Jwala

Express News

देश विदेश

जातिगत भेदभाव पर यूजीसी के नियम: केंद्र सरकार अपने रुख पर पुनर्विचार क्यों कर रही है?

जातिगत भेदभाव पर यूजीसी के नियम: केंद्र सरकार अपने रुख पर पुनर्विचार क्यों कर रही है?

70120082026182917ugc-equity-regulations-2026.webp

भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के उस समानता नियम पर पुनर्विचार कर रही है जिसे चुनौती दी गई है। नरेंद्र मोदी सरकार फिलहाल इस पूरे विवाद से निकलने की कोशिश कर रही है। एक तरफ वह सामान्य वर्ग को भी नाराज नहीं करना चाहती तो दूसरी तरफ उसे एससी, एसटी और ओबीसी का भी ख्याल रखना है, क्योंकि 1989 से पार्टी के प्रमुख मतदाता वर्ग रहे उच्च जातियों में संभावित “दुरुपयोग” को लेकर आक्रोश के संकेत मिल रहे हैं।

ऐसे में केंद्र सरकार ने फिलहाल कदम पीछे खींचने के बजाय मामले पर पुनर्विचार का रास्ता चुना है। इससे सरकार को विवाद को शांत करने और आगे की रणनीति तय करने के लिए वक्त मिल सकता है, लेकिन बीजेपी के लिए यह फैसला आसान नहीं है। वजह है देश का सामाजिक और चुनावी गणित। ओबीसी, एससी और एसटी आबादी मिलाकर सवर्ण आबादी से कहीं ज्यादा है। लिहाजा सरकार को दोनों पक्षों के बीच संतुलन साधकर चलना होगा।

सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि इस पर पुनर्विचार किया जा रहा है। पीठ उन याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रही थी जिनमें दिशानिर्देशों को चुनौती दी गई थी। इन याचिकाओं में मुख्य रूप से यह तर्क दिया गया था कि ये दिशानिर्देश जाति-आधारित भेदभाव को केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों के खिलाफ ही संदर्भित करते हैं, जबकि सामान्य वर्ग के लोगों को इससे बाहर रखा गया है।

जनवरी 2026 में लागू हुए नियमों के खिलाफ मुख्य आपत्ति यह थी कि उनमें “भेदभाव की झूठी शिकायतों” के खिलाफ दंड का कोई प्रावधान नहीं था। साथ ही, नियमों का पालन नहीं करने वाले शैक्षणिक संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया था

आक्रोश का कारण यह था कि पिछले साल फरवरी में सुझाव और आपत्तियां मांगने के लिए जारी किए गए नियमों के मसौदे में झूठी शिकायतों के मामले में दंड का प्रावधान किया गया था, लेकिन जनवरी 2026 में सामने आए अंतिम नियमों में यह प्रावधान हटा दिया गया।

इसके अलावा, वर्तमान में स्थगित नियमों में जातिगत भेदभाव को परिभाषित करते समय ओबीसी का विशेष रूप से उल्लेख किया गया था और उच्च शिक्षण संस्थानों में गठित की जाने वाली “समानता समितियों” में ओबीसी प्रतिनिधियों को शामिल करने का आह्वान किया गया था। नियमों में कहा गया था, “जाति-आधारित भेदभाव का अर्थ है अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी के सदस्यों के विरुद्ध केवल जाति या जनजाति के आधार पर किया जाने वाला भेदभाव।”

अधिवक्ता विनीत जिंदल की याचिका में पूछा गया कि जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा में “सामान्य या उच्च जातियों से संबंधित व्यक्तियों को उनके द्वारा झेले गए भेदभाव की प्रकृति, गंभीरता या संदर्भ की परवाह किए बिना, इसके सुरक्षात्मक दायरे से बाहर क्यों रखा गया है”।

भाजपा के नेता इस बात से सहमत हैं कि इन नियमों के कारण सामान्य वर्ग के लोगों में बेचैनी पैदा हुई है, और बिहार में भाजपा की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली सीट बांकीपुर में भाजपा की अभूतपूर्व हार “उच्च जाति के गुस्से” की अभिव्यक्ति थी, क्योंकि इस शहरी सीट पर इन जातियों के मतदाताओं की संख्या ज्यादा है।

चिंता की बात यह भी थी कि राजपूत करणी सेना ने भी जयपुर में इस नियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। जिसके चलते पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करना पड़ा।

पार्टी को कुछ ही महीनों में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का सामना करना है और राज्य में सामान्य वर्ग की बहुलता है। 1931 में, जब पिछली जाति जनगणना हुई थी, तब उत्तर प्रदेश में 9.1% ब्राह्मण और 7.9% राजपूत थे, और कुल उच्च जाति की आबादी लगभग 20% थी। साथ ही, पिछले तीन दशकों में राज्य में ओबीसी और दलित आंदोलन भी काफी सक्रिय रहा है।



एक टिप्पणी छोड़ें

Data has beed successfully submit

897021120260635181011005435.png
437021120260634491010996317.jpg
542021120260634241011005422.png
553251020261222291010838759.png
215251020261218411010837320.png
336231020261223311010791831.png

Related News

Advertisement

Advertisement

ताज़ा समाचार

Popular Post

This Week
This Month
All Time

Advertisement

Advertisement

स्वामी

संपादक- पवन देवांगन 

पता - बी- 8 प्रेस कॉम्लेक्स इन्दिरा मार्केट
दुर्ग ( छत्तीसगढ़)

ई - मेल :  dakshinapath@gmail.com

मो.- 9425242182, 7746042182

हमारे बारे में

हिंदी प्रिंट मीडिया के साथ शुरू हुआ दक्षिणापथ समाचार पत्र का सफर आप सुधि पाठकों की मांग पर वेब पोर्टल तक पहुंच गया है। प्रेम व भरोसे का यह सफर इसी तरह नया मुकाम गढ़ता रहे, इसी उम्मीद में दक्षिणापथ सदा आपके संग है।

सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।

स्वामी / संपादक : ज्वाला प्रसाद अग्रवाल

सिंधी कॉलोनी, सिंधी गुरुद्वारा के पीछे, दुर्ग, छत्तीसगढ़, पिनकोड - 491001

मो.- 9993590905

विज्ञापन एवं सहयोग के लिए इस पर भुगतान करें

बैंक का नाम : IDBI BANK

खाता नं. : 525104000006026

IFS CODE: IBKL0000525

Address : Dani building, Polsaipara, station road, Durg, C.G. - 490001

SCAN QR
qr-paytm
SCAN QR
Googlepay

Copyright 2025-26 JwalaExpress - All Rights Reserved

Designed By - Global Infotech.