Jwala

Express News

रायपुर

विभाजन की पीड़ा से सीख लेकर देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखना हम सभी का दायित्व : मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय

विभाजन की पीड़ा से सीख लेकर देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखना हम सभी का दायित्व : मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय

941140820261454541009218095.jpg

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय हुए शामिल

संचालनालय पुरातत्व से अंबेडकर चौक तक मौन जुलूस में शामिल होकर विभाजन का दंश झेलने वाले परिवारों के प्रति व्यक्त की संवेदना

रायपुर/ इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि वर्तमान को दिशा देने और भविष्य को सुरक्षित बनाने की सीख भी है। इसलिए विभाजन की विभीषिका और उससे मिले सबक को पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्मरण रखना आवश्यक है। विभाजन की पीड़ा हमें देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को हर परिस्थिति में अक्षुण्ण रखने का संदेश देती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के संचालनालय पुरातत्व स्थित मुक्ताकाशी मंच में आयोजित ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। समारोह में विभाजन की त्रासदी में प्राण गंवाने वाले लोगों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया तथा विस्थापन का दंश झेलने वाले परिवारों के संघर्ष, साहस और धैर्य को नमन किया गया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्ष 1947 में देश का विभाजन केवल भू-भाग और सीमाओं का बंटवारा नहीं था। इस त्रासदी ने लाखों लोगों को अपनी जन्मभूमि, घर-बार और अपनों से बिछड़ने के लिए विवश कर दिया। बंगाली, सिख और सिंधी समाज सहित अनेक समुदायों के लाखों परिवारों ने विस्थापन की असहनीय पीड़ा झेली। जिन्होंने अपनी आंखों से उस दौर की भयावहता देखी, उनमें से अधिकांश आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके परिवारों और आने वाली पीढ़ियों की स्मृतियों में वह पीड़ा आज भी जीवित है।

उन्होंने कहा कि विभाजन के कारण विस्थापित हुए लोगों ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना किया। अपना सब कुछ पीछे छोड़कर उन्होंने नए स्थानों पर लगभग शून्य से जीवन की शुरुआत की। अपने अथक परिश्रम, पुरुषार्थ और जीवटता से उन्होंने स्वयं को पुनः स्थापित किया और देश तथा समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका संघर्ष और साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन की त्रासदी में प्राण गंवाने वाले लोगों के बलिदान और विस्थापन का दंश झेलने वाले परिवारों के संघर्ष को उचित सम्मान देने तथा नई पीढ़ी को इतिहास के इस अध्याय से परिचित कराने के उद्देश्य से 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया। यह दिवस केवल अतीत की पीड़ा को स्मरण करने का अवसर नहीं है, बल्कि उस त्रासदी से सीख लेकर राष्ट्र की एकता और अखंडता के प्रति अपने संकल्प को और मजबूत करने का भी अवसर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को यह जानना आवश्यक है कि देश की स्वतंत्रता के साथ विभाजन के समय लाखों देशवासियों को कितनी बड़ी मानवीय त्रासदी से गुजरना पड़ा था। इतिहास का स्मरण इसलिए भी आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति न हो और समाज में एकता, सद्भाव तथा भाईचारे की भावना और मजबूत हो।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज भारत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत का यह संकल्प एकजुट और सशक्त समाज की नींव पर ही साकार होगा। छत्तीसगढ़ भी विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में समाज के प्रत्येक वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि विभाजन की विभीषिका झेलने वाले परिवारों और उनकी पीढ़ियों के साथ राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने समारोह के मुख्य वक्ता पद्मश्री डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए भारतीय इतिहास, संस्कृति और साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने में उनके योगदान की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. द्विवेदी ने प्रसिद्ध साहित्यकार अमृता प्रीतम के उपन्यास पर आधारित अपनी फिल्म ‘पिंजर’ के माध्यम से विभाजन की त्रासदी और मानवीय पीड़ा को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त किया है।

समारोह में विभाजन का दंश झेलने वाले विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों और उनके परिवारजनों ने अपने अनुभव एवं स्मृतियां साझा कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्यक्ष रूप से उस त्रासदी को झेलने वाले अनेक लोग आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी पीढ़ियां उनकी स्मृतियों और संघर्ष की विरासत को संजोए हुए हैं। इन अनुभवों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना इतिहास के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।

*संगठित रहेंगे तो राष्ट्र भी संगठित रहेगा : डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी*

समारोह के मुख्य वक्ता पद्मश्री डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि यदि समाज संगठित रहेगा तो राष्ट्र भी संगठित रहेगा। राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने आह्वान किया कि 14 अगस्त के इस अवसर पर हम सभी यह संकल्प दोहराएं कि भारत की एकता और अखंडता पर कभी आंच नहीं आने देंगे।

डॉ. द्विवेदी ने कहा कि विभाजन के कारण विस्थापित हुए लाखों लोगों के संघर्ष और त्याग को इतिहास में वह स्थान नहीं मिल पाया, जिसके वे अधिकारी थे। उन्होंने अपने घर, संपत्ति और अपनों को खोया, फिर भी कठिन परिस्थितियों में नए सिरे से जीवन खड़ा किया और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दिया। उनके संघर्ष और पुरुषार्थ को भी देश की स्मृतियों में उचित स्थान मिलना चाहिए।

डॉ. द्विवेदी ने विभाजन की ऐतिहासिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा निर्धारण का दायित्व सिरिल रेडक्लिफ को सौंपा गया था, जो जुलाई 1947 में भारत आए थे। उन्हें बहुत कम समय में सीमा निर्धारण का अत्यंत जटिल कार्य पूरा करना था, जबकि भारत की भौगोलिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना से उनका परिचय सीमित था। उन्होंने कहा कि विभाजन से उपजी पीड़ा और उसके परिणामों को समझना आज भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि इतिहास से मिली सीख ही भविष्य के लिए हमें सचेत करती है।

उन्होंने कहा कि समाज को बांटने वाली शक्तियों के प्रति हमें सदैव सजग रहना होगा। राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव की रक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।

*मुख्यमंत्री श्री साय मौन जुलूस में हुए शामिल*

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय संचालनालय पुरातत्व से अंबेडकर चौक तक आयोजित मौन जुलूस में भी शामिल हुए। मौन जुलूस के माध्यम से विभाजन की त्रासदी में प्राण गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा विस्थापन और विभाजन का दंश झेलने वाले लाखों परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई। बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों, विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों ने मौन जुलूस में शामिल होकर विभाजन की विभीषिका का स्मरण किया।

इस अवसर पर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल एवं श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा एवं श्री मोतीलाल साहू, रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत छाबड़ा, संत युधिष्ठिर लाल जी, स्वामी शिवस्वरूपानंद जी, राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज कुमार झा, श्री यशवंत जैन, डॉ. नवीन मार्कण्डेय सहित जनप्रतिनिधिगण, विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थी उपस्थित थे।



एक टिप्पणी छोड़ें

Data has beed successfully submit

62408082026094418hareli_300x250.jpeg

Related News

Advertisement

RO. NO 13997/30
65617072026192135mahtari_vandan.jpeg
62408082026094418hareli_300x250.jpeg
679160820261325471009259529.jpg

Advertisement

Popular Post

This Week
This Month
All Time

Advertisement

Advertisement

RO. NO 13997/30
65617072026192135mahtari_vandan.jpeg
679160820261325471009259529.jpg

स्वामी

संपादक- पवन देवांगन 

पता - बी- 8 प्रेस कॉम्लेक्स इन्दिरा मार्केट
दुर्ग ( छत्तीसगढ़)

ई - मेल :  dakshinapath@gmail.com

मो.- 9425242182, 7746042182

हमारे बारे में

हिंदी प्रिंट मीडिया के साथ शुरू हुआ दक्षिणापथ समाचार पत्र का सफर आप सुधि पाठकों की मांग पर वेब पोर्टल तक पहुंच गया है। प्रेम व भरोसे का यह सफर इसी तरह नया मुकाम गढ़ता रहे, इसी उम्मीद में दक्षिणापथ सदा आपके संग है।

सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।

स्वामी / संपादक : ज्वाला प्रसाद अग्रवाल

सिंधी कॉलोनी, सिंधी गुरुद्वारा के पीछे, दुर्ग, छत्तीसगढ़, पिनकोड - 491001

मो.- 9993590905

विज्ञापन एवं सहयोग के लिए इस पर भुगतान करें

बैंक का नाम : IDBI BANK

खाता नं. : 525104000006026

IFS CODE: IBKL0000525

Address : Dani building, Polsaipara, station road, Durg, C.G. - 490001

SCAN QR
qr-paytm
SCAN QR
Googlepay

Copyright 2025-26 JwalaExpress - All Rights Reserved

Designed By - Global Infotech.