उड़ान से पहले ही खतरा, टकराए विमानों के पंख
देश में हवाई यात्रा को सुगम बनाने के लिए विमान सेवाओं में लगातार विस्तार किया जा रहा है। मगर इसके साथ-साथ हाल के वर्षों में उड़ानों में सुरक्षा चूक और तकनीकी खराबी की घटनाएं भी चिंताजनक रूप से बढ़ी हैंं। ऐसा लगता है कि अब तक हुए छोटे-बड़े हादसों से कोई सबक नहीं लिया गया है।
दिल्ली हवाई अड्डे पर गुरुवार को दो विमानों के पंख आपस में टकरा गए, लेकिन गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। इस घटना ने एक बार फिर हवाई सफर की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर क्या वजह है कि एक के बाद एक सुरक्षा चूक के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन व्यवस्था में सुधार के ठोस एवं कारगर प्रयास धरातल पर नजर नहीं आते हैं?
इस तरह की घटनाओं में विभागीय कार्रवाई संबंधित कर्मियों को निलंबित करने और जांच प्रक्रिया शुरू करने की औपचारिकता तक ही सीमित रह जाती है। चूक किस वजह से हुई और भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए, इसकी जानकारी शायद ही कभी सार्वजनिक हो पाती है।
दरअसल, देश में विमान सेवाओं का विस्तार तो हो रहा है, लेकिन इसके लिए जरूरी बुनियादी ढांचा उस गति से विकसित नहीं हो पाया है। यह बात भी छिपी नहीं है कि विमानों की संख्या के मुकाबले पायलटों, हवाई यातायात नियंत्रकों और इंजीनियरों की व्यवस्था का अभाव बना हुआ है। इसके अलावा, सुरक्षा सावधानियों की अनदेखी और पुराने उपकरणों का इस्तेमाल भी हादसों का कारण बनता है।
यह विचित्र है कि विमान संचालन के प्रशिक्षण के दौरान जिस तरह की बारीकियों को अनिवार्य माना जाता है, हवाई पट्टी पर उसे लेकर भी लापरवाही बरती गई। इससे स्पष्ट है कि जब हवाई अड्डे पर ही यात्रियों की जान जोखिम में पड़ जाती है, तो हवा में सफर के दौरान किस तरह के खतरे पैदा हो सकते हैं, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।हर हादसे की तरह इस मामले में भी एक वायु यातायात नियंत्रक और दो पायलटों को ड्यूटी से हटा दिया गया है, लेकिन सवाल है कि महज इस तरह की कार्रवाई से सुरक्षा चूक का स्थायी हल निकल पाएगा? जाहिर है जब तक समस्या की जड़ में जाकर उसे खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाएगा।
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