7500 पन्नों की चार्जशीट में खुलासा, डॉ. उमर-उन-नबी था मास्टरमाइंड; ऐसे रची गई थी पूरी साजिश
दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए भीषण कार बम धमाके की साजिश को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। NIA के मुताबिक, इस आतंकी हमले में 11 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। जांच एजेंसी ने इस हमले को Vehicle-Borne Improvised Explosive Device (VBIED) से किया गया आत्मघाती हमला बताया है।
NIA की चार्जशीट के मुताबिक, डॉ. उमर-उन-नबी इस पूरी साजिश का मुख्य आरोपी और हमले का प्रमुख कर्ताधर्ता था। धमाके में उसकी मौत हो गई थी। जांच के दौरान DNA फिंगरप्रिंटिंग के जरिए घटनास्थल पर मिले मृत आरोपी की पहचान डॉ. उमर-उन-नबी के तौर पर हुई।
लाल किले के पास कार को बनाया गया था VBIED
NIA के मुताबिक, हमले में इस्तेमाल वाहन को Vehicle-Borne Improvised Explosive Device (VBIED) में तब्दील किया गया था। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने विस्फोटक तैयार करने और अलग-अलग तरह के IED बनाने के लिए प्रयोग किए थे।
NIA ने अपनी जांच में पाया कि आरोपी व्यावसायिक रूप से उपलब्ध रसायनों की मदद से विस्फोटक तैयार कर रहे थे। जांच एजेंसी के अनुसार, धमाके में Triacetone Triperoxide (TATP) का इस्तेमाल किया गया था। आरोपियों ने इसके लिए जरूरी सामग्री जुटाकर कई प्रयोग किए थे।
DNA जांच से हुई उमर-उन-नबी की पहचान
धमाका बेहद शक्तिशाली था और घटनास्थल पर वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। NIA ने घटनास्थल से मिले सबूतों और अन्य स्थानों से जुटाई गई सामग्री की फॉरेंसिक जांच कराई।
जांच एजेंसी के मुताबिक, DNA फिंगरप्रिंटिंग के जरिए धमाके में मारे गए व्यक्ति की पहचान डॉ. उमर-उन-नबी के रूप में हुई। वह पुलवामा का रहने वाला और हरियाणा स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में मेडिसिन का पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर था।
2022 में AGuH को फिर खड़ा करने की साजिश
NIA की चार्जशीट के मुताबिक, आरोपी अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) की विचारधारा से जुड़े थे। NIA ने AGuH को अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से जुड़ा संगठन बताया है।
जांच के अनुसार, 2022 में श्रीनगर में हुई एक गुप्त बैठक के बाद आरोपियों ने “AGuH Interim” नाम से संगठन को फिर से खड़ा करने की कोशिश की। इसके तहत नए लोगों को जोड़ने, कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार करने, हथियार और गोला-बारूद जुटाने तथा विस्फोटक तैयार करने की गतिविधियां की गईं।
'Operation Heavenly Hind' क्या था?
NIA की चार्जशीट में “Operation Heavenly Hind” का भी जिक्र है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस साजिश का कथित उद्देश्य लोकतांत्रिक तरीके से स्थापित भारतीय सरकार को उखाड़ना और शरिया आधारित शासन स्थापित करना था।
दक्षिण-एशियाई और प्रवासी
जांच में यह भी सामने आया कि मॉड्यूल के सदस्यों ने हिंसक जिहादी विचारधारा का प्रचार किया, नए सदस्यों की भर्ती की और हथियारों तथा विस्फोटकों का भंडारण किया।
सिर्फ कार बम नहीं, दूसरे IED पर भी प्रयोग
NIA के मुताबिक, आरोपियों ने बड़े पैमाने पर विस्फोटक तैयार करने के साथ अलग-अलग तरह के IED बनाने और उनकी टेस्टिंग भी की थी। जांच में रॉकेट और ड्रोन-माउंटेड IED से जुड़े प्रयोगों का भी पता चला।
एजेंसी के अनुसार, इनका इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए करने की योजना थी। जांच के दौरान आरोपियों से जुड़े ठिकानों से प्रयोगशाला उपकरण, इलेक्ट्रिक सर्किट और स्विच समेत कई सामान भी बरामद किए गए।
7,500 पन्नों की चार्जशीट, 10 आरोपी नामजद
NIA ने मई 2026 में इस मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इनमें मुख्य आरोपी डॉ. उमर-उन-नबी भी शामिल है, जिसकी धमाके में मौत हो चुकी है। उसके खिलाफ आरोपों को कानूनी रूप से abated किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है।
चार्जशीट में उमर-उन-नबी के अलावा आमिर राशिद मीर, जासिर बिलाल वानी, डॉ. मुजामिल शकील, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, सोयाब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार के नाम शामिल हैं।
NIA ने बताया कि चार्जशीट में 588 गवाहों के बयान, 395 से ज्यादा दस्तावेज और 200 से अधिक जब्त सामग्री को सबूत के तौर पर शामिल किया गया है।
11 लोगों की मौत, NIA की जांच जारी
NIA के मुताबिक, 10 नवंबर 2025 को हुए इस VBIED धमाके में 11 लोगों की मौत हुई थी। मामले की जांच के दौरान कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था, जबकि एजेंसी फरार आरोपियों की तलाश और व्यापक साजिश की बाकी कड़ियों की जांच जारी रखे हुए है।
नोट: ऊपर दी गई जानकारी NIA की आधिकारिक चार्जशीट और प्रेस रिलीज पर आधारित है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में विचाराधीन हैं और अंतिम दोषसिद्धि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
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