3000 किमी वन क्षेत्रों से गुजरने वाले रेलमार्गों पर लागू होगी नई प्रणाली
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने वन्य क्षेत्रों से गुजरने वाले रेलमार्गों पर हाथियों एवं अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीक अपनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। देशभर में लगभग 3000 किलोमीटर लंबे ऐसे रेलमार्गों पर ऑप्टिकल फाइबर सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित कैमरों की मदद से हादसों को रोकने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है।
रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को रेल मंत्रालय में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान इस पहल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर, पूर्वी और उत्तरी भारत में बड़ी संख्या में रेलमार्ग घने वन क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं, जहां वन्यजीवों के ट्रेन से टकराने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
रेल मंत्री ने बताया कि देशभर में ऐसे करीब 3000 किलोमीटर रेलमार्ग चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से लगभग 1375 किलोमीटर पर इस नई तकनीक को लागू करने का काम शुरू हो चुका है। हाल ही में असम में राजधानी एक्सप्रेस से कटकर 7-8 हाथियों की मौत की घटना के बाद रेलवे ने इस दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं।
उन्होंने बताया कि रेलवे पटरियों के साथ-साथ ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) बिछाई जा रही है, जिसमें विशेष सेंसर लगे हैं। ये सेंसर हाथी या अन्य बड़े जानवरों के चलने से जमीन में होने वाली हलचल को 200 से 250 मीटर की दूरी से पहचान लेते हैं। इससे उत्पन्न तरंगीय कंपन एक सेकेंड से भी कम समय में नजदीकी नियंत्रण कक्ष तक पहुंच जाता है।
सूचना मिलते ही यातायात नियंत्रक संबंधित क्षेत्र से गुजरने वाली ट्रेन के लोको पायलट को अलर्ट कर देता है, जिससे वह समय रहते ट्रेन की गति कम कर सकता है।
इसके साथ ही रेलवे एआई आधारित हाई-टेक कैमरे भी विकसित कर रहा है, जो कम से कम 500 मीटर तक की दूरी पर पटरी पर मौजूद जानवरों की पहचान कर सकेंगे। ये कैमरे इंजन के आगे लगाए जाएंगे और कंट्रोल रूम से संकेत मिलते ही सक्रिय हो जाएंगे। खास बात यह है कि ये कैमरे रात के घने अंधेरे और कोहरे में भी साफ दृश्य उपलब्ध कराएंगे।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अगले दो से तीन वर्षों में वन क्षेत्रों से गुजरने वाले सभी संवेदनशील रेलमार्गों को इस आधुनिक तकनीक से लैस कर दिया जाएगा। इससे हाथियों सहित अन्य वन्यजीवों की मौतों पर प्रभावी रोक लग सकेगी और मानव-वन्यजीव संघर्ष में भी कमी आएगी।
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