नाटो से बाहर निकलने पर विचार कर रहा अमेरिका, डोनाल्ड ट्रंप बोले- ये कागजी शेर
वाशिंगटन, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे नाटो से बाहर निकलने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। ये बयान ऐसे वक्त सामने आया है, जब नाटो देशों ने ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध का समर्थन करने से इनकार कर दिया है। ट्रंप ने नाटो को ‘कागजी शेर’ बताते हुए कहा, मैं नाटो से कभी प्रभावित नहीं हुआ। मैं हमेशा से जानता था कि वे सिर्फ कागजी शेर हैं। व्लादिमीर पुतिन भी यह बात जानते हैं।
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह नाटो की अमेरिकी सदस्यता पर पुनर्विचार करेंगे, तो उन्होंने कहा, हां, बिल्कुल, मैं कहूंगा कि इस पर पुनर्विचार संभव नहीं है। मैं नाटो से कभी प्रभावित नहीं हुआ। मैं हमेशा से जानता था कि वे सिर्फ कागजी शेर हैं। और वैसे पुतिन भी यह बात जानते हैं। अमेरिका हमेशा अपने साथियों के लिए खड़ा रहा है, लेकिन इस बार कोई भी अमेरिका के साथ नहीं आया।
ट्रंप के बयान से ठीक पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि ईरान युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका नाटो के साथ अपने संबंधों का पुनर्मूल्यांकन कर सकता है। उन्होंने कहा, अगर अब हम उस स्थिति में पहुंच गए हैं, जहां नाटो गठबंधन का मतलब यह है कि हम उन ठिकानों का उपयोग नहीं कर सकते तो नाटो एकतरफा रास्ता है। यह संघर्ष खत्म होने के बाद हमें उस रिश्ते पर नए सिरे से विचार करना होगा।
दरअसल, नाटो देशों ने ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका का साथ देने से मना कर दिया है। अमेरिका चाहता था कि नाटो देश होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाने के लिए अपने युद्धपोत भेजें, लेकिन किसी ने भी ऐसा नहीं किया। कई नाटो देशों ने तो अमेरिका को अपने सैन्य अड्डे इस्तेमाल करने तक की अनुमति नहीं दी थी। इस वजह से ट्रंप नाराज है। इससे पहले भी ट्रंप ने नाटो देशों पर भड़ास निकाली थी।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने आज देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ईरान के खिलाफ चल रही जंग उनकी नहीं है। ब्रिटेन इसका हिस्सा नहीं बनेगा। ईरान युद्ध में शामिल होने के बारे में अपनी राय बदलने के लिए मुझ पर बहुत दबाव है, लेकिन मैं अपनी राय नहीं बदलने वाला। चाहे कितना भी दबाव हो, चाहे कितना भी शोर हो, मैं ब्रिटिश प्रधानमंत्री हूं और मुझे अपने देश के हितों के लिए काम करना है।
नाटो अमेरिका और उसके सहयोगियों का एक सैन्य गठबंधन है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 4 अप्रैल, 1949 को एक संधि के जरिए इसका गठन हुआ था। अमेरिका, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम समेत कुल 12 देशों ने इसकी स्थापना की थी। अभी सदस्यों की संख्या 32 है। अमेरिका और कनाडा को छोड़कर सभी सदस्य यूरोपीय हैं। नाटो का अनुच्छेद-5 कहता है कि अगर कोई नाटो देश पर हमला करता है तो इसे सभी देशों पर हमला माना जाता है।
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