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सुकमा में तेंदूपत्ता संग्रहण की रिकॉर्ड रफ्तार लक्ष्य का 77 प्रतिशत कार्य पूर्ण

सुकमा में तेंदूपत्ता संग्रहण की रिकॉर्ड रफ्तार लक्ष्य का 77 प्रतिशत कार्य पूर्ण

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जगदलपुर वन वृत्त में जिला यूनियन अव्वल

*संग्राहकों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी, 54 लाख रुपये से अधिक का पारिश्रमिक सीधे बैंक खातों में अंतरित*

रायपुर/ छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में आदिवासियों की आय का प्रमुख स्रोत तेंदूपत्ता संग्रहण सुकमा जिले में इस वर्ष नई ऊंचाइयों को छू रहा है। जिला लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित सुकमा ने संग्रहण कार्य में तेज गति दिखाते हुए जगदलपुर वन वृत्त के अन्य जिलों को पीछे छोड़ दिया है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार न केवल तेंदूपत्ता संग्रहण बढ़ा है, बल्कि तेंदूपत्ता संग्राहकों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

*संग्रहण के प्रमुख आंकड़े*

        वर्ष 2026 के सीजन में 12 मई तक के प्राप्त आंकड़े सुकमा जिला यूनियन की सफलता को दर्शाते हैं। अब तक 84 हजार 038 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का 77.53 प्रतिशत है। (पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा मात्र 65 प्रतिशत था)। वर्ष 2025 के 41 हजार 021 संग्राहकों के मुकाबले इस वर्ष 46 हजार 620 संग्राहक इस कार्य से जुड़कर लाभान्वित हो रहे हैं।

*समितियों ने लक्ष्य को पछाड़ा*

        कोंटा क्षेत्र की कई प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों ने निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक संग्रहण कर मिसाल पेश की है। गोलापल्ली 129.11, किस्टाराम 126.11 प्रतिशत, पालाचलमा 122.79 प्रतिशत, पोलमपल्ली 107.31 प्रतिशत और कोण्डरे 101.02 प्रतिशत तेंदूपत्ता संग्रहण कर मिसाल पेश किए हैं।

*दुर्गम क्षेत्रों में पहुँचा रोजगार*

          प्रशासन की सक्रियता से इस वर्ष गोगुंडा जैसे दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक संग्रहण कार्य शुरू किया गया है। यह उन परिवारों के लिए बड़ी राहत है जहाँ पिछले वर्षों में किन्हीं कारणों से संग्रहण नहीं हो सका था।

*पारदर्शी भुगतान और अवैध परिवहन पर नकेल*

          संग्राहकों के हितों को सर्वाेपरि रखते हुए अब तक 54 लाख 48 हजार 619 रुपये की पारिश्रमिक राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है। ओडिशा के मलकानगिरी जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में तेंदूपत्ता के अवैध परिवहन को रोकने के लिए वन विभाग द्वारा रात्रिकालीन गश्त और संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सुकमा जिला यूनियन की यह उपलब्धि न केवल बेहतर प्रबंधन का परिणाम है, बल्कि वनांचल क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम भी है।



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