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सामाजिक पहचान, एकता और संस्कारों से ही सशक्त होगा समाज : विधायक रिकेश सेन

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सास–बहू ने एक साथ कुर्सी दौड़ में भाग लेकर दिया सामाजिक समरसता का संदेश
-तिल-गुड़ व्यंजन प्रतियोगिता बनी आकर्षण का केंद्र
भिलाई। 
महाराष्ट्रीयन तेली समाज दुर्ग–भिलाई का भव्य सामाजिक सम्मेलन मकर संक्रांति के पावन अवसर पर सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक परंपराओं और संगठनात्मक एकता के संदेश के साथ हर्षोल्लासपूर्वक संपन्न हुआ।सम्मेलन में राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई, चरोदा एवं रायपुर से बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने सहभागिता की।राजनांदगांव से मंडल अध्यक्ष राजेश समरीत, महिला मंडल अध्यक्ष मंजू बुटले, युवा मंडल अध्यक्ष प्रकाश समरीत, वासुदेव गायधनी, साधना घाटोडे, सारिका समरीत सहित अनेक पदाधिकारी वाहन काफिले के साथ सम्मेलन में शामिल हुए, जिससे सामाजिक एकजुटता और आपसी समन्वय का सशक्त संदेश गया। सम्मेलन की संपूर्ण व्यवस्थाओं का दायित्व मुख्य प्रभारी के रूप में राजेंद्र डोरले, संजय मरघडे, मोहीत साखरकर, देवेंद्र बारई, मोहीत निखाडे, राजेंद्र भांगे एवं जीतेश भोंगाडे ने संभाला।महिला मंडल की ओर से निशा मलेवार, हेमा पोहाने एवं सरीता कामडे ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम का कुशल, अनुशासित एवं प्रेरणादायी संचालन डॉ. अजय आर्य ने किया।अपने संचालन में उन्होंने प्रेरक पंक्तियों के माध्यम से कहा कि ‘समाज की असली ताकत उसके संस्कार, सहभागिता और परस्पर सम्मान में निहित होती है’।उनके संचालन ने पूरे आयोजन को ऊर्जा, उद्देश्य और भावनात्मक जुड़ाव से भर दिया।इस अवसर पर डॉ. अजय आर्य सम्मान भी प्रदान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने अपने प्रभावी उद्बोधन में कहा कि सामाजिक पहचान और सामाजिक एकता के बिना कोई भी समाज आगे नहीं बढ़ सकता।उन्होंने कहा कि ‘जब समाज अपनी पहचान को समझकर संगठित होता है, तभी उसकी बात सुनी जाती है और उसका भविष्य सुरक्षित होता है’।उन्होंने समाज के साथ मिलकर सामूहिक रूप से आगे बढ़ने पर बल देते हुए कहा कि समाज का विकास तभी संभव है जब सभी वर्ग एक-दूसरे का हाथ थामकर आगे बढ़ें।उन्होंने बच्चों को विशेष संस्कार देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यदि समय रहते नैतिक और सामाजिक संस्कार नहीं दिए गए तो समाज की बेटियां असुरक्षा और पीड़ा का शिकार बनती रहेंगी।मजबूत संस्कार ही सुरक्षित परिवार और सशक्त समाज की नींव होते हैं।

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 विशिष्ट अतिथि स्मिता दोडके ने महिला समाज की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज महिलाएं समाज का नेतृत्व करने में पूर्णतः सक्षम हैं।उन्होंने कहा कि जब महिलाओं को परिवार का सहयोग और समर्थन मिलता है, तब वे समाज को नई दिशा देती हैं।उन्होंने महिलाओं से आत्मविश्वास के साथ आगे आने और परिवारों से महिला नेतृत्व को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। समाज के अध्यक्ष राजेंद्र डोरले ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि समाज की एकता और सहभागिता ही इस सम्मेलन की सबसे बड़ी सफलता है और इसी भावना के साथ समाज को आगे बढ़ाया जाएगा।
महिला मंडल अध्यक्ष निशा मलेवार ने कहा कि महिला समाज ने सदैव संगठन को मजबूती दी है और आगे भी सामाजिक व पारिवारिक मूल्यों की रक्षा में महिलाएं अग्रणी भूमिका निभाती रहेंगी। सम्मेलन में सांस्कृतिक, सामाजिक एवं पारिवारिक सहभागिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही।कुर्सी दौड़ प्रतियोगिता में पुरुष वर्ग से दीपक धानकुटे एवं राजकुमार हावगे तथा महिला वर्ग से रेखा डोरले एवं शोभा भोंगाडे विजेता रहीं।विशेष रूप से सास और बहू द्वारा एक साथ कुर्सी दौड़ में भाग लेना सामाजिक समरसता, आपसी प्रेम और पारिवारिक सौहार्द का प्रेरक उदाहरण बना, जिसे उपस्थित जनसमूह ने तालियों के साथ सराहा।इस अवसर पर हेमा पोहाने सहित अनेक वरिष्ठजनों ने इस पहल की सराहना की। मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में तिल- गुड़ से बने पारंपरिक व्यंजनों की प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसकी जिम्मेदारी नीता मोटघरे ने संभाली।स्वाद, प्रस्तुति और पारंपरिकता के आधार पर व्यंजनों का मूल्यांकन किया गया।हल्दी- कुमकुम एवं वान वितरण का आयोजन रेणू गभने, छाया साखरवाडे, सोनाली निखाडे एवं सुहासिनी साकुरे द्वारा किया गया।रंगोली प्रतियोगिता में सुहासिनी साकुरे एवं शोभा भोंगाडे का योगदान सराहनीय रहा।टाइम हाउजी का संचालन जयश्री हावगे एवं मिताली सोनटक्के ने किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में परी कामडे, आंचल कामडे एवं आशी द्वारा प्रस्तुत नृत्य ने सभी का मन मोह लिया।पारंपरिक महाराष्ट्रीयन वेशभूषा में सजी महिलाओं की उपस्थिति ने सम्मेलन को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक प्रतिभाओं, बुजुर्गों एवं नवविवाहित दंपतियों का सम्मान किया गया।विशेष सम्मान दिव्यांश निखाडे एवं डॉ. गरीमा बाल पांडे को प्रदान किया गया।
सेवानिवृत्त सम्मान के अंतर्गत विनोज मलेवार, कुशांक निखाडे, गोपाल चोपकर एवं विनोद साखरवाडे को सम्मानित किया गया। सम्मेलन के समापन अवसर पर समाज की एकता, पहचान और संगठन को और अधिक मजबूत करने का सामूहिक संकल्प लिया गया।यह सम्मेलन महाराष्ट्रीयन तेली समाज के लिए न केवल प्रेरणादायी बल्कि सामाजिक समरसता, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करने वाला ऐतिहासिक आयोजन सिद्ध हुआ।कार्यक्रम के अंत में स्नेह भोज का आयोजन किया गया।



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