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1000 करोड़ की टाउनशिप, फिर भी बच्चों के हिस्से आई वीरानी....

150 एकड़ जमीन पर उगी झाड़ियां, बुजुर्गों के लिए वॉकिंग ट्रैक नहीं, बच्चों के लिए खेल मैदान भी नसीब नहीं

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रायपुर। प्रदेश की सबसे आधुनिक और हरित टाउनशिप बनाने के दावे के साथ शुरू की गई कमल विहार परियोजना आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही है। करीब 1000 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद 15 वर्षों में 155 प्रस्तावित गार्डनों का निर्माण नहीं हो सका, जिससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को बुनियादी मनोरंजन और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।Image after paragraph

करीब 1600 एकड़ में विकसित कमल विहार में 15 सेक्टरों के भीतर लगभग 150 एकड़ भूमि उद्यानों के लिए आरक्षित की गई थी, लेकिन आज वहां हरियाली की जगह झाड़ियां, कचरे के ढेर और उजाड़ मैदान दिखाई देते हैं। कई स्थानों पर सुरक्षा के लिए लगाई गई लोहे की ग्रिल और गेट तक चोरी हो चुके हैं, जबकि कुछ जगहों पर अतिक्रमण का खतरा भी मंडरा रहा है।

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वादे कागजों में, जमीन पर वीरानी

आरडीए ने प्लॉट बेचते समय आधुनिक पार्क, वॉकिंग ट्रैक, बच्चों के प्ले एरिया और ओपन स्पेस का सपना दिखाया था, लेकिन आज अधिकांश गार्डन केवल नक्शों और फाइलों तक सीमित हैं। सेक्टर-8 में गार्डन के नाम पर केवल गेट और बाउंड्री बची है, जबकि अंदर सूखी जमीन और वीरानी फैली हुई है।

बदहाल गार्डन भी बने उपेक्षा की मिसाल

सेक्टर-4 में विकसित गार्डन भी रखरखाव के अभाव में उजड़ चुका है। सिंचाई नहीं होने से पौधे सूख गए हैं और पूरा परिसर बदहाल नजर आता है। वहीं सेक्टर-5 में बाउंड्रीवॉल और गेट टूट चुके हैं तथा वर्षों से विकास कार्य ठप पड़ा है।

150 एकड़ जमीन बेकार, बजट तक नहीं

सूत्रों के अनुसार आरडीए ने गार्डनों के विकास के लिए अब तक शासन को कोई ठोस बजट प्रस्ताव नहीं भेजा। वन विभाग को जिम्मेदारी सौंपने की योजना भी कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी।

आरडीए अध्यक्ष का दावा

आरडीए अध्यक्ष नंद कुमार साहू का कहना है कि गार्डनों की मरम्मत कर उन्हें पंजीकृत समितियों को देखरेख और रखरखाव के लिए सौंपने की योजना बनाई जा रही है।

तीखा सवाल

जब 1000 करोड़ रुपये खर्च हो गए, तो आखिर बच्चों के खेलने के लिए पार्क और बुजुर्गों के टहलने के लिए गार्डन कब बनेंगे? क्या कमल विहार के रहवासियों को सिर्फ वादे ही मिलेंगे या कभी हरियाली भी नसीब होगी?



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