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अंतरिक्ष के पहले भारतीय राकेश शर्मा 77 के हुए, आज भी सादगी भरा जीवन

अंतरिक्ष के पहले भारतीय राकेश शर्मा 77 के हुए, आज भी सादगी भरा जीवन

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नई दिल्ली।
अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय राकेश शर्मा का जन्म 13 जनवरी 1949 को पंजाब के पटियाला में हुआ था। आज वह 77 वर्ष के हो गए हैं। भारत के लिए गर्व का प्रतीक बन चुके राकेश शर्मा ने 1984 में अंतरिक्ष की यात्रा कर इतिहास रच दिया था और करोड़ों भारतीयों के सपनों को पंख दिए थे।

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष की उड़ान भरी थी। अंतरिक्ष से इंदिरा गांधी द्वारा पूछे गए सवाल— “ऊपर से भारत कैसा दिखता है?”—का जवाब उन्होंने ऐतिहासिक शब्दों में दिया था, “सारे जहां से अच्छा।” यह क्षण भारत के अंतरिक्ष इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया।

हैदराबाद से एनडीए और युद्ध तक का सफर
राकेश शर्मा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई हैदराबाद में की और वर्ष 1966 में नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) में प्रवेश लिया। 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान उन्होंने मिग-21 लड़ाकू विमान उड़ाते हुए 21 जोखिम भरे मिशन पूरे किए। बाद में 150 पायलटों में से उन्हें अंतरिक्ष यात्रा के लिए चुना गया।

कठिन प्रशिक्षण से गुजरे
अंतरिक्ष यात्री बनने की राह आसान नहीं थी। 1982 में चयन के बाद उन्हें मॉस्को के पास स्थित ‘स्टार सिटी’ में कड़े प्रशिक्षण से गुजरना पड़ा। उन्हें मात्र दो महीनों में रूसी भाषा सीखनी पड़ी, क्योंकि अंतरिक्ष यान से जुड़े सभी मैनुअल रूसी में थे। बेंगलुरु में उन्हें 72 घंटे तक एक बंद कमरे में अकेले रखा गया ताकि अंतरिक्ष के अकेलेपन की परीक्षा ली जा सके। सेंट्रीफ्यूज मशीनों में गुरुत्वाकर्षण के अत्यधिक दबाव ने उनकी शारीरिक और मानसिक क्षमता को परखा। इस दौरान विंग कमांडर रवीश मल्होत्रा बैकअप के रूप में उनके साथ रहे।

3 अप्रैल 1984 को रचा इतिहास
3 अप्रैल 1984 को बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से सोयूज-यू रॉकेट के जरिए उड़ान भरकर राकेश शर्मा अंतरिक्ष में पहुंचने वाले पहले भारतीय बने। इस मिशन के साथ भारत मानव को अंतरिक्ष भेजने वाला 14वां देश बना। उन्होंने अंतरिक्ष में 7 दिन, 21 घंटे और 40 मिनट बिताए।

अंतरिक्ष से बदली भारत की भौगोलिक समझ
राकेश शर्मा का मिशन वैज्ञानिक और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहा। ‘टेरा’ प्रयोग के तहत उन्होंने अंतरिक्ष से भारत की तस्वीरें लीं, जिनसे हिमालय के जल स्रोतों, जंगलों और भू-आकृतिक संरचनाओं की पहचान में बड़ी मदद मिली। इन तस्वीरों ने वर्षों में होने वाले हवाई सर्वेक्षण का काम कुछ ही घंटों में संभव बना दिया।

आज कहां हैं और क्या कर रहे हैं
भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा वर्तमान में तमिलनाडु के कुन्नूर जिले में अपनी पत्नी मधु के साथ रहते हैं। वह मीडिया से दूर, बेहद सादा जीवन जीते हैं। गोल्फ, योग, बागवानी और अध्ययन में उनका समय बीतता है। हाल ही में वह भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन से सलाहकार के रूप में भी जुड़े हैं और अपने अनुभव से वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।



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