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दुर्ग के थनोद में तैयार हो रही मिट्टी की हजारों मनमोहक गणपति प्रतिमाएं : अरुण वोरा

दुर्ग के थनोद में तैयार हो रही मिट्टी की हजारों मनमोहक गणपति प्रतिमाएं : अरुण वोरा

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दुर्ग। गणेश उत्सव को लेकर दुर्ग के पास स्थित थनोद गांव में इन दिनों उत्सव जैसा माहौल है। छत्तीसगढ़ सहित महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और तेलंगाना के लिए हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी थनोद में सैकड़ों मूर्तिकार भगवान गणेश की हजारों आकर्षक मिट्टी की प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। छोटी से लेकर विशाल प्रतिमाओं के लिए प्रसिद्ध थनोद में दूर-दूर से गणेश उत्सव समितियां प्रतिमाएं लेने पहुंच रही हैं।Image after paragraph

थनोद पहुंचे पूर्व विधायक अरुण वोरा ने मूर्तिकारों से मुलाकात कर गणेश प्रतिमाओं के निर्माण की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि गणेश उत्सव हमारी आस्था और संस्कृति से जुड़ा पर्व है। जब भी गणपति की प्रतिमा खरीदने जाएं, मिट्टी की गणेश प्रतिमा ही खरीदें। इससे हमारी श्रद्धा और परंपरा भी बनी रहेगी और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी पूरी होगी।

वोरा ने कहा कि मिट्टी की मूर्तियां खरीदने से स्थानीय मूर्तिकारों और उनके परिवारों को भी आर्थिक सहयोग मिलता है। थनोद की मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं अपनी कलात्मकता और आकर्षण के लिए प्रसिद्ध हैं। इसलिए लोगों को पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए मिट्टी की प्रतिमाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।

मध्यभारत के गणेश पंडालों में थनोद की गणेश प्रतिमाओं की सर्वाधिक मांग, दुर्ग-भिलाई सहित आसपास के क्षेत्रों के छोटे-बड़े गणेश पंडालों की समितियों के हजारों कार्यकर्ता प्रतिमा लेने थनोद पहुंच रहे हैं। गांव में मेले जैसा माहौल बना हुआ है। थनोद की गणेश प्रतिमाओं की मांग अब मध्यभारत के साथ अन्य राज्यों में भी बढ़ रही है, जो यहां के स्थानीय मूर्तिकारों की कला और मेहनत का सम्मान है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा गणेश पंडाल समितियों पर अनावश्यक टैक्स वसूली का दबाव बनाया जा रहा है, जो हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं पर अनावश्यक हस्तक्षेप है। सरकार को पंडाल समितियों को परमिशन और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर परेशान करने के बजाय सहयोग करना चाहिए।

अरुण वोरा ने कहा कि गणेश और दुर्गा प्रतिमाओं का निर्माण करने वाले मूर्तिकारों को सरकार की ओर से आर्थिक सहयोग और प्रोत्साहन दिया जाना उचित होगा। ये कलाकार महीनों मेहनत कर प्रतिमाएं तैयार करते हैं। सरकार यदि उन्हें आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराए तो वे प्रतिमा निर्माण के साथ अपने परिवार का जीवनयापन भी बेहतर ढंग से कर सकेंगे।



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