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दुर्ग निगम बजट बैठक में हंगामा: मंत्री–महापौर खींचतान उजागर, भाजपा पार्षदों ने ही घेरा शहरी सरकार को
दुर्ग। दुर्ग नगर निगम की मंगलवार को आयोजित बजट बैठक में शहर के विकास कार्यों के श्रेय को लेकर केबिनेट मंत्री गजेन्द्र यादव और महापौर अलका बाघमार के बीच चल रही खींचतान खुलकर सामने आ गई। बैठक के दौरान मंत्री समर्थक भाजपा पार्षदों ने ही शहरी सरकार को कई मुद्दों पर घेरते हुए जमकर हंगामा किया, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही।
बैठक की शुरुआत से ही माहौल गरम रहा। मंत्री समर्थक पार्षदों ने आरोप लगाया कि मंत्री गजेन्द्र यादव द्वारा शहर के विकास कार्यों के लिए स्वीकृत कराई गई करोड़ों की राशि को निगम प्रशासन छिपाने का प्रयास कर रहा है, जबकि छोटे-छोटे कार्यों का श्रेय लेने के लिए व्यापक प्रचार किया जा रहा है। इस मुद्दे पर पार्षद संजय अग्रवाल और कुलेश्वर साहू काफी मुखर रहे।

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मुक्तिधाम उन्नयन कार्य को लेकर भी विवाद गहराया। पार्षदों का कहना था कि मंत्री द्वारा करीब ढाई करोड़ रुपये स्वीकृत कराए गए, जबकि निगम द्वारा 50-50 लाख के कार्यों का ही प्रचार किया जा रहा है। इस पर आक्रोशित पार्षद संजय अग्रवाल आयुक्त सुमित अग्रवाल से खेद व्यक्त करने की मांग पर अड़ गए और नारेबाजी शुरू हो गई। हंगामे के चलते सभापति श्याम शर्मा को 15 मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
बाद में आयुक्त ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि संबंधित पत्र की जानकारी उन्हें अभी मिली है और निगम इस पर उचित उल्लेख करेगा, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
बैठक में शुलभ शौचालयों के सफाई ठेके को लेकर भी विवाद हुआ। पार्षदों ने आरोप लगाया कि नियमों के विरुद्ध केवल दो महिला स्व-सहायता समूहों को ठेका देकर अनियमितता की गई है। इस मुद्दे पर भी जोरदार हंगामा हुआ, जिसके चलते कार्यवाही एक घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी। बाद में सभापति ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए।
रोचक बात यह रही कि जिन मुद्दों पर विपक्षी कांग्रेस पार्षदों को सरकार को घेरना था, वहां सत्तापक्ष के भाजपा पार्षद ही आक्रामक नजर आए। ऐसे में कांग्रेस पार्षद अपेक्षाकृत शांत रहे, जो सदन में चर्चा का विषय बना रहा।
प्रश्नकाल भी हंगामेदार रहा। पार्षद सरस निर्मलकर ने सफाई कर्मचारियों की अनुपस्थिति का मुद्दा उठाया, जिस पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने से फिर शोर-शराबा हुआ। सभापति ने इस मामले की 10 दिन में जांच के निर्देश दिए।
इसके अलावा पार्षद अजीत वैद्य ने जलघर की निविदा प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाया, जबकि आशीष चंद्राकर ने अपने वार्ड में विकास कार्य नहीं होने पर नाराजगी जताई।
दोपहर बाद महापौर अलका बाघमार ने वित्तीय वर्ष के लिए 580.12 करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जिसे 5.20 लाख रुपये के लाभ का बजट बताया गया। समाचार लिखे जाने तक बजट पर चर्चा जारी थी।
बैठक में महापौर, सभापति, एमआईसी सदस्य, नेता प्रतिपक्ष सहित बड़ी संख्या में पार्षद और निगम अधिकारी उपस्थित रहे। पूरी बैठक हंगामे और तीखी बहस के बीच संपन्न होती रही, जिससे शहर की राजनीति में अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई।
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