Jwala

Express News

जरा हट के

डायनासोर से पुरानी अरावली...

दिल्ली, हरियाणा-राजस्थान के लिए क्यों है जीवन आधार ?

626231220250751481500x900_2551294-the-aravalli-range-is-essential-for-delhi-haryana-and-rajasthan.webp

 अरावली पर्वत श्रृंखला भारत की सबसे पुरानी पर्वतमालाओं में से एक है, जो लगभग 2.5 अरब वर्ष पुरानी मानी जाती है। वहीं ऐसा माना जाता है कि यह डायनासोर के युग से भी बहुत पहले की है। क्योंकि डायनासोर करीब 23 करोड़ वर्ष पहले अस्तित्व में आए थे। वहीं इस रेंज की चट्टानें पृथ्वी के शुरुआती इतिहास की गवाह हैं और यह फोल्ड माउंटेन सिस्टम का हिस्सा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह रेंज समय के साथ घिसती गई है, लेकिन आज भी अपनी मजबूती से खड़ी है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और उठा विवाद

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है, जिसके बाद देशभर में बहस छिड़ गई है। केंद्र सरकार ने अरावली की संशोधित परिभाषा दी है, लेकिन कई लोगो चिंता जता रहे हैं कि इससे बड़े पैमाने पर खनन शुरू हो सकता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है। लेकिन वहीं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इन आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है

क्या बोले पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ?

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंजूर की गई इस नई परिभाषा से अरावली का 90 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र संरक्षित रहेगा। सरकार का तर्क है कि यह फैसला अरावली की रक्षा को मजबूत करेगा, न कि कमजोर। लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर परिभाषा में बदलाव से कुछ हिस्से खनन के लिए खुल गए, तो पूरी श्रृंखला पर असर पड़ेगा। वे कहते हैं कि अरावली पहले से ही अवैध खनन और शहरीकरण की वजह से कमजोर हो रही है।

दिल्ली, हरियाणा, और राजस्थान के जरूरी, अरावली!

दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों के लिए अरावली जीवन का आधार है क्योंकि यह जल संरक्षण में मुख्य भूमिका निभाती है। दिल्ली-एनसीआर में यह हरित पट्टी के रूप में काम करती है, जो धूल और प्रदूषण को रोकती है और स्वच्छ हवा प्रदान करती है। हरियाणा और राजस्थान में यह सूखे इलाकों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करती है, जिससे कृषि और पशुपालन संभव होता है। बिना अरावली के ये राज्य रेगिस्तानी हो सकते हैं, क्योंकि यह थार के रेत को आगे बढ़ने से रोकने का भी काम करती है। अरावली थार के मरुस्थल के सामने एक दीवार की भांति खड़ी है। इसके न होने पर पूरे उत्तर भारत में थार के रेगिस्तान का रेत फैल जाएगा।

अरावली की भौगोलिक विशेषताएं

अरावली पर्वतमाला दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में एक है। यह दिल्ली से शुरू होकर दक्षिण-पश्चिम दिशा में यह करीब 670 से 700 किलोमीटर तक फैली हुई है। यह हरियाणा, राजस्थान और गुजरात राज्यों से गुजरती है और अहमदाबाद के पास जाकर खत्म होती है। इसकी चौड़ाई 10 से 100 किलोमीटर तक है, जो जगह-जगह पर अलग-अलग है। अरावली की औसत ऊंचाई 600 से 900 मीटर है, लेकिन राजस्थान के माउंट आबू में स्थित गुरु शिखर इसकी सबसे ऊंची चोटी है, जो 1722 मीटर ऊंची है।

गंगा के मैदान की रक्षक

भौगोलिक रूप से यह उत्तर-पश्चिमी भारत की रीढ़ की हड्डी की तरह है, जो पूरे क्षेत्र को मजबूती देती है। अगर आप नक्शे पर देखें, तो यह श्रृंखला थार रेगिस्तान को गंगा के मैदानों से अलग रखती है। इससे रेगिस्तान की रेत आगे नहीं फैल पाती। इसके अलावा दिल्ली जैसे बड़े शहरों के लिए यह प्राकृतिक दीवार की तरह काम करती है।

पर्यावरणीय महत्व

अरावली एक बड़ा पर्यावरणीय हॉटस्पॉट है, जहां विविध प्रकार के पेड़-पौधे और जीव-जंतु पाए जाते हैं। यह वर्षा के पानी को सोखकर भूजल स्तर को बनाए रखती है। इसके अलावा यह कई नदियों के स्रोत का आधार है। यहां के जंगल प्रदूषण को कम करने में मदद करते हैं। यह जंगल कार्बन को अवशोषित करने का काम करते हैं, जिससे जलवायु संतुलन बना रहता है। इसके अलावा, अरावली पर्वतमाला खनिजों से भरपूर है, जैसे लोहा और तांबा, जो अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।



एक टिप्पणी छोड़ें

Data has beed successfully submit

553251020261222291010838759.png
215251020261218411010837320.png
336231020261223311010791831.png

Related News

Advertisement

Advertisement

ताज़ा समाचार

Popular Post

This Week
This Month
All Time

Advertisement

Advertisement

स्वामी

संपादक- पवन देवांगन 

पता - बी- 8 प्रेस कॉम्लेक्स इन्दिरा मार्केट
दुर्ग ( छत्तीसगढ़)

ई - मेल :  dakshinapath@gmail.com

मो.- 9425242182, 7746042182

हमारे बारे में

हिंदी प्रिंट मीडिया के साथ शुरू हुआ दक्षिणापथ समाचार पत्र का सफर आप सुधि पाठकों की मांग पर वेब पोर्टल तक पहुंच गया है। प्रेम व भरोसे का यह सफर इसी तरह नया मुकाम गढ़ता रहे, इसी उम्मीद में दक्षिणापथ सदा आपके संग है।

सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।

स्वामी / संपादक : ज्वाला प्रसाद अग्रवाल

सिंधी कॉलोनी, सिंधी गुरुद्वारा के पीछे, दुर्ग, छत्तीसगढ़, पिनकोड - 491001

मो.- 9993590905

विज्ञापन एवं सहयोग के लिए इस पर भुगतान करें

बैंक का नाम : IDBI BANK

खाता नं. : 525104000006026

IFS CODE: IBKL0000525

Address : Dani building, Polsaipara, station road, Durg, C.G. - 490001

SCAN QR
qr-paytm
SCAN QR
Googlepay

Copyright 2025-26 JwalaExpress - All Rights Reserved

Designed By - Global Infotech.