बस्तर की बेटी इशिका जैन का कमाल, आर्ट एंड क्राफ्ट का हुनर पहुंचा अमेरिका-जर्मनी तक
बस्तर की बेटी इशिका जैन बनीं मिसाल: जुनून और मेहनत से आर्ट एंड क्राफ्ट का हुनर पहुंचा विदेशों तक
जगदलपुर। आज की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और मेहनत से नई पहचान बना रही हैं। बस्तर की बेटी इशिका जैन भी ऐसी ही एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरी हैं, जिन्होंने अपने हुनर और आत्मविश्वास के दम पर छोटे शहर से निकलकर देश-विदेश तक अपनी पहचान बनाई है।
सिर्फ 19 साल की उम्र में कोविड काल के दौरान शुरू किया गया उनका छोटा सा आर्ट एंड क्राफ्ट का काम आज एक सफल व्यवसाय का रूप ले चुका है। इशिका अपने क्रिएटिव और यूनिक आइडियाज से शादी की पैकेजिंग, रिटर्न गिफ्ट, बर्थडे और एनिवर्सरी जैसे खास मौकों के लिए आकर्षक हैम्पर तैयार करती हैं, जिनकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है।
सोशल मीडिया बना पहचान का जरिया
इशिका ने अपने काम को लोगों तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया को माध्यम बनाया। उनके अनोखे डिजाइन और आकर्षक पैकेजिंग स्टाइल को लोगों ने खूब पसंद किया। आज उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 51 हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं। बस्तर में आर्ट एंड क्राफ्ट के क्षेत्र में इतनी बड़ी ऑनलाइन पहचान बनाने वाली वे पहली युवती मानी जा रही हैं।
मां का मिला पूरा साथ
इशिका की इस सफलता के पीछे उनकी मां शीतल जैन का भी बड़ा योगदान है। वे हर कदम पर बेटी का साथ देती हैं और पैकेजिंग से लेकर अन्य कामों में मदद करती हैं। मां-बेटी की यह जोड़ी आज मेहनत, आत्मविश्वास और पारिवारिक सहयोग की प्रेरक मिसाल बन चुकी है।
नौकरी छोड़ चुना जुनून का रास्ता
कोविड के दौरान शुरू हुए इस छोटे से काम के बाद इशिका ने वर्ष 2022 में बैंकिंग सेक्टर में नौकरी भी जॉइन की थी, लेकिन उनका मन हमेशा अपने क्रिएटिव काम में ही लगा रहता था। अंततः उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने जुनून को ही करियर बनाने का फैसला किया और पूरी लगन से अपने आर्ट एंड क्राफ्ट व्यवसाय को आगे बढ़ाया।
देश के साथ विदेशों तक पहुंचा हुनर
आज इशिका का काम केवल बस्तर या छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहा। वे जर्मनी के म्यूनिख में 10 से अधिक और अमेरिका के न्यूयॉर्क में 8 से ज्यादा पार्सल भेज चुकी हैं। इसके अलावा दिल्ली, राजस्थान और मुंबई जैसे बड़े शहरों में भी उनके बनाए हैम्पर और पैकेजिंग की अच्छी मांग है। अब तक वे 8 हजार से अधिक ऑर्डर बस्तर से बाहर भेज चुकी हैं।
इशिका जैन की यह सफलता कहानी यह साबित करती है कि अगर जुनून, मेहनत और आत्मविश्वास साथ हो तो छोटे शहर की बेटियां भी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। बस्तर की यह बेटी आज उन सभी युवतियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है जो अपने सपनों को साकार करना चाहती हैं
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