अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद यूएई और कुवैत पर मिसाइल हमले हुए हैं। ईरान के लावन द्वीप पर भी हमला हुआ। जानें क्यों नाकाम साबित हो रहा है युद्धविराम।
अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच दो सप्ताह के सीजफायर (युद्धविराम) के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। बुधवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत ने ईरान की ओर से किए गए भारी मिसाइल और ड्रोन हमलों की जानकारी दी है। वहीं, ईरान के लावन द्वीप पर स्थित एक तेल रिफाइनरी पर भी हमला हुआ है, जिससे वहां भीषण आग लग गई।
यूएई और कुवैत पर ड्रोन-मिसाइल की बौछार
यूएई के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों को बीच में ही रोका। लगभग इसी समय कुवैत ने भी "हमलों की तीव्र लहर" का सामना करने की पुष्टि की। कुवैत के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ईरान की ओर से 28 ड्रोन भेजे गए थे, जिनमें से 8 का सीधा निशाना कुवैत था। एयर डिफेंस सिस्टम सुबह 8 बजे से ही इन हमलों का जवाब देने में सक्रिय है।
ईरान के लावन द्वीप पर हमला
ईरानी सरकारी टेलीविजन के अनुसार, लावन द्वीप पर एक तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया है। दमकल कर्मी आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह हमला किसने किया। खास बात यह है कि ये सभी घटनाएं तब हो रही हैं जब कुछ समय पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच 11वें घंटे में सीजफायर पर सहमति बनी थी।
क्यों नाकाम साबित हो रहा है सीजफायर?
सवाल उठ रहा है कि अगर समझौता हुआ था, तो हमले क्यों जारी हैं? दरअसल, यह युद्धविराम बेहद नाजुक है। समझौते की शर्तों में कई मोर्चों को शामिल नहीं किया गया है। उदाहरण के लिए, लेबनान में इजरायल के सैन्य ऑपरेशन इस सीजफायर के दायरे से बाहर हैं। इसके अलावा, वाशिंगटन और तेहरान के बीच गहरा अविश्वास भी इसकी एक बड़ी वजह है, जिससे दोनों पक्ष एक-दूसरे की नीयत पर शक कर रहे हैं।
जेडी वेंस ने बताया 'नाजुक संघर्षविराम'
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस समझौते को एक "नाजुक संघर्षविराम" (Fragile Truce) करार दिया है। समझौते की शर्तों को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ईरान का दावा है कि उसे हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेने का अधिकार मिल गया है, लेकिन किसी अन्य देश ने इस पर अपनी सहमति की पुष्टि नहीं की है। साथ ही, लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ जारी लड़ाई को लेकर भी पक्षकारों की राय अलग-अलग है।
तेहरान की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन
सीजफायर के ऐलान के बाद तेहरान की सड़कों पर कट्टरपंथियों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के झंडे जलाए और "समझौता करने वालों की मौत" के नारे लगाए। यह गुस्सा दर्शाता है कि जमीन पर हालात अब भी विस्फोटक बने हुए हैं। फिलहाल यह साफ नहीं है कि दो हफ्ते का यह 'पॉज' क्षेत्र में स्थायी शांति ला पाएगा या यह केवल एक बड़े तूफान से पहले की शांति है।
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