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150 वर्ष की विरासत: PM मोदी ने 'वंदे मातरम' को बताया स्वतंत्रता संग्राम का घोषणापत्र- कहा, राष्ट्रगीत को अस्वीकार करने से हुई थी भारत के विभाजन की शुरुआत

150 वर्ष की विरासत: PM मोदी ने 'वंदे मातरम' को बताया स्वतंत्रता संग्राम का घोषणापत्र- कहा, राष्ट्रगीत को अस्वीकार करने से हुई थी भारत के विभाजन की शुरुआत

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने को राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में, देशव्यापी स्मरणोत्सव का उद्घाटन किया। नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित इस मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री ने सामूहिक 'वंदे मातरम' गायन का नेतृत्व किया।

इस अवसर को चिह्नित करने के लिए, प्रधानमंत्री ने एक स्मारक डाक टिकट और एक विशेष स्मारक सिक्का भी जारी किया। यह वर्ष भर चलने वाला समारोह 7 नवंबर 2026 तक जारी रहेगा, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के इतिहास और महत्व को जन-जन तक पहुंचना है।

वंदे मातरम की महत्ता और विभाजन पर पीएम का बयान

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के महत्व की बात की। उन्होंने कहा कि यह गीत केवल दो शब्द नहीं हैं, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम का घोषणापत्र था जिसने देश के हर कोने में क्रांति की भावना जगाई। उन्होंने कहा कि देश को यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत का विभाजन एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि इसकी नींव वंदे मातरम को अस्वीकार करने से पड़ी थी। प्रधानमंत्री के अनुसार, कुछ लोगों ने इस गीत को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसने विभाजनकारी ताकतों को ताकत दी।

गीत का इतिहास और बंकिमचंद्र का योगदान

प्रधानमंत्री ने 'वंदे मातरम' के इतिहास और रचनाकार बंकिमचंद्र चटर्जी के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि 150 साल पहले बंकिमचंद्र चटर्जी ने इस गीत के माध्यम से मातृभूमि की वंदना और भक्ति की भावना को अभिव्यक्ति दी थी। यह गीत पहली बार बंकिमचंद्र के उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित हुआ था और बाद में यह भारतीय राष्ट्रीय चेतना का केंद्र बन गया।

पीएम मोदी ने बताया कि 'वंदे मातरम' ने स्वतंत्रता आंदोलन के हर चरण में क्रांतिकारियों को प्रेरित किया और उन्हें एकजुट करने का काम किया।

स्मरणोत्सव का उद्देश्य और आगे की रूपरेखा

केंद्र सरकार द्वारा आयोजित इस स्मरणोत्सव का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को इस ऐतिहासिक गीत की विरासत से जोड़ना है। इस एक वर्ष की अवधि के दौरान, देश भर के शिक्षण संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और सांस्कृतिक केंद्रों में 'वंदे मातरम' के महत्व पर आधारित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इन कार्यक्रमों में शैक्षणिक प्रतियोगिताएं, संगोष्ठियां और सामूहिक गायन शामिल होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समारोह राष्ट्रभक्ति के प्रति समर्पण के एक चिरस्थायी प्रतीक के सम्मान में एक श्रद्धांजलि है ।



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