साध्वी प्रज्ञा ने कोर्ट में न्यायाधीश से कहा- मुझे प्रताडि़त और भगवा को बदनाम किया गया
मुंबई । महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष कोर्ट ने भाजपा की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर समेत 7 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान साध्वी प्रज्ञा न्यायाधीश अभय लोहाटी के सामने रो पड़ीं और अपनी भावनात्मक पीड़ा को बयां करने से रोक नहीं पाईं। उन्होंने कहा कि उनको गिरफ्तार करके प्रताडि़त किया गया, जिससे उनका पूरा जीवन बर्बाद हो गया।
साध्वी प्रज्ञा ने अपने आंसू रोकते हुए कहा कि उन्होंने वर्षों तक अपमान सहा और बार-बार संघर्ष करना पड़ा, निर्दोष होने के बावजूद भी उन पर अपराध का कलंक लगा दिया गया। उन्होंने आगे कहा कि आज भगवा ध्वज की जीत है, हिंदुत्व की जीत है। 'भगवा आतंकवाद' का झूठा आख्यान भी आखिरकार झूठा साबित हो गया है। उन्होंने बार-बार आरोपियों को पूछताछ के लिए बुलाए जाने और प्रताडि़त किए जाने पर भी सवाल उठाए।
साध्वी प्रज्ञा ने कहा, मैंने शुरू से कहा था कि जांच के लिए बुलाने के पीछे कोई आधार होना चाहिए। मुझे जांच के लिए बुलाया और गिरफ्तार करके प्रताडि़त किया। इससे मेरा पूरा जीवन बर्बाद हो गया। मुझ पर आरोप लगाए और कोई हमारे साथ खड़ा नहीं हुआ। मैं जिंदा हूं क्योंकि सन्यासी हूं। उन्होंने साजिश करके भगवा को बदनाम किया। ईश्वर दोषियों को सजा देगा। हालांकि, भारत और भगवा को बदनाम करने वालों को आपने गलत साबित नहीं किया।
प्रज्ञा ठाकुर पर मालेगांव बम धमाकों की साजिश में शामिल होने का आरोप था। मामले में दाखिल चार्जशीट के अनुसार, वह धमाके की योजना बनाने के लिए हुई बैठकों में शामिल हुई थीं और उन्होंने हमले को अंजाम देने वाले व्यक्ति को खोजने का जिम्मा लिया था। जिस मोटरसाइकिल में धमाका हुआ था, वह भी प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर पंजीकृत थी। उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत मामला चल रहा था।
मुंबई से करीब 200 किलोमीटर दूर मालेगांव में 29 सितंबर, 2008 को एक मस्जिद के बाहर मोटरसाइकिल में विस्फोटक लगाकर धमाका किया गया। धमाके में 6 लोगों की मौत हुई। मामले की जांच पहले महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) ने की, जो 2011 में एनआईए को सौंपी गई। 2017 में प्रज्ञा को जमानत मिली। कोर्ट ने प्रज्ञा समेत लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, अभिनव भारत संस्था के सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी, रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकरधर द्विवेदी को बरी किया है।
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