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भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का 'बस्तर पंडुम 2026

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का 'बस्तर पंडुम 2026

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*’ महोत्सव के शुभारंभ के अवसर पर सम्बोधन

 

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बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े ‘बस्तर पंडुम’ महोत्सव में आप सबके बीच उपस्थित होकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। मां दंतेश्वरी के इस पुण्य क्षेत्र में आने का अवसर मिलना मैं अपना सौभाग्य मानती हूं। मैं जब भी छत्तीसगढ़ आती हूं, मुझे लगता है कि मैं अपने घर आई हूं। यहां के लोगों से जो अपनत्व और स्नेह मुझे मिलता है, वह मेरे लिए अनमोल है। यह ऐसे कई नायकों की धरती है, जिन्होंने भारत भूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। मैं ऐसे सभी सपूतों की स्मृति में सादर नमन करती हूं।

 

देवियो और सज्जनो,

 

बस्तर की सुंदरता को देखकर लगता है कि मां दंतेश्वरी ने स्वयं इसे अपने हाथों से सजाया है। मौसम बदलने के साथ प्रकृति मानो करवट लेती है और यहां के लोग उत्सव मनाते हैं। जब इस ऊर्वर धरती में किसान बीज छिड़कते हैं, तब यह पंडुम होता है। जब आम का मौसम आता है, तब यह पंडुम होता है। बस्तर के लोग जीवन को उत्सव के रूप में जीते हैं। जीवन जीने का यह तरीका सभी देशवासी बस्तर के निवासियों से सीख सकते हैं।

 

पिछले वर्ष आयोजित बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर की जनजातीय संस्कृति की झलक देश भर के लोगों ने देखी थी। मुझे बताया गया है इस वर्ष के पंडुम में पचास हजार से अधिक लोगों द्वारा जनजातीय संस्कृति तथा जीवन-शैली से जुड़े अनेक प्रदर्शन किए जाएंगे। बस्तर की जनजातीय संस्कृति से देशवासियों को अवगत कराने के इस महत्वपूर्ण प्रयास के लिए मैं छत्तीसगढ़ सरकार की सराहना करती हूं।

 

बस्तर क्षेत्र में एक आकर्षक पर्यटन स्थल बनने की प्रचुर क्षमता है। यहाँ के उत्साही लोग और उनकी प्राचीन संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपात और गुफाएँ पर्यटकों को आकर्षित करने में सक्षम हैं। बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने से पर्यटक यहां आना जरूर पसंद करेंगे। आजकल दुनिया भर में Home stay एक नये प्रकार के पर्यटन के रूप में लोकप्रिय हो रहा है। मुझे बताया गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार इस दिशा में अनुकूल कदम उठा रही है।

 

देवियो और सज्जनो,

 

बस्तर की सुंदरता और यहां की संस्कृति हमेशा से लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है लेकिन दुर्भाग्य से चार दशकों तक यह क्षेत्र माओवाद से ग्रस्त रहा। इस कारण यहाँ के निवासियों ने अनेक कष्ट झेले। सबसे ज्यादा नुकसान यहां के युवाओं, आदिवासियों और दलित भाई-बहनों को हुआ। भारत सरकार की माओवादी आतंक पर निर्णायक कार्रवाई के परिणामस्वरूप वर्षों से व्याप्त असुरक्षा, भय और अविश्वास का वातावरण अब समाप्त हो रहा है। माओवाद से जुड़े लोग हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं जिससे नागरिकों के जीवन में शांति लौट रही है।

 

मुझे बताया गया है कि छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में पहले माओवाद से प्रभावित रहे लोगों ने आत्मसमर्पण किया है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि जो लोग हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे हैं, वो सामान्य जीवन जी सकें। उनके लिए अनेक विकास और कल्याणकारी योजनाएँ चलाई जा रही हैं। राज्य सरकार की ‘नियद नेल्लानार योजना’ ग्रामीणों के सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

 

सरकार के प्रयास और इस क्षेत्र के लोगों के सहयोग के बल पर आज बस्तर में विकास का नया सूर्योदय हो रहा है। गांव-गांव में बिजली, सड़क, पानी की सुविधा उपलब्ध हो रही है। वर्षों से बंद विद्यालय फिर से खुल रहे हैं और बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। यह बहुत ही सुखद तस्वीर है जो सभी देशवासियों में खुशी का संचार कर रहा है।

 

देवियो और सज्जनो,

 

मैं हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे सभी लोगों की सराहना करती हूं। मेरा उनसे अनुरोध है कि देश के संविधान और लोकतन्त्र में वे पूरी आस्था रखें। बस आपको इस व्यवस्था में विश्वास रखते हुए मेहनत व लगन से आगे बढ़ना है। यह लोकतन्त्र की ताकत ही है कि ओड़िशा के एक छोटे से गांव की यह बेटी, भारत की राष्ट्रपति के रूप में आपको संबोधित कर रही है।

 

गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों का कल्याण करना सरकार की विशेष प्राथमिकता है। पीएम जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सबसे पिछड़ी जनजातियों के गांवों को विकास से जोड़ा जा रहा है।

 

शिक्षा, व्यक्तिगत और सामुदायिक विकास की आधारशिला है। मैं जब भी जनजातीय भाई-बहनों से मिलती हूं, उनको शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करने का प्रयत्न करती हूं। जनजातीय क्षेत्र के बच्चे अच्छी शिक्षा ग्रहण कर सकें इसके लिए उन क्षेत्रों में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय खोले गए हैं। मेरा सभी माता-पिता और अभिभावकों से अनुरोध है कि वे अपने बच्चों को पढ़ाएं। इसी से छत्तीसगढ़ और भारत का भविष्य उज्ज्वल होगा।Image after paragraph

 

इस क्षेत्र के लोगों ने भाई-चारे और समाज-सेवा के अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार विजेताओं में इस क्षेत्र के डॉक्टर बुधरी ताती तथा डॉक्टर रामचन्द्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले शामिल हैं। ये पुरस्कार महिला सशक्तीकरण, आदिवासी उत्थान, समाज सेवा और अत्यंत सुदूर आदिवासी इलाकों में मुफ्त चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए दिये जाएंगे। निस्वार्थ सेवा करने वाले ऐसे लोगों के बल पर ही हमारा समाज एक समावेशी और संवेदनशील समाज बन पाएगा।

 

देवियो और सज्जनो,

 

छत्तीसगढ़ की प्राचीन परंपराओं की गहरी जड़ें आज भी जीवंत बनी हुई हैं। मां दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा जनजातीय संस्कृति और भाईचारे का अनूठा उदाहरण है। हमें अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेते हुए स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करना है। विकास का वही मॉडल सफल है, जो विरासत को संजोते हुए आगे बढ़े। मैं राज्य के सभी निवासियों, विशेषकर युवाओं से अनुरोध करती हूं कि वे अपनी विरासत का संरक्षण करते हुए आधुनिक विकास को अपनाएं।

 

बस्तर के इस क्षेत्र में अकूत प्राकृतिक सम्पदा है। यहाँ के लोग लगनशील तथा मेहनती हैं। मैं इस क्षेत्र के सभी लोगों, विशेषकर युवाओं, से अपील करती हूं कि वो राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा चलाये जा रहे कल्याणकारी और विकास योजनाओं का लाभ उठाएँ। आपकी प्रगति और खुशहाली राज्य की प्रगति और विकसित भारत के लिए महत्वपूर्ण है। मुझे विश्वास है कि आप सब ‘जय जय छत्तीसगढ़ महतारी’ की भावना के साथ आगे बढ़ते रहेंगे। इससे भारत माता का गौरव बढ़ेगा। मेरी प्रार्थना है कि मां दंतेश्वरी की असीम कृपा सभी देशवासियों पर बनी रहे।

 

धन्यवाद,

जय हिन्द!

जय भारत!



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