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दिल्ली के बाद बिहार में अग्निकांड: मुजफ्फरपुर अस्पताल में भीषण आग, ICU में मचा हड़कंप; 5 की मौत, 20 से ज्यादा मरीज घायल

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एक अस्पताल में भीषण आग लगने से 5 लोगों की मौत हो गई। ICU में धुआं भरने से अफरा-तफरी मच गई, जबकि 20 से अधिक मरीज घायल हुए हैं। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है।

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दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में लगी भीषण आग की घटना के अगले ही दिन बिहार के मुजफ्फरपुर से एक और दर्दनाक हादसा सामने आया है। जिले के एक निजी अस्पताल में आग लगने से कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक मरीज घायल बताए जा रहे हैं। कई गंभीर मरीजों को नजदीकी अस्पतालों में रेफर किया गया है।

 

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के बाद अस्पताल के ICU सहित कई हिस्सों में घना और जहरीला धुआं फैल गया, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही दमकल और बचाव दल मौके पर पहुंचा तथा मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अभियान शुरू किया गया।

प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, हालांकि प्रशासन ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जिला प्रशासन के अनुसार आग लगने के दौरान अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों की स्थिति का पता लगाने का प्रयास जारी है।

मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि फिलहाल तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि अस्पताल के ICU प्रभारी भी गंभीर रूप से झुलस गए हैं और उनका इलाज चल रहा है। कुछ मरीजों के परिजनों ने प्रशासन से शिकायत की है कि हादसे के बाद उन्हें अपने परिजनों की जानकारी नहीं मिल पा रही है।

डीएम ने बताया कि शुरुआती जांच में ऑक्सीजन यूनिट और मॉनिटरिंग सिस्टम में हुए शॉर्ट सर्किट को आग की संभावित वजह माना जा रहा है। मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

 

 

​5वीं मंजिल पर स्थित आईसीयू (ICU) वार्ड में भड़की आग 
जानकारी के मुताबिक, यह खौफनाक हादसा सुबह करीब 3 बजे घटित हुआ। अस्पताल की 5वीं मंजिल पर स्थित क्रिटिकल केयर यानी आईसीयू वार्ड में अचानक शॉर्ट सर्किट के कारण स्पार्किंग हुई और वहां मौजूद जीवन रक्षक उपकरणों व तारों ने तुरंत आग पकड़ ली। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे वेंटिलेशन सिस्टम को ब्लॉक करते हुए पूरी मंजिल पर घना और जहरीला काला धुआं भर गया।

 

आईसीयू में भर्ती मरीज पहले से ही गंभीर स्थिति में वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे, जिसके कारण वे अपनी जगह से हिलने में भी पूरी तरह असमर्थ थे और धुएं के गुबार में उनका दम घुट गया।

​आग लगते ही मरीजों को तड़पता छोड़ भागे डॉक्टर और स्टाफ 
​इस भीषण अग्नि कांड के बाद अस्पताल प्रबंधन और वहां के ड्यूटी स्टाफ के खिलाफ स्थानीय नागरिकों और पीड़ित परिजनों का भारी गुस्सा फूट पड़ा है। मृतक और घायल मरीजों के परिजनों ने बेहद गंभीर और संवेदनहीनता के आरोप लगाते हुए कहा कि जैसे ही अस्पताल परिसर में धुआं फैला, वहां तैनात डॉक्टर, नर्स और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ मरीजों को उनके हाल पर तड़पता हुआ छोड़कर खुद अपनी जान बचाकर मौके से फरार हो गए।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और उनका कहना है कि हादसे के बाद अस्पताल प्रशासन ने मृत मरीजों के शव तक परिजनों को समय पर मुहैया नहीं कराए और विधिक कागजी कार्रवाई के नाम पर आनाकानी करते रहे।

​खिड़कियां और दरवाजे तोड़कर निकाले गए मरीज 
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की करीब एक दर्जन गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं। अग्निशमन अधिकारी आर.एन. पांडेय ने घटना की जमीनी हकीकत बयां करते हुए बताया कि जब हमारी रेस्क्यू टीम सुबह तड़के मौके पर पहुंची, तो स्थिति बेहद भयावह और नियंत्रण से बाहर थी। पूरा आईसीयू वार्ड काले धुएं से पटा हुआ था और अस्पताल का ज्यादातर स्टाफ वहां से गायब था।

दमकल कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बेहद मुस्तैदी से काम किया और वार्ड की खिड़कियां व लोहे के दरवाजे तोड़कर अंदर फंसे 20 से अधिक गंभीर मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला, जिन्हें तुरंत दूसरे नजदीकी सुरक्षित अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल के फायर एनओसी और सुरक्षा ऑडिट की विधिक जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का कड़ा मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

ICU में भर गया था धुआं, कर्मचारी नहीं मिले मौजूद
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सुबह करीब 3 बजे आग लगने की सूचना मिली थी। जब दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे, तब तक ICU पूरी तरह धुएं से भर चुका था। उन्होंने बताया कि बचाव दल को अस्पताल में अधिकांश कर्मचारी मौजूद नहीं मिले।

अलर्ट मिलते ही करीब एक दर्जन दमकल गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। कई घंटों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दमकलकर्मियों ने ICU और अन्य वार्डों तक पहुंचने के लिए दरवाजे और खिड़कियां तोड़ीं तथा धुएं से भरी इमारत में फंसे मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला।



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