Jwala

Express News

देश विदेश

कर्बला से खामेनेई तक, ईरान में शहादत का मतलब बहुत गहरा है, कर्बला में हुई हुसैन की शहादत

शिया इस्लाम ईरान का आधिकारिक धर्म है। ईरान में शहादत केवल एक धार्मिक अवधारणा नहीं है बल्कि यह ईरान की राजनीतिक सोच का अहम हिस्सा है।

61202032026012855ayatollah-ali-khamenei.webp

कर्बला में हुई हुसैन की शहादत

अली के बाद उनके दो बेटों- हसन इब्न अली और हुसैन इब्न अली, ने उनके संघर्ष को आगे बढ़ाया। 680 ईस्वी में हुसैन और उनके कुछ समर्थकों को कर्बला की लड़ाई में शहीद कर दिया गया क्योंकि उन्होंने उस दौरान के खलीफा यजीद प्रथम के प्रति निष्ठा की शपथ लेने से इनकार कर दिया था।

यजीद प्रथम के शासनकाल को अन्याय से भरा हुआ और इस्लाम के मूल सिद्धांतों से दूर माना जाता था। मुहर्रम के महीने के 10वें दिन हुसैन और उनके समर्थकों की शहादत हुई थी और कर्बला की लड़ाई ने इसे महान स्तर पर पहुंचा दिया।

RO. NO 0001
RO. NO 13944/30

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान के सरकारी टीवी और कई अफसरों ने कहा कि उन्होंने शहादत हासिल की है। दुनिया भर में शहीद या शहादत का मतलब किसी मकसद, किसी धार्मिक काम के लिए अपनी जान कुर्बान करना होता है लेकिन ईरान में इसका मतलब काफी गहरा और सांस्कृतिक भी है।

शिया इस्लाम इस्लामिक गणराज्य ईरान का आधिकारिक धर्म है। ईरान में शहादत केवल एक धार्मिक अवधारणा नहीं है बल्कि यह ईरान की राजनीतिक सोच का अहम हिस्सा है।

अगर आप ईरान के इतिहास को देखें तो कई मौकों पर शहादत की अवधारणा काफी मजबूत हुई है। विशेषकर 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध में किए गए बलिदान को ईरान की राष्ट्रीय पहचान का अहम हिस्सा बनाया गया। साल 2022 में महसा अमीनी नाम की युवती की मौत के बाद देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए थे तो इन प्रदर्शनों के दौरान वहां मारे गए प्रदर्शनकारी “वूमेन, लाइफ, फ्रीडम” के नारे के प्रतीक बन गए थे।

इस्लाम में शिया समुदाय मानता है कि पैगंबर मोहम्मद के बाद राजनीतिक और धार्मिक सत्ता उनके जैविक वंशजों को मिलनी चाहिए थी लेकिन 632 ईस्वी में पैगंबर मोहम्मद के अनुयायियों के बीच विवाद हो गया।

सुन्नी और शिया मुसलमान

विवाद बढ़ने के बाद वे दो गुटों में बंट गए। इनमें से एक गुट की कमान पैगंबर मोहम्मद के सहयोगी अबू बकर के पास थी जबकि दूसरे समूह का नेतृत्व पैगंबर मोहम्मद के चचेरे भाई और दामाद अली ने किया था। अबू बकर इस्लाम के पहले खलीफा बने और उनके समर्थकों को सुन्नी मुसलमान कहा गया, दूसरी ओर अली के साथ आने वाले लोग शिया मुसलमान कहलाए।

जब अली चौथे खलीफा बने तो उनके शासनकाल में सुन्नियों और उनके समर्थकों यानी शियाओं के बीच कई हिंसक संघर्ष हुए। 661 ईस्वी में अली की हत्या कर दी गई और तब उन्हें शिया इस्लाम में पहला शहीद माना गया।

कर्बला में हुई हुसैन की शहादत

अली के बाद उनके दो बेटों- हसन इब्न अली और हुसैन इब्न अली, ने उनके संघर्ष को आगे बढ़ाया। 680 ईस्वी में हुसैन और उनके कुछ समर्थकों को कर्बला की लड़ाई में शहीद कर दिया गया क्योंकि उन्होंने उस दौरान के खलीफा यजीद प्रथम के प्रति निष्ठा की शपथ लेने से इनकार कर दिया था।

यजीद प्रथम के शासनकाल को अन्याय से भरा हुआ और इस्लाम के मूल सिद्धांतों से दूर माना जाता था। मुहर्रम के महीने के 10वें दिन हुसैन और उनके समर्थकों की शहादत हुई थी और कर्बला की लड़ाई ने इसे महान स्तर पर पहुंचा दिया।

हुसैन की याद में होते हैं कार्यक्रम

शिया इस्लाम की मान्यताओं के मुताबिक, हुसैन की शहादत अत्याचार के विरुद्ध नैतिक प्रतिरोध थी। हुसैन के बलिदान को न्याय और सम्मान के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। हुसैन की याद में हर साल मुहर्रम के दसवें दिन आशूरा मनाया जाता है। इस दौरान उनकी शहादत को याद किया जाता है।

हुसैन की याद में होने वाले कार्यक्रम ईरान के लोगों के जीवन का अहम हिस्सा हैं। हुसैन की शहादत से जुड़ी घटनाओं की याद आज भी ईरान के सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक ताने-बाने में अहम भूमिका निभाती है।

1978-79 की इस्लामिक क्रांति के दौरान हुसैन की शहादत को एक प्रेरणा शक्ति माना गया और आखिरकार इसने पहलवी शासन के पतन और ईरान में इस्लामिक शासन के सत्ता में आने का रास्ता तैयार किया। इस्लामिक क्रांति के नेता और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की नींव रखने वाले अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी ने ईरान में शहादत के विचार को विशेष महत्व दिया। उन्होंने इसे इस्लामिक आस्था का सम्मानजनक पहलू माना। इस वजह से ईरान में आज भी शहादत सार्वजनिक चर्चा का प्रमुख विषय है।

 



एक टिप्पणी छोड़ें

Data has beed successfully submit

35417072026190028whatsappimage2026-07-18at12.23.55am.jpeg

Related News

Advertisement

RO. NO 13944/30
65617072026192135mahtari_vandan.jpeg
87817072026182112chatgptimagejul17,2026,11_44_24pm.png
296050820262228031009034642.jpg
35417072026190028whatsappimage2026-07-18at12.23.55am.jpeg
913050820260601571009015285.jpg
593050820260643251009016084.jpg
783050820262200211009034623.jpg
342050820262210111009034638.jpg
813030820260459501008965901.png
960030820260416021008965415.png
RO. NO 0001
100020820261248371008852523.png

Advertisement

RO. NO 13944/30
65617072026192135mahtari_vandan.jpeg
RO. NO 0001
100020820261248371008852523.png
RO. NO 0001

Popular Post

This Week
This Month
All Time

स्वामी

संपादक- पवन देवांगन 

पता - बी- 8 प्रेस कॉम्लेक्स इन्दिरा मार्केट
दुर्ग ( छत्तीसगढ़)

ई - मेल :  dakshinapath@gmail.com

मो.- 9425242182, 7746042182

हमारे बारे में

हिंदी प्रिंट मीडिया के साथ शुरू हुआ दक्षिणापथ समाचार पत्र का सफर आप सुधि पाठकों की मांग पर वेब पोर्टल तक पहुंच गया है। प्रेम व भरोसे का यह सफर इसी तरह नया मुकाम गढ़ता रहे, इसी उम्मीद में दक्षिणापथ सदा आपके संग है।

सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।

स्वामी / संपादक : ज्वाला प्रसाद अग्रवाल

सिंधी कॉलोनी, सिंधी गुरुद्वारा के पीछे, दुर्ग, छत्तीसगढ़, पिनकोड - 491001

मो.- 9993590905

विज्ञापन एवं सहयोग के लिए इस पर भुगतान करें

बैंक का नाम : IDBI BANK

खाता नं. : 525104000006026

IFS CODE: IBKL0000525

Address : Dani building, Polsaipara, station road, Durg, C.G. - 490001

SCAN QR
qr-paytm
SCAN QR
Googlepay

Copyright 2025-26 JwalaExpress - All Rights Reserved

Designed By - Global Infotech.