बालाघाट के नक्सल प्रभावित बिरसा क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग ने घर-घर पहुंचकर बच्चों की जांच और इलाज का अभियान शुरू किया है। अब तक 169 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें 125 स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। 44 बच्चों का इलाज जारी है। इसके अलावा 461 मरीजों का घर पर उपचार किया गया है।
भोपाल: 17 अगस्त 2026। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड के दूरस्थ आदिवासी गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम अब घर-घर पहुंच रही है। लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहे इस इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बड़ी चुनौती रही है। हाल ही में कुंडेकसा, अडोरी, कोरका और बांदरी समेत आसपास के गांवों में बच्चों में कई तरह की बीमारियां सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले एक महीने में 169 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से 125 बच्चे उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, जबकि 44 बच्चों का इलाज जारी है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर सामने आए मामलों में बुखार, सर्दी-खांसी, त्वचा संबंधी बीमारी, मीजल्स, स्कैबीज और मलेरिया जैसी समस्याएं शामिल हैं।

घर-घर पहुंच रही 20 स्वास्थ्य टीमें
दूरस्थ गांवों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए 20 सर्वेक्षण टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं। इसके अलावा 4 पीएम जनमन एएमएमयू, 10 चिकित्सा अधिकारी और 4 एंबुलेंस तैनात की गई हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अब तक 630 मरीजों की पहचान की गई है। इनमें 125 को अस्पताल में भर्ती कर उपचार दिया गया, जबकि 461 मरीजों का इलाज उनके घर पर ही किया गया।

बच्चों को दवाएं और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं
स्वास्थ्य टीमों ने गांवों में बच्चों को विटामिन-ए, ओआरएस, जिंक और आयरन की खुराक दी है। 521 बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवा दी गई, जबकि 63 बच्चों को मीजल्स का टीका लगाया गया। मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए कीटनाशक छिड़काव, इंडोर-आउटडोर फॉगिंग और लार्वा सर्वे भी कराया जा रहा है।

980 घरों तक पहुंचा स्वास्थ्य विभाग
कुंडेकसा, बोंदारी, कोरका, घुम्मुर, अडोरी, मछुरदा, गठिया और मातला सहित करीब 10 गांवों के 980 घरों में स्वास्थ्य सर्वे किया जा रहा है। प्रशासन का जोर सिर्फ बीमार बच्चों के इलाज पर नहीं, बल्कि बीमारी की पहचान, रोकथाम और ग्रामीणों में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर भी है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय तक सरकारी सेवाओं की पहुंच सीमित रहने के कारण स्वास्थ्य विभाग के सामने लोगों का भरोसा जीतना भी चुनौती है। अधिकारियों का कहना है कि लगातार संपर्क और घर-घर स्वास्थ्य सेवाओं के जरिए इस दूरी को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
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