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समर्पण भाव से जनता की सुरक्षा के साथ खेलों में भी पुलिस का उत्कृष्ट प्रदर्शन- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

समर्पण भाव से जनता की सुरक्षा के साथ खेलों में भी पुलिस का उत्कृष्ट प्रदर्शन- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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तीरंदाजी की कला हमारे जनजातीय क्षेत्र की विशिष्ट पहचान रही है*

*- उत्कृष्ट प्रदर्शन पर छह टीमों को मिला सम्मान*

*- 14वीं अखिल भारतीय पुलिस तीरंदाजी प्रतियोगिता का हुआ भव्य समापन* 

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दुर्ग, / छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा आयोजित 14वीं अखिल भारतीय पुलिस तीरंदाजी प्रतियोगिता 2025-26 का भव्य समापन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। प्रतिभागिओं द्वारा बैण्ड की प्रस्तुति द्वारा मार्च पास्ट किया गया। समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न राज्यों एवं केंद्रीय बलों से पहुंचे टीम मैनेजरों से परिचय प्राप्त किया और खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंचे सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के खिलाड़ियों, कोचों और मैनेजरों का छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर आगमन के लिए हार्दिक स्वागत किया।

समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पांच दिवसीय इस अखिल भारतीय पुलिस तीरंदाजी प्रतियोगिता का आज समापन हो रहा है। उन्होंने इसमें शामिल होकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने वाले सभी खिलाड़ियों को बहुत-बहुत बधाई और विजेताओं को हार्दिक शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ पुलिस के अधिकारियों और जवानों को भी बधाई दी, जो दिन-रात कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ खेल के मैदान में भी अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह उनका अनुशासन और समर्पण ही है, जो उन्हें हर क्षेत्र में श्रेष्ठ बनाता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी कर्तव्य पालन करने वाले हमारे पुलिस जवान जब खेल मैदान में उतरते हैं, तो उनका आत्मविश्वास और साहस पूरे प्रदेश का मान बढ़ाता है। जिस समर्पण भाव से हमारे पुलिस अधिकारी जनता की सुरक्षा करते हैं, उसी प्रतिबद्धता के साथ वे खेलों में भी प्रदेश और देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा छत्तीसगढ़ प्राचीन दंडकारण्य भूमि है, जहां भगवान श्रीराम की दिव्य धनुर्विद्या की गूंज सुनाई देती है। इस क्षेत्र के गोंड, कमार और अन्य आदिवासी समुदाय सदियों से धनुर्विद्या में निपुण रहे हैं। तीरंदाजी की कला हमारे जनजातीय क्षेत्र की विशिष्ट पहचान रही है। छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति, लोक कला, भाषा और इतिहास अद्भुत है। हमारे देश में तो तीरंदाजी की परंपरा इतनी उच्च स्तर पर पहुँच गई है कि शब्दभेदी बाण चलाने की कला में भी लोग कुशल थे, जिसमें केवल आवाज सुनकर बिना देखे उस ओर सटीक निशाना साध लेते थे। छत्तीसगढ़ में भी ‘शब्द भेदी बाण‘ चलाने वाले धनुर्धर के रूप में स्वर्गीय कोदू राम वर्मा प्रसिद्ध हुए हैं। वे आँखों पर पट्टी बाँधकर केवल आवाज सुनकर सटीक निशाना साध लेते थे। हमारी सरकार खेल अधोसंरचना को बेहतर बनाने का काम मिशन मोड में कर रही है। हमने जशपुर जिले के पंडरापाट में तीरंदाजी के प्रशिक्षण के लिए आर्चरी एकेडमी की स्थापना करने का निर्णय लिया है। 20 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस बहुउद्देश्यीय परिसर में तीरंदाजी के अलावा अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। हमारी सरकार परंपरागत खेलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार नवाचार कर रही है। अभी बजट में जिन पांच मिशनों को शामिल किया गया है, खेल उत्कर्ष मिशन भी उनमें से एक है। तीरंदाजी, ओलंपिक में भी शामिल है। ओलंपिक, एशियन गेम्स और विश्व तीरंदाजी प्रतिस्पर्धा में जिस तरह भारतीय तीरंदाज अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं, उससे छत्तीसगढ़ में हो रही इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता का महत्व और बढ़ जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हम सभी के लिए गर्व की बात है कि छत्तीसगढ़ के तीरंदाज पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीत रहे हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज देश और प्रदेश में खेलों को लेकर बहुत ही उत्साहजनक वातावरण है। खेलों से हमारे जीवन में अनुशासन बना रहता है। इससे शरीर स्वस्थ और सुदृढ़ रहता है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि हर युवा साथी को कोई न कोई खेल अवश्य खेलना चाहिए। आज खेलों के क्षेत्र में करियर बनाने के भी असीमित अवसर हैं। खेल एक ऐसा क्षेत्र है, जो पर्यटन को भी बढ़ावा देता है। खेलों के विकास से रोजगार व्यापक पैमाने पर सृजित होते हैं। हम नवा रायपुर में राष्ट्रीय आर्चरी एकेडमी बना रहे हैं। इसके लिए लगभग 14 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। नवा रायपुर में ही 85 करोड़ रुपये की लागत से स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स बन रहा है, जो खेल प्रतिभाओं को निखारने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले ही खेल प्रेमियों ने शहीद वीर नारायण अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में दो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों का आनंद लिया। इस स्टेडियम को और भव्य तथा सुविधाजनक बनाया जा रहा है। हमारी सरकार ओलंपिक में शामिल होने वाले एथलीट को 21 लाख रुपये देगी। यदि हमारे प्रदेश का कोई युवा खिलाड़ी ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतता है तो उसे 3 करोड़, रजत पदक जीतने पर 2 करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने वालों को एक करोड़ रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में खेलो इंडिया के नए परिसरों की शुरुआत की गई है, इससे खेल प्रतिभाओं को जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं। खेलों के क्षेत्र में भारत किस तेजी से आगे बढ़ रहा है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में देश ने ओलंपिक में मेजबानी का प्रस्ताव रखा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने अवगत कराया कि अभी कुछ दिन पहले ही केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी की उपस्थिति में बस्तर ओलंपिक का समापन हुआ। अबूझमाड़ पीस मैराथन का आयोजन भी किया गया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का ऐसा कोई गांव, कस्बा और शहर नहीं है, जहां खेल प्रतिभाएं मौजूद न हों। बस्तर ओलंपिक की सफलता इस बात का सुंदर उदाहरण है। उन्होंने प्रदेश की खेल प्रतिभाओं से आह्वान किया कि खूब मेहनत करिए। आपको संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने अभिभावकों से आह्वान किया कि अपने बच्चों को उनकी पसंद के खेल में आगे बढ़ने का अवसर दें।

समापन समारोह को संबोधित करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक वनाच्छादित ट्रायबल प्रदेश है और भगवान श्रीराम के वनवास का सबसे अधिक समय इसी पावन धरती पर व्यतीत हुआ था। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और परंपराएं आज भी जनजातीय समाज द्वारा जीवित रखी गई हैं। मंत्री श्री यादव ने कहा कि गोंड, कवंर और अन्य आदिवासी भाई-बहन आज भी पारंपरिक धर्नुविद्या (धनुर्विद्या) का अभ्यास करते हैं, जो हमारी अमूल्य धरोहर है। उन्होंने बताया कि शब्दभेदी बाण चलाने जैसी पारंपरिक विधाएं आज भी संरक्षित हैं, जो प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पारंपरिक खेलों के आयोजन से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि मानसिक संतुलन और एकाग्रता भी बढ़ती है। मंत्री श्री यादव ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए पुलिस विभाग के मनोबल और सहयोग की सराहना करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं।

समापन समारोह के अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रतियोगिता के विजेताओं को शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया। पांच दिवसीय इस आयोजन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों- सीआईएसएफ, राजस्थान, सीआरपीएफ, उत्तर प्रदेश, बीएसएफ एवं आईटीबीपी को शील्ड देकर बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं।

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक श्री अरूण देव गौतम ने भी सभी विजेता टीमों के खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन से सुरक्षा बलों के बीच समन्वय, अनुशासन और खेल भावना को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी इसी उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने भी संक्षिप्त उद्बोधन दिया। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 14वीं अखिल भारतीय पुलिस तीरंदाजी प्रतियोगिता 2025-26 (महिला एवं पुरुष) के समापन समारोह में औपचारिक रूप से प्रतियोगिता के समापन की घोषणा की। समारोह के समापन उपरांत परंपरा के अनुसार प्रतियोगिता ध्वज को आगामी प्रतियोगिता हेतु मुख्य अतिथि द्वारा ध्वज को चेयरमैन अखिल भारतीय पुलिस कंट्रोल बोर्ड नई दिल्ली के प्रतिनिधि संयुक्त संचालक सोनम अग्निहोत्री को सौंपा गया। 

इस अवसर पर अहिवारा विधायक श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा, महापौर श्रीमती अलका बाघमार, एडीजी श्री विवेकानन्द सिन्हा, एडीजी श्री एसआरपी कल्लूरी, संभागायुक्त श्री सत्यनारायण राठौर, कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल सहित पुलिस विभाग के अधिकारी व कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।



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