स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने शिक्षा विभाग की दुर्ग संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक ली
सभी डीईओ एवं बीईओ शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए फिल्ड में नियमित तौर पर करें स्कूलों का दौरा: स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव
- शिक्षा की गुणवत्ता का जमीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए असर
- युक्तियुक्तकरण अंतर्गत शिक्षकों की स्थानांतरण के संबंध में की गहन समीक्षा
- दूरस्थ क्षेत्रों में पढ़ाई पर विशेषतौर पर ध्यान देने की जरूरत
- परीक्षा परिणामों में सुधार लाने के लिए सभी करें शिक्षक उत्कृष्ट कार्य
- शिक्षकों को अध्यापन कार्य के लिए प्रशिक्षण देने की आवश्यकता
- वर्ष भर की कार्य योजना के अनुरूप होना चाहिए अध्यापन कार्य
- प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को अच्छी तरह याद होना चाहिए पहाड़ा
- शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में बच्चों के प्रवेश तथा उनके अध्ययन की मानिटरिंग करने के दिए निर्देश
- शिक्षण गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए अपने अनुभव किए साझा
दुर्ग। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने जिला पंचायत राजनांदगांव के सभाकक्ष में मंगलवार 09 दिसम्बर को स्कूल शिक्षा विभाग के दुर्ग संभाग स्तरीय अंतर्गत दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, राजनांदगांव, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले की समीक्षा बैठक ली। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि सभी डीईओ एवं बीईओ शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए फिल्ड में नियमित तौर पर स्कूलों का दौरा करें। उन्होंने कहा कि इसका असर जमीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों में पढ़ाई का स्तर अच्छा होना चाहिए। उन्होंने युक्तियुक्तकरण अंतर्गत शिक्षकों की स्थानांतरण के संबंध में गहन समीक्षा की। उन्होंने कहा कि शासन की नीतियों के अनुरूप जिन शिक्षकों ने युक्तियुक्तकरण अंतर्गत अभी तक ड्यूटी ज्वांइन नहीं की है, उन पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में पढ़ाई पर विशेषतौर पर ध्यान देने की जरूरत है। जियो टैगिंग एवं शिक्षकों की उपस्थिति के माध्यम से नियमित अध्यापन के संबंध में मानिटरिंग होनी चाहिए। परीक्षा परिणामों में सुधार लाने के लिए सभी शिक्षक उत्कृष्ट कार्य करें। शिक्षक मेहनत करेंगे तो इसके बेहतरीन परिणाम प्राप्त होंगे। बच्चों को अभ्यास कराएं और उनकी पढ़ाई के लिए अच्छा माहौल एवं व्यवस्था बनाएं। यह भी ध्यान देने की जरूरत है कि बच्चे शाला त्यागी नहीं हो तथा उनके पढऩे की अभिरूचि बनी रहे। शिक्षकों को अध्यापन कार्य के लिए प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है। वर्ष भर की कार्य योजना के अनुरूप अध्यापन कार्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षकों को नई शिक्षा नीति के संबंध में जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने राजनांदगांव में अपार आईडी निर्माण की प्रगति पर संतोष जाहिर किया। उन्होंने कहा कि परीक्षा परिणामों के आधार पर जवाबदेही तय होगी तथा प्राथमिक कक्षाओं में भी बेहतर परिणामों के लिए सतत मूल्यांकन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को पहाड़ा अच्छी तरह याद होना चाहिए।

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के साथ ही शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए प्राईवेट टयूटर्स, शाला त्यागी बच्चों की स्थिति में सुधार होना चाहिए। उन्होंने शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में बच्चों के प्रवेश तथा उनके अध्ययन की मानिटरिंग करने के लिए कहा। उन्होंने सत्र 2024-25 के कक्षा दसवीं एवं बारहवीं का परीक्षा परिणाम एवं सत्र 2025-26 का लक्ष्य, कक्षा दसवीं एवं बारहवीं में प्रथम श्रेणी, 80 प्रतिशत से अधिक एवं 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों की संभावित संख्या, कक्षा तीसरी से पांचवीं तक 20 तक का पहाड़ा तथा कक्षा छठवीं से आठवीं तक 25 तक का पहाड़ा, कमजोर बच्चों के लिए बारह खड़ी लागू करने उपचारात्मक शिक्षण, भवन विहीन विद्यालयों की संख्या, मॉडल स्कूल बनाए जाने वाले विद्यालयों की संख्या, समग्र शिक्षा, पीएमश्री विद्यालय, पीएम ई-विद्या चौनल के उपयोग, आने वाले वर्षों में जिलों के लक्ष्य के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
सचिव स्कूल शिक्षा विभाग सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान देने के लिए शिक्षकों की ऑनलाईन उपस्थिति होनी चाहिए, ताकि शिक्षक समय पर स्कूल पहुंचे। स्कूलों में ड्राप आऊट में कमी लाने के लिए विशेष प्रयासों की आवश्यकता है। सभी बीईओ एवं डीईओ निरंतर दौरा करें। दसवीं एवं बारहवीं के परीक्षा परिणामों का विश्लेषण करते हुए समेकित कार्ययोजना बनाकर परीक्षा परिणामों में सुधार लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने के लिए युवाओं को प्रेरित करें। प्राचार्यों एवं बीईओ के वाट्सएप ग्रुप के माध्यम से कार्यों की सतत मानिटरिंग करें। कार्य योजना बनाकर पढ़ाई में कमजोर बच्चों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करें। उन्होंने स्कूलों के निर्माणाधीन कार्यों में गति लाने के लिए कहा। संचालक लोक शिक्षण संचालनालय ऋतुराज रघुवंशी ने कहा कि ऐसे बच्चे जिनका परीक्षा परिणाम अच्छा नहीं रहा है, उनके लिए उपचारात्मक शिक्षण की व्यवस्था की गई है। ऐसे बच्चों को चिन्हांकित कर शनिवार बैगलैस डे के दिन उनकी शिक्षण गुणवत्ता में सुधार लाएं। सतत टेस्ट के माध्यम से बच्चों के अध्ययन का मूल्यांकन करते रहे। दूरस्थ क्षेत्र के बच्चे भी स्मार्ट क्लास से जुड़े। आयुक्त समग्र शिक्षा डॉ. प्रियंका शुक्ला ने कहा कि शिक्षण कार्य योजनाबद्ध तरीके से होना चाहिए। ऐसे स्कूल जहां बच्चे पढ़ाई में कमजोर है, ऐसे स्कूलों का चिन्हांकन करते हुए उन्हें प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। कक्षा दसवीं एवं बारहवीं के परीक्षा परिणामों को बेहतर करने के लिए कक्षा नवमीं एवं ग्यारहवीं की पढ़ाई पर ध्यान देना होगा।
कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने कहा कि राजनांदगांव जिले में बच्चों में पढ़ाई के प्रति अभिरूचि जागृत करने के लिए पढ़ाई का कोना एक पहल की जा रही है। जिसमें बच्चों के लिए अपने पढ़ाई के लिए एक विशेष स्थान होगा, ताकि घर में पढ़ाई का माहौल रहे। उन्होंने कहा कि छुट्टियों के पहले पीटीएम के माध्यम से अभिभावकों को भी बच्चों को पढऩे के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित करें। बच्चों को निरंतर अभ्यास कराते हुए उन्हें निर्धारित समय में प्रश्रपत्र पूर्ण करने के लिए अभ्यास कराया जा रहा है। उन्होंने जिले में नीट एवं जेईई के लिए चलाए जा रहे ऑनलाईन कोचिंग के संबंध में जानकारी दी। इस दौरान सभी ने शिक्षण गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए अपने अनुभव साझा किए।
बैठक में स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, लोक शिक्षण संचालक ऋतुराज रघुवंशी, आयुक्त समग्र शिक्षा डॉ. प्रियंका शुक्ला, तथा शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी एवं राजनांदगांव, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम, मानपुर-मोहला, खैरागढ़- छुई खदान जिलों के डीईओ, डीएमसी, बीईओ एवं बीआरसी अधिकारीगण उपस्थित रहे।
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