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सीजीएमएससीएल द्वारा जारी किये गए डायल 108

पीएम जनमन, हाट बाजार और ग्रामीण मोबाइल मेडिकल सेवा के टेंडर पर उठ रहे हैं सवाल..

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चहेती कंपनी को लाभ पहुंचाने नियम बदलने का आरोप 
रायपुर
। सीजीएमएससीएल द्वारा डायल 108, पीएम जनमन, हाट बाजार और ग्रामीण मोबाइल मेडिकल सेवा के लिए जारी किये गए टेंडर पर  विवाद शुरू हो गया है. टेंडर की नियम और शर्तों को लेकर आरोप लग रहे हैं कि इसको किसी खास बड़ी कंपनी के अनुरूप बनाया गया है. 
-डायल 108 को लेकर गड़बड़झाला ...
तकनीकी नंबरों से छोटी कंपनियां बाहर : डायल 108 के लिए टेंडर में यह भी कहा गया है कि कंपनी को तकनीको मूल्यांकन में कम से कम 60 नंबर लाने होंगे। कुल मूल्यांकन में 80 प्रतिशत तकनीकी और सिर्फ 20 प्रतिद्युत वित्तीय अंक गिने जाएंगे। इससे वे कंपनियां, जो कम दाम में सेवा देना चाहती हैं, बाहर हो जाएंगी।
योग्यता की शर्ते सिर्फ एक कंपनी के अनुकूल नई शर्तों में पांच साल का अनुभव, 300 एंबुलेंस का संचालन, 150 करोड़ टर्नओवर और 75 करोड़ नेटवर्थ की अनिवार्यता रखी गई है, जबकि निविदा दस्तावेजों में कहीं छह तो कहीं 10 करोड लिखा है इससे साफ है कि टेंडर में गंभीर लापरवाही बरते हुए इसे किसी खास बड़ी कम्पनी के अनुरूप डिज़ाइन किया गया है. इसके विपरीत वर्ष 2019 में ये शर्तें काफी आसान थी, सिर्फ 2 वर्ष का अनुभव के साथ 100 एम्बुलेंस का संचालन।
-ईएमडी में भारी बढ़ोतरी और गड़बड़ी ...
एक ओर  जहां वर्ष 2019 में हुए  डायल 108 के टेंडर में  300 एंबुलेंस के लिए 50 लाख रुपये की सिक्योरिटी मनी (ईएमडी) ली गई थी, वहीं इस बार 375 एंबुलेंस के लिए सीधे 10 करोड रुपये मांग लिए गए हैं। यही नहीं, निविदा दस्तावेजों में कहीं छह करोड तो कहीं 10 करोड़ लिखा गया है। इससे यह साफ होता है कि टेंडर में गंभीर लापरवाही और भ्रम की स्थिति है।
-कंसोर्टियम पर रोक ..
पहले अलग-अलग विशेषज्ञ कंपनिया मिलकर टेंडर में भाग ले सकती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं कर पाएंगी। नई शर्तों में यह साफ किया गया है कि कंसोर्टियम की अनुमति नहीं है। इससे कई योग्य कंपनियां आवेदन नहीं कर पा रहीं।
पीएम जनमन और ग्रामीण एमएमयू में अनुभव से ज्यादा सॉफ्टवेयर को तव्वजो 
डायल 108 की तरह विभाग द्वारा जारी किये गए 3 और मोबाइल मेडिकल यूनिट के टेंडर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, इनमें पीएम जनमन, हाट - बाजार और ग्रामीण मोबाइल मेडिकल यूनिट शामिल है. इन टेंडरों को लेकर भी विवाद गहरा रहा है कि इन्हें भी डायल 108 की तरह ही किसी खास कंपनी के लिए बनाया गया है. इन तीनों टेंडर में भी कंसोर्टियम को बैन कर दिया गया है. 
टेंडरों की कॉपी-पेस्ट साजिश: एक ही थाली, अलग-अलग नाम!
तीनों टेंडर ऐसा है  मानो CGMSCL ने एक ही दस्तावेज को कॉपी-पेस्ट करके तीन अलग-अलग नाम दे दिए हों। शर्तें, भाषा, और पात्रता मानदंड इतने एकसमान हैं. 
1 करोड़ का डिजिटल हेल्थ अनुभव ...
बोलीदाता से कम-से-कम ₹1 करोड़ के डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म के विकास, रोलआउट, और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में लागू करने का अनुभव मांगा गया है। सवाल यह है—क्या आदिवासी इलाकों में मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) चलाने के लिए इतने महंगे डिजिटल प्रोजेक्ट का अनुभव जरूरी है?  इस शर्त को लेकर भी आरोप लग रहे हैं कि इसे कुछ गिनी-चुनी IT फर्मों को फायदा पहुंचाने के लिए गढ़ी गई है।
सॉफ्टवेयर को सेवा से ऊपर रखा गया: असली हेल्थ प्रोवाइडर्स बाहर!
बोलीदाता के पास केवल वही प्रोजेक्ट्स का अनुभव मान्य होगा, जो राज्य या राष्ट्रीय स्तर की स्वास्थ्य योजनाओं में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के तहत हों, और वह भी सरकारी निकाय या UN एजेंसियों के माध्यम से हो. जानकर CGMSCL की इस नीति को जमीनी स्तर के सेवा प्रदाताओं को बाहर करने की साजिश बता रहे हैं।



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