मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एजी ऑफिस में 157 लॉ ऑफिसरों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई टल गई। कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 19 जून को होगी।
जबलपुर। मध्यप्रदेश के महाधिवक्ता (एजी) कार्यालय में की गई लॉ ऑफिसरों की नियुक्तियों को लेकर चल रहा विवाद अब और गहराता नजर आ रहा है। इस मामले में सोमवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिए जाने के कारण सुनवाई आगे बढ़ा दी गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 19 जून को होगी।
लॉ ऑफिसरों की नियुक्तियों से जुड़ा मामला
यह मामला एजी ऑफिस में की गई 157 लॉ ऑफिसरों की नियुक्तियों से जुड़ा हुआ है। इन नियुक्तियों को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मामले की सुनवाई जस्टिस एमएस भट्टी और जस्टिस बीपी शर्मा की वैकेशन बेंच में हुई।
नियुक्तियों की सूची को कोर्ट में चुनौती
जनहित याचिका मध्यप्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सह सचिव और अधिवक्ता योगेश सोनी ने दायर की है। याचिका में 25 दिसंबर को जारी उस सूची को चुनौती दी गई है, जिसमें प्रदेश सरकार के विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने 157 लॉ ऑफिसरों की नियुक्ति की थी। याचिकाकर्ता ने कहा नियुक्तियों में पारदर्शिता नहीं बरती गई। निर्धारित नियमों का पालन भी नहीं किया गया।
नियुक्ति में नियमों का पालन नहीं
इसी आधार पर पूरी चयन प्रक्रिया को न्यायालय में चुनौती दी गई है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2013 में जारी राजपत्र अधिसूचना में सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए थे। इसके बावजूद हाल ही में जारी नियुक्ति सूची में उन नियमों को नजरअंदाज किया गया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि चयन तय मापदंडों के अनुरूप नहीं हुआ।
बार एसोसिएशन ने भी जताई आपत्ति
ऐसे में इन नियुक्तियों की वैधानिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि यदि नियमों का पालन नहीं हुआ है तो पूरी प्रक्रिया को रद्द किया जाना चाहिए। इस मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भी अपनी चिंता जाहिर की है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डीके जैन और सचिव पारितोष त्रिवेदी ने चयन प्रक्रिया और नियुक्ति के पैमानों पर सवाल उठाए हैं।
अब अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
त्रिवेदी ने हाईकोर्ट से मांग की है कि मामले में हस्तक्षेप कर नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। बार एसोसिएशन का मानना है कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति पारदर्शी और नियमों के अनुसार होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने अदालत में अपनी दलीलें पेश कीं। वहीं राज्य सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
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