भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 की धारा 11 और 20(A) के अनुसार सूचना जारी होते ही अधिग्रहित क्षेत्र की जमीनों की खरीदी-बिक्री, नामांतरण, खाता विभाजन और नक्शा बंटवारा निषेध होता है, परंतु आरोप है कि तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवारी व अन्य अधिकारियों ने इन नियमों को दरकिनार करते हुए सिर्फ 12 दिनों में 9 एकड़ जमीन को 500 वर्ग मीटर के टुकड़ों में बांटकर मुआवजे की तैयारी शुरू कर दी।
25 करोड़ के घोटाले की आशंका
इन छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटी गई भूमि पर प्रति वर्गफुट की दर से तीन गुना मुआवजा मिलना तय है, जिससे अनुमान है कि इस घोटाले में 25 करोड़ रुपये तक का सरकारी नुकसान किया गया है।
कार्रवाई नहीं, सिर्फ फाइलों का घूमना जारी
प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, राजस्व सचिव, कलेक्टर और एसडीएम तक इस पूरे मामले की लिखित शिकायत की गई है। लेकिन अब तक कोई जांच या कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। उल्टा शिकायतें फिर से एसडीएम को वापस भेज दी गईं, जिससे पीड़ित व्यापारियों और स्थानीय जनता में गहरी नाराजगी है।
जांच की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने मांग की है कि इस मुआवजा घोटाले की उच्चस्तरीय जांच हो और जो अधिकारी व माफिया इसमें संलिप्त हैं, उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों के साथ हो रहा अन्याय और सरकारी धन की लूट रोकी जा सके।
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