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Breaking : छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से होगी धान खरीदी, किसानों को मिलेगा 3100 रुपये प्रति क्विंटल

Breaking : छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से होगी धान खरीदी, किसानों को मिलेगा 3100 रुपये प्रति क्विंटल

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कैबिनेट के 19 महत्वपूर्ण फैसले: बिजली बिल में राहत मार्च 2027 तक बढ़ी, सरकारी कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के किसानों, सरकारी कर्मचारियों, उद्योगों, सड़क एवं रेल अधोसंरचना, पर्यटन और खेल विकास से जुड़े 19 महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने, किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान का मूल्य देने, घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को राहत जारी रखने तथा शासकीय सेवकों और उनके आश्रित परिवारों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने सहित कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी।
बैठक में अधोसंरचना और पर्यटन विकास के लिए 500-500 करोड़ रुपये के मिशन, मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन, नई रेल परियोजना, औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन और कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने से संबंधित फैसले भी लिए गए।
-15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी, 3100 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा मूल्य
कैबिनेट ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में प्रदेश के किसानों से 15 नवंबर 2026 से धान खरीदी करने का निर्णय लिया है। इसके तहत 27.50 लाख से अधिक किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदा जाएगा।
किसानों को राहत देते हुए एग्रीस्टेक आईडी वाले पिछले वर्ष के पंजीकृत किसानों को धान विक्रय के लिए मान्य किया गया है। ऐसे किसानों को दोबारा पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। एग्रीस्टेक में पंजीयन होने के कारण किसानों को धान बेचने के लिए समिति में अलग से ऋण पुस्तिका लाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से धान के रकबे का ऑनलाइन निर्धारण किया जाएगा। वास्तविक किसानों से खरीदी सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू रहेगी। किसानों को सुविधा देने के उद्देश्य से 360 नए उपार्जन केंद्र शुरू किए जाएंगे। इस तरह प्रदेश में कुल 3100 केंद्रों के माध्यम से धान खरीदी की जाएगी। कैबिनेट ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 और 2025-26 के अतिशेष धान के नीलामी के माध्यम से निराकरण के संबंध में मंत्रिमंडलीय उपसमिति के निर्णय का भी अनुसमर्थन किया।
इसके साथ ही कृषक उन्नति योजना में संशोधन को मंजूरी दी गई। खरीफ-2026 में धान फसल के लिए आदान सहायता राशि प्रति क्विंटल के बजाय प्रति एकड़ के आधार पर देने का निर्णय लिया गया है। सरकार के अनुसार, इससे किसानों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा फसल विविधीकरण, कृषि यंत्रीकरण, उन्नत बीज और नई तकनीकों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
-बिजली बिल में राहत 31 मार्च 2027 तक
मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान (एम-ऊर्जा) के तहत घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक बिजली बिल में दी जा रही रियायत पूर्ववत जारी रहेगी। योजना का लाभ लेने के लिए 400 यूनिट तक मासिक बिजली खपत की पात्रता अवधि को 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दिया गया है। इस निर्णय से लगभग 7.25 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को राहत का लाभ मिलता रहेगा।
-सरकारी कर्मचारियों और परिवारों को कैशलेस इलाज
मंत्रिपरिषद ने राज्य के शासकीय सेवकों और उनके आश्रित परिवारजनों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। नई व्यवस्था के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में पात्र हितग्राहियों को उपचार के समय स्वयं चिकित्सा व्यय का भुगतान कर बाद में प्रतिपूर्ति की लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।
पूर्व-अनुमोदन और चिकित्सा दावों की प्रक्रिया ऑनलाइन एवं डिजिटल माध्यम से की जाएगी। इससे विशेष रूप से गंभीर बीमारियों और आपातकालीन परिस्थितियों में सरकारी कर्मचारियों तथा उनके परिवारों को समय पर उपचार और आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
-सड़क निर्माण कार्यों के लिए 230 करोड़ रुपये तक की राहत
बिटुमिन यानी डामर की कीमतों में असाधारण वृद्धि को देखते हुए कैबिनेट ने सड़क निर्माण, नवीनीकरण और संधारण कार्यों से जुड़े ठेकेदारों को मूल्य राहत देने का निर्णय लिया है।
छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के अंतर्गत संचालित कार्यों के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक वास्तव में खरीदी और उपयोग की गई बिटुमिन की मात्रा के आधार पर राज्य शासन बजट से 130.88 करोड़ रुपये का अनुदान देगा।
वहीं, लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत राज्य वित्तपोषित सड़क कार्यों के ऐसे अनुबंध, जिनकी निविदाएं 1 अप्रैल 2026 से पहले प्राप्त हुई थीं, उनमें 15 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक खरीदे और उपयोग किए गए डामर पर भी मूल्य राहत दी जाएगी। इसके लिए लगभग 70 से 100 करोड़ रुपये के अतिरिक्त व्यय का अनुमान है। सरकार का मानना है कि इससे लंबित सड़क निर्माण कार्यों को गति मिलेगी और उन्हें निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने में मदद मिलेगी।
-मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन के लिए 500 करोड़ रुपये
प्रदेश में अधोसंरचना विकास की योजना, परियोजना निर्माण, गुणवत्ता, निगरानी और संधारण व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन-2026 को मंजूरी दी गई है। यह मिशन वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए संचालित होगा। इसके लिए कुल 500 करोड़ रुपये, अर्थात प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है।
लोक निर्माण विभाग मिशन का नोडल विभाग और छत्तीसगढ़ रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGRIDCL) क्रियान्वयन एजेंसी होगी। इसके तहत सड़क नेटवर्क का मास्टर प्लान, डेटा आधारित योजना निर्माण, परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की अग्रिम तैयारी, GIS आधारित नियोजन, डिजिटल निगरानी, गुणवत्ता परीक्षण और सड़क सुरक्षा ऑडिट पर जोर दिया जाएगा। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और नए वित्तीय मॉडल को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
-पर्यटन विकास मिशन पर 500 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी
छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन को मंजूरी दी गई है। ‘पर्यटन से समृद्धि’ के ध्येय के साथ अगले पांच वर्षों में लगभग 500 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है।
मिशन के अंतर्गत पर्यटन स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और स्वच्छता का विकास किया जाएगा। इसके साथ ही होमस्टे, निजी निवेश और पर्यटन उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे स्थानीय युवाओं, महिलाओं और स्व-सहायता समूहों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
-295 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना को मंजूरी
कैबिनेट ने कटघोरा-तखतपुर-मुंगेली-कवर्धा-खैरागढ़-डोंगरगढ़ रेल परियोजना के त्वरित क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CRCL) के माध्यम से शत-प्रतिशत इक्विटी निवेश किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
लगभग 295 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना की अनुमानित लागत 8,000 करोड़ रुपये है। परियोजना में 25 प्रतिशत यानी करीब 2,000 करोड़ रुपये की अंशपूंजी प्रस्तावित है। इसमें छत्तीसगढ़ शासन और रेल मंत्रालय लगभग 1,000-1,000 करोड़ रुपये का योगदान देंगे। राज्य शासन की हिस्सेदारी मिनरल डेवलपमेंट फंड, जिला खनिज न्यास (DMF) और राज्य बजट के माध्यम से वहन की जाएगी।
परियोजना से रेल सुविधा से वंचित क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। साथ ही उद्योग, पर्यटन, रोजगार और कृषि उत्पादों के लिए नए बाजारों तक पहुंच का विस्तार होगा।
-मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन को मंजूरी
प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के प्रारूप को मंजूरी दी गई। वर्ष 2026-27 में इसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
मिशन के तहत विद्यालयों और चयन शिविरों के माध्यम से टैलेंट हंट तथा मुख्यमंत्री ट्रॉफी का आयोजन कर प्रतिभाओं की पहचान की जाएगी। इसके बाद खिलाड़ियों को फीडर सेंटरों में बुनियादी प्रशिक्षण, राज्य खेल अकादमियों में खेल-विशिष्ट उन्नत प्रशिक्षण और उच्च प्रदर्शन केंद्रों में विशेषज्ञ कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस तथा प्रदर्शन विश्लेषण की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
दस प्रमुख खेल विधाओं में कोर और डेवलपमेंट समूह बनाकर पदक की संभावना वाले खिलाड़ियों को लक्षित सहायता और प्रतियोगिताओं में भागीदारी के अवसर दिए जाएंगे। पहले चरण में अंबिकापुर, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, जगदलपुर और जशपुर में फीडर सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
'0 करोड़ रुपये या अधिक निवेश वाली कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं को प्रोत्साहन
कैबिनेट ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत राज्य के विशाल कोयला भंडार का मूल्यवर्धित उपयोग बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये अथवा उससे अधिक निवेश वाली कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं को विशेष प्रोत्साहन पैकेज दिया जाएगा।
इसके अलावा छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015 में संशोधन को मंजूरी दी गई। इससे औद्योगिक भूमि के उपयोग को सरल बनाने, भूमि संबंधी विवाद कम करने, खाली अथवा अतिरिक्त भूमि का उत्पादक उपयोग करने और पारदर्शी ई-नीलामी के माध्यम से आवंटन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
-दुर्ग सहित पांच स्थानों पर सरकारी परिसंपत्तियों का पुनर्विकास
मंत्रिपरिषद ने रिडेवलपमेंट योजना के दूसरे चरण में पांच परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इनमें शासकीय पोल्ट्री फार्म-दुर्ग, वेटनरी हॉस्पिटल परिसर रामानुजगंज, जशपुर में पुलिस लाइन एवं रणजीता स्टेडियम के पीछे की भूमि, सक्ती का बुधवारी बाजार और धमतरी के रुद्री चौक की शासकीय भूमि एवं जर्जर परिसंपत्तियां शामिल हैं।
इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर किया जाएगा। इससे सरकारी भूमि का बेहतर उपयोग, नई शासकीय परिसंपत्तियों का निर्माण, राजस्व में वृद्धि और रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य है।
-राजनांदगांव में भंडारण और फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा
कैबिनेट ने राजनांदगांव जिले के ग्राम खपरीकला में केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) को भंडारण सुविधा विकसित करने के लिए 10 एकड़ भूमि आवंटित करने की मंजूरी दी। इससे कृषि उपज और अन्य वस्तुओं के सुरक्षित भंडारण की क्षमता बढ़ेगी।
इसी जिले के ग्राम सोमनी में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के माध्यम से मल्टी फ्रूट प्रोसेसिंग फैसिलिटी स्थापित करने के लिए राजगामी संपदा की 31.55 एकड़ भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। लगभग 400 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश वाली इस परियोजना में किसानों से सीधे फल खरीदने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे 1,000 से अधिक प्रत्यक्ष और 5,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। फल उत्पादक किसानों को प्रसंस्करण और विपणन के लिए बेहतर सुविधाएं तथा बाजार उपलब्ध हो सकेंगे।
-नगर पंचायत कूंरा का नाम अब कुंवरगढ़
कैबिनेट ने रायपुर जिले की नगर पंचायत कूंरा का नाम बदलकर कुंवरगढ़ करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। कुंवरगढ़ को छत्तीसगढ़ के 36 गढ़ों में शामिल ऐतिहासिक स्थल के रूप में जाना जाता है। यहां प्राचीन मंदिर, ऐतिहासिक धरोहरें और तालाब हैं। स्थानीय नागरिक लंबे समय से नगर पंचायत को उसकी ऐतिहासिक पहचान के अनुरूप कुंवरगढ़ नाम देने की मांग कर रहे थे।
-राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े नौ मामले वापस लेने की अनुमति
मंत्रिपरिषद ने विशुद्ध रूप से राजनीतिक आंदोलनों से संबंधित नौ प्रकरणों को जनहित में न्यायालय से वापस लेने के लिए उपसमिति की 30 सितंबर 2026 की बैठक में की गई अनुशंसा के अनुसार आगामी कार्यवाही की अनुमति प्रदान की।
-अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
कैबिनेट ने वन मुख्यालय, अरण्य भवन, नवा रायपुर में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (पे-लेवल-16) का एक अस्थायी पद एक वर्ष के लिए सृजित करने की स्वीकृति दी। इससे पीएम गति-शक्ति, प्रगति और परिवेश पोर्टल से संबंधित कार्यों के त्वरित निष्पादन, समन्वय एवं निगरानी में मदद मिलेगी।
सुशासन एवं अभिसरण विभाग के विभागाध्यक्ष कार्यालय के लिए आयुक्त/संचालक, अपर संचालक और विशेषज्ञ (अपर संचालक स्तर) के एक-एक पद सहित कुल तीन नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई।
इसके अलावा स्वर्गीय डॉ. राकेश मोहन चंदोला, सह प्राध्यापक, चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर की 19 अक्टूबर 1987 से 7 जनवरी 2022 तक की सेवा को परिवार पेंशन के प्रयोजन के लिए नियमित सेवा मानने का निर्णय लिया गया। इसके आधार पर उनके पात्र परिवारजनों को परिवार पेंशन, एरियर्स और नियमानुसार ब्याज का भुगतान स्वीकृत किया गया।
मंत्रिपरिषद के इन निर्णयों के माध्यम से राज्य सरकार ने कृषि, बिजली उपभोक्ता राहत, स्वास्थ्य सुविधा, सड़क और रेल अधोसंरचना, पर्यटन, खेल, औद्योगिक निवेश तथा रोजगार सृजन से जुड़े क्षेत्रों में विकास को गति देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।



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