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पर्यटन बना छत्तीसगढ़ का आर्थिक इंजन, संस्कृति बनी पहचान, पुरातत्त्व बना गौरव दो वर्षों की उपलब्धियों ने बदली तस्वीर

पर्यटन बना छत्तीसगढ़ का आर्थिक इंजन, संस्कृति बनी पहचान, पुरातत्त्व बना गौरव दो वर्षों की उपलब्धियों ने बदली तस्वीर

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पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पिछले दो वर्षों की उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजना प्रस्तुत की

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रायपुर।  छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक एवं संचालक, संस्कृति एवं पुरातत्त्व विवेक आचार्य ने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पिछले दो वर्षों की उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजनाओं का विस्तृत विवरण दिया। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर आर्थिक विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और विरासत संवर्धन तीनों क्षेत्रों में समन्वित प्रगति का मॉडल स्थापित किया है।

-पर्यटन को मिला उद्योग का दर्जा

पर्यटन विभाग- निवेश, रोजगार और वैश्विक पहचान की ओर तेज़ कदम

      छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने से निजी निवेश के नए द्वार खुले। राज्य और देश के प्रमुख शहरों में आयोजित  इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रमों के माध्यम से 500 करोड़ रुपये से अधिक निजी निवेश सुनिश्चित किया गया। इससे पर्यटन अधोसंरचना, होटल, रिसॉर्ट और साहसिक पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। रामलला दर्शन योजना के तहत आईआरसीटीसी के साथ हुए समझौते के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में लगभग 42 हजार 500 श्रद्धालुओं को विशेष ट्रेनों से अयोध्या दर्शन कराया गया। यह योजना धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है। राज्य में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नई होम-स्टे नीति लागू की गई। 500 नए होम-स्टे विकसित करने का लक्ष्य है। राज्य सरकार ने 24 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ होम-स्टे नीति 2025-30 को अधिसूचित किया है। यह नीति राज्य भर में नए होम-स्टे के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए पंूजी निवेश सब्सिडी और ब्याज सब्सिडी प्रदान करती है, जो ग्रामीण और समुदाय आधारित पर्यटन का समर्थन करती है, इसके लिए राज्य सरकार ने बजट भी स्वीकृत किया है। 

-फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर- 350 करोड़ की परियोजना

           डॉ. रोहित यादव ने बताया कि भारत सरकार की राज्यों को पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता योजना (SASCI) के तहत एकीकृत फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर के विकास की मंजूरी मिली है, जिसकी कुल अनुमानित लागत 350 करोड़ रूपए है। भूमि पूजन 24 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के करकमलों से हुई है। यह छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय फिल्म निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी के निर्माण से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश और दुनिया में एक नई पहचान मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी पहल के माध्यम से छत्तीसगढ़ न केवल फिल्म निर्माण और सांस्कृतिक आयोजनों का एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर होगा, बल्कि यह परियोजना राज्य की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगी। चित्रोत्पला फिल्म सिटी और ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मंच मिलेगा, निवेश के नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त होगी। यह परियोजना आने वाले वर्षों में राज्य के युवाओं, कलाकारों और पर्यटन क्षेत्र के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी।

-भोरमदेव मंदिर कॉरिडोर परियोजना

       संचालक, संस्कृति एवं पुरातत्त्व विवेक आचार्य ने  कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित की जा रही है।  राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। एक जनवरी 2026 को भारत के पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र शेखावत एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस परियोजना का भूमिपूजन किया। भोरमदेव मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है और इस कॉरिडोर निर्माण के माध्यम से आने वाले हजार वर्षों तक इसे संरक्षित रखने का कार्य किया जा रहा है।

-मयाली-बगीचा विकास, सिरपुर एकीकृत विकास का मास्टर प्लान तैयार

         भारत सरकार ने जशपुर में मयाली-बगीचा सर्किट अंर्तगत तीन प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास के लिए 10 करोड़ रूपए मंजूर किए हैं। इस परियोजना का भूमिपूजन 25 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के द्वारा किया गया था।  सिरपुर एकीकृत विकास सिरपुर को एक विश्व विरासत स्थल में बदलने के लिए एक मास्टर प्लान विकसित किया जा रहा है। 

-चित्रकोट ग्लोबल डेस्टिनेशन डेवलपमेंट

        चित्रकोट इंडिजिनस नेचर रिट्रीट नामक एक व्यापक प्रस्ताव पर्यटन मंत्रालय को प्रस्तुत करने के लिए तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य चित्रकोट को एक वैश्विक स्तर पर पुनर्विकसित करना है। इस परियोजना हेतु पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार से 250 करोड़ रूपए की फंडिंग अपेक्षित है। 

-छत्तीसगढ़ पर्यटन का राष्ट्रव्यापी प्रचार

पर्यटन सचिव ने बताया कि छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड ने स्पेन, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में आयोजित वैश्विक यात्रा कार्यक्रमों में भाग लेकर छत्तीसगढ़ पर्यटन का देश-विदेश मे भी प्रचार-प्रसार किया, जिससे छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को वैश्विक मानचित्र पर भी जगह मिली। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने फिक्की जैसी संस्थाओं के साथ भी भागीदारी की है, जिससे देश के प्रमुख प्रचार मंचों और कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। यूनिवर्सल ट्रैवल कॉन्क्लेव जैसी प्रसिद्ध यात्रा प्रदर्शनियों में सक्रिय रूप से भाग लिया। 

-राज्य में पर्यटन से संबंधित व्यवसायों के पंजीकरण में तेजी से वृद्धि

छत्तीसगढ़ में जनवरी 2024 तक टूर ऑपरेटर व ट्रेवल ऑपरेटरों की संख्या मात्र 30 थी, वर्तमान में यह संख्या 300 से अधिक पहुंच चुकी है। इसके अतिरिक्त 15 होटल छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के साथ पंजीकृत है, जिसकी और अधिक बढ़ने की संभावना है। रिसॉर्टस और मोटल की परिचालन दक्षता और रणनीतिक प्रबंधन के कारण छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल का वित्तीय लाभ वित्त वर्ष 2024-25 में जहां 2 करोड़ रूपए था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में लाभ पांच गुना बढ़कर 10 करोड़ रूपए हो गया है।

-छत्तीसगढ़ पर्यटन से स्थानीय व्यक्तियों के लिए रोजगार, 500 नए होमस्टे विकसित करने का लक्ष्य

सचिव डॉ. रोहित यादव ने बताया कि छत्तीसगढ़ की पर्यटन नीति 2026 के तहत अगले पांच वर्षों में 350 करोड़ रूपए. से अधिक के निवेश का अनुमान है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल लीजकम डेवलपमेंट मॉडल के तहत 17 पर्यटन संपत्तियों को निजी भागीदारी से आउटसोर्स कर 200 करोड़ रूपए का निवेश आकर्षित करने की योजना बना रही है, जिससे सैकड़ों स्थानीय व्यक्तियों के लिए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। राज्यभर में 500 नए होमस्टे विकसित करने का लक्ष्य है। इसी तरह चित्रकोट में टेंट सिटी के विकास की योजना है, जिसके तहत चित्रकोट फॉल्स के पास साहसिक गतिविधियों के साथ कम से कम 50 लक्जरी टेंट लगाए जाएंगे। फिक्की के सहयोग से छत्तीसगढ़ ट्रैवल मार्ट नामक एक वार्षिक फ्लैगशिप कार्यक्रम स्थापित किया जाएगा। यह आयोजन बीटूबी पर्यटन को बढ़ावा देने पर केन्द्रित होगा, जिसके तहत भारतीय राज्यों के 200 से अधिक टूर ऑपरेटरों को आकर्षित करने योजना है।

-संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की उपलब्धियां

संस्कृति एवं पुरातत्त्व के संचालक विवके आचार्य ने बताया कि संस्कृति विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ के कलाकारों, साहित्यकारों का चिन्हारी पोर्टल में पंजीयन किया जा रहा है, जिससे विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ उन्हें मिल सके। उन्होंने बताया कि चिन्हारी पोर्टल मंे पंजीकृत 141 कलाकारों एवं साहित्यकारों को वित्तीय वर्ष-2024-25 में लगभग 34 लाख रूपए एवं वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 130 कलाकारों को लगभग 31 लाख रूपए की राशि पेंशन के रूप में प्रदान की गई। इसी तरह कलाकार कल्याण कोष योजना के अंर्तगत कलाकारों और साहित्यकारों अथवा उनके परिवार के सदस्यों की बीमारी, दुर्घटना एवं मृत्यु की स्थिति में वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 08 अर्थाभाव ग्रस्त साहित्यकारों/कलाकारों को 2 लाख रूपए एवं वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 44 प्रकरणों हेतु 14 लाख रूपए स्वीकृत किया गया है। राज्य शासन छत्तीसगढ़ के कलाकारों एवं साहित्यकारों के प्रत्येक सुख-दुख मेें साथी है, तथा संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ राज्य के कलाकारों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है। 

-बस्तर पंडुम

          छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग द्वारा बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को संरक्षित और प्रचारित करने के लिए किया जा रहा है। यह उत्सव तीन चरणों में 10 जनवरी से 9 फरवरी 2026 तक चलेगा। जनजातीय नृत्य, लोकगीत, नाट्य, वाद्य यंत्र, वेश-भूषा-आभूषण, पूजा पद्धति, हस्तशिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय, पारंपरिक व्यंजन, क्षेत्रीय साहित्य, वन-आधारित औषधीय ज्ञान, पर्यटन और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ेगी।

-पुरातत्व क्षेत्र की उपलब्धियां

       छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 25 किलोमीटर पूर्व स्थित ग्राम रीवां (रीवांगढ़) में चल रहे पुरातात्विक उत्खनन ने प्रदेश के प्राचीन इतिहास को लेकर नई और महत्वपूर्ण जानकारी सामने रखी है। संस्कृति विभाग के पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय द्वारा कराए जा रहे इस उत्खनन में वैज्ञानिक ए.एम.एस. रेडियोकार्बन (कार्बन-14) डेटिंग के माध्यम से यह प्रमाणित हुआ है कि इस क्षेत्र में मानव सभ्यता उत्तर वैदिक काल यानी 800 ईसा पूर्व से भी पहले विकसित हो चुकी थी।

    भारत भवन विविध कला एवं सांस्कृतिक केन्द्र, राज्य अभिलेखागार, राजकीय मानव संग्रहालय एवं स्वामी विवेकानंद स्मारक संग्रहालय की स्थापना की योजना है।



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