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दुर्ग में तकनीकी क्रांति की हुई शुरुआत, आईटी पार्क बनेगा युवाओं की नई पहचान

दुर्ग में तकनीकी क्रांति की हुई शुरुआत, आईटी पार्क बनेगा युवाओं की नई पहचान

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आईटी पार्क युवाओं के लिए रोजगार, कौशल और नवाचार की नई राह खोलेगा - स्कूल शिक्षा मंत्री श्री यादव
-दुर्ग का आईटी पार्क देगा रोजगार, युवाओं को अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा 
-आईआईटी भिलाई और छत्तीसगढ़ सरकार की संयुक्त पहल ने किया एमओयू
- समझौते पर आईआईटी भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश और दुर्ग नगर निगम आयुक्त सुमीत अग्रवाल ने किया हस्ताक्षर 
दुर्ग। 
दुर्ग जिला अब तेजी से आईटी और टेक्नोलॉजी हब के रूप में उभरने जा रहा है। जिले में पहला आईटी पार्क स्थापित करने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया, जब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच आईटी पार्क स्थापना को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इसे जिले के लिए तकनीकी युग की शुरुआत बताया। यह आईटी पार्क शहर के बीचोबीच सिविल लाईन्स में स्थापित किया गया है। इसका निर्माण लगभग 3,900 वर्ग मीटर भूमि पर किया गया है, कुल निर्मित क्षेत्रफल 2,907.26 वर्ग मीटर है।
इस कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, महापौर श्रीमती अलका बाघमार शामिल हुए। समझौते पर आईआईटी भिलाई के निदेशक डॉ.राजीव प्रकाश और नगर निगम दुर्ग आयुक्त सुमीत अग्रवाल ने हस्ताक्षर किए। इससे जिले में आईटी सेक्टर का विस्तार तेज होगा और युवाओं के लिए रोजगार तथा नवाचार के अनेक अवसर तैयार होंगे। यह पहल दुर्ग जिले के लिए ऐतिहासिक साबित होगा। इससे युवाओं को उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण, वास्तविक उद्योग अनुभव और रोजगार अपने ही जिले में उपलब्ध होंगे। इसमें देश और प्रदेश की करीब 35 कंपनियां इस आईटी पार्क में आने और अपने स्टार्टअप शुरू करने में गहरी रुचि दिखाई हैं। 

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स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने इस महत्वपूर्ण पहल को प्रदेश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा कदम बताया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन में आईआईटी भिलाई एवं छत्तीसगढ़ सरकार के मध्य आईटी पार्क स्थापना हेतु एमओयू पर हस्ताक्षर कार्यक्रम का साक्षी बना। उन्होंने आईटी पार्क के महत्व, उसके प्रभाव और जिले पर पड़ने वाले दूरगामी परिणामों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दुर्ग जिले में आईटी पार्क का यह प्रयास युवाओं के लिए रोजगार, कौशल और नवाचार की नई राह खोलेगा और प्रदेश के तकनीकी भविष्य को नए आयाम देगा। आने वाले वर्षों में दुर्ग जिले को एक ऐसे टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां स्टार्टअप, नवाचार और उद्योग मिलकर नए अवसर तैयार करेंगे। मंत्री श्री यादव ने कहा कि आईटी पार्क का प्रभाव सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह शिक्षा, प्रशिक्षण, रिसर्च और उद्यमिता को भी नई दिशा देगा। महापौर श्रीमती अलका बाघमार ने भी इस पहल को युवाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि आईटी पार्क जिले में तकनीकी अवसरों का नया द्वार खोलेगा।
कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि यह एक छोटा सा कदम ज़रूर प्रतीत होता है, लेकिन आगे चलकर यह बड़े अभियान का रूप ले लेगा। प्रतिभा सिर्फ शहरों या गांवों में सीमित नहीं है, वह हर जगह जन्म लेती है। लेकिन अवसरों की कमी के कारण लोग पलायन करने को मजबूर होते हैं। भारत से आज भी युवा अमेरिका, जापान और जर्मनी जा रहे हैं, क्योंकि वहाँ अवसर उपलब्ध हैं। भारत कृषि प्रधान देश है, लेकिन सर्विस सेक्टर को बढ़ावा देना समय की मांग है। आईटी पार्क उसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में बड़े वृक्ष का रूप ले सकता है। उन्होंने बताया कि इस पार्क में लगभग 200 लोग एक साथ बैठकर काम कर सकेंगे। जिला प्रशासन इस परियोजना को पूरा सहयोग देगा ताकि अधिक से अधिक युवा इससे जुड़ सकें। कलेक्टर कहा कि नगर निगम के गौरवशाली इतिहास में यह आईटी पार्क नई उपलब्धि के रूप में जुड़ने जा रहा है, जो दुर्ग-भिलाई को प्रदेश में आईटी और सर्विस सेक्टर के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
आईआईटी निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने कहा कि यह बहुप्रतिक्षित कार्य आज शुरू हुआ है। हमारी हमेशा यही कोशिश रही है कि छत्तीसगढ़ के बच्चों को छत्तीसगढ़ में ही रोजगार मिले, उन्हें बाहर न जाना पड़े। आईटी पार्क इस दिशा में एक अनूठी पहल है और यह राज्य का पहला आईटी पार्क बनने जा रहा है। उन्होंने बताया कि आईटी पार्क का उद्देश्य आईटी से जुड़े सभी प्रकार के रोजगारों को एक ही छत के नीचे लाना है, ताकि विभिन्न कंपनियाँ युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार दे सकें। यह बिल्डिंग के बीचोंबीच स्थित है, जिसमें 40 बड़े ऑफिस रूम, पाँच बड़े हॉल, मैस और पूरा बिल्डिंग एक बाउंड्रीवॉल से घिरा है। हर ऑफिस में कंपनियाँ आसानी से संचालित हो सकती हैं। हमारे पास मेनपावर की कमी नहीं है। यदि बच्चों को अच्छी ट्रेनिंग दी जाए, तो उन्हें कहीं बाहर जाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। इसका प्रभाव आने वाले समय में स्पष्ट दिखाई देगा।

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आईटी पार्क के निर्माण से दुर्ग न केवल तकनीकी नवाचार और डिजिटल प्रगति का नया केंद्र बनेगा, बल्कि यह स्थानीय युवाओं और तकनीकी प्रतिभाओं के लिए एक बड़ा मंच भी साबित होगा। पार्क में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, सूचना प्रौद्योगिकी, डेटा एनालिटिक्स, फिनटेक, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। आईटी पार्क की स्थापना न केवल रोजगार और कौशल विकास को गति देगी, बल्कि दुर्ग-भिलाई को छत्तीसगढ़ का अग्रणी तकनीकी और नवाचार केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम सिद्ध होगी। आईटी पार्क बनने के बाद युवा अपने ही शहर में आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे और स्थानीय कंपनियों को कुशल तकनीकी कर्मचारी उपलब्ध होंगे। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि दुर्ग-भिलाई की कंपनियां सॉफ्टवेयर उत्पाद और अत्याधुनिक तकनीकों पर तेजी से काम कर सकेंगी। यह पहल युवाओं के पलायन को कम करेगी और जिले को एक प्रमुख आईटी हब के रूप में स्थापित करेगी। भिलाई लंबे समय से देश को तकनीकी मैनपावर प्रदान करता रहा है। यहां के युवा इंजीनियर देश भर के विभिन्न राज्यों में कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद एक बड़ी चुनौती हमेशा से रही कि जिले में उच्च स्तरीय आईटी अवसर सीमित होने के कारण छात्रों को राज्य छोड़ना पड़ता था। साथ ही दुर्ग-भिलाई क्षेत्र की आईटी कंपनियाँ भी स्किल्ड विशेषज्ञों की कमी के कारण बड़े प्रोजेक्ट लेने और नई तकनीकों पर काम करने में कठिनाई महसूस करती थीं। इस आईटी पार्क की स्थापना इसी अंतर को समाप्त करने और स्थानीय आईटी सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर सभापति श्याम शर्मा, एमआईसी सदस्य देवनारायण चंद्राकर, ज्ञानेश्वर ताम्रकार, पार्षद युवाराज कुंजाम, लोकेश्वरी ठाकुर, श्रीमती ललिता ठाकुर, तकनीकी टीम, आईआईटी के विद्यार्थी सहित निगम के अधिकारी उपस्थित थे।



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