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रहस्यमयी बुखार से एक वर्ष से जूझ रही युवती को सिम्स में मिला नया जीवन, ब्रांकोस्कोपी जांच मे पहली बार सामने आया टीबी का कारण

रहस्यमयी बुखार से एक वर्ष से जूझ रही युवती को सिम्स में मिला नया जीवन, ब्रांकोस्कोपी जांच मे पहली बार सामने आया टीबी का कारण

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बिलासपुर। लगभग एक वर्ष से लगातार बुखार, कमजोरी एवं रात में अत्यधिक पसीना आने जैसी गंभीर समस्याओं से परेशान एक युवती को सिम्स अस्पताल के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में सही निदान एवं उपचार मिलने से राहत मिली है। कई निजी अस्पतालों एवं जिला अस्पताल में उपचार के बावजूद बीमारी का कारण स्पष्ट नहीं हो पा रहा था, लेकिन सिम्स में की गई उन्नत ब्रांकोस्कोपी जांच से बीमारी की वास्तविक वजह सामने आ गई।
गोंडपारा निवासी 24 वर्षीय युवती दिनांक 12 जून 2026 को सिम्स के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग की ओपीडी में पहुंची। मरीज की जांच डॉ. प्रतीक कुमार, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष,के निदेशन मे डॉ. अनिल कुमार डनसेना, सहायक प्राध्यापक, के द्वारा ब्रोंकोस्कोपी कीया गाया,
डॉ. आकांक्षा गुप्ता, वरिष्ठ रेजिडेंट एवं उनकी टीम भी साथ रहे 
प्रारंभिक परीक्षण में मरीज ने बताया कि वह पिछले लगभग एक वर्ष से बार-बार बुखार आने, कमजोरी महसूस होने तथा रात में अत्यधिक पसीना आने जैसी समस्याओं से पीड़ित थी। कई स्थानों पर उपचार कराने के बाद भी उसकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। चिकित्सकों द्वारा एक्स-रे एवं सीटी स्कैन जांच कराई गई, जिसमें फेफड़ों के विभिन्न हिस्सों में निमोनिया के लक्षण दिखाई दिए।
बीमारी के कारणों की पुष्टि के लिए बलगम की जांच कराई गई, लेकिन रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद विशेषज्ञों ने ब्रांकोस्कोपी करने का निर्णय लिया। दूरबीन आधारित इस आधुनिक जांच प्रक्रिया के माध्यम से फेफड़ों के प्रभावित हिस्सों की गहन जांच की गई तथा वहां से नमूने लेकर सीबीनाट (CBNAAT) जांच हेतु भेजे गए। जांच रिपोर्ट में तपेदिक (टीबी) की पुष्टि हुई। बीमारी की सही पहचान होने के बाद तत्काल उपचार प्रारंभ किया गया और मरीज की स्थिति में सुधार होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
बीमारी का वास्तविक कारण सामने आने के बाद मरीज एवं उसके परिजनों ने राहत की सांस ली तथा सिम्स के चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि टीबी आज भी देश में एक महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य चुनौती है। कई बार यह बीमारी सामान्य लक्षणों और रहस्यमयी बुखार के रूप में सामने आती है तथा प्रारंभिक जांचों में पकड़ में नहीं आती। ऐसे मामलों में ब्रांकोस्कोपी एवं सीबीनाट जैसी उन्नत जांच तकनीकें रोग की पहचान में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती हैं। उन्होंने कहा कि समय पर सही निदान से मरीजों को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक बुखार, कमजोरी, वजन घटना, लगातार खांसी या रात में पसीना आने जैसी शिकायतें हों तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसे लक्षण टीबी सहित कई गंभीर बीमारियों के संकेत हो सकते हैं। समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श एवं आवश्यक जांच कराने से बीमारी का शीघ्र निदान और सफल उपचार संभव है।
सिम्स अस्पताल में उपलब्ध आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम जटिल रोगों के निदान एवं उपचार में निरंतर उत्कृष्ट कार्य कर रही है, जिससे क्षेत्र के मरीजों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल रहा है।



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