9 या 10 अप्रैल, कब है वैशाख माह की कालाष्टमी, जानें पूजन का शुभ मुहूर्त?
कालाष्टमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप, काल भैरव की पूजा की जाती है। मान्यता है कि काल भैरव की उपासना से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं, भय समाप्त होता है और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है।
वैशाख मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 9 अप्रैल रात 9 बजकर 18 मिनट से शुरू होगी और 10 अप्रैल रात 11 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि और गृहस्थ जीवन को ध्यान में रखते हुए, कालाष्टमी का व्रत 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार को रखना शुभ माना जा रहा है।
कालाष्टमी का महत्व
कालाष्टमी का दिन भगवान काल भैरव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और भक्ति से पूजा करने पर नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन को शांति मिलती है। मानसिक तनाव, डर या किसी अनजाने भय से पीड़ित लोगों के लिए यह व्रत लाभकारी है। साथ ही, काल भैरव की कृपा से शत्रुओं से रक्षा होती है और जीवन में आत्मविश्वास बढ़ता है। यह व्रत करने से पूर्व जन्म के पापों का प्रभाव कम होता है और जीवन में सुख-शांति आती है।
ग्रहों की स्थिति से खास
इस बार की कालाष्टमी ज्योतिष के हिसाब से भी महत्वपूर्ण है। इस दिन शनि मीन राशि में अस्त हो रहे हैं और राहु कुंभ राशि में स्थित हैं। इन दोनों ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति के मन, सोच और जीवन दिशा पर पड़ता है। काल भैरव की पूजा से शनि और राहु के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं, जिससे मानसिक स्थिरता और तनाव में कमी आती है।
काल भैरव की पूजा कैसे करें?
पूजा की शुरुआत सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहन कर करें। घर में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करें, क्योंकि काल भैरव भगवान शिव के ही अंश हैं।
रात 9 बजे से 11 बजे के बीच काल भैरव की पूजा करना शुभ माना जाता है।
पूजा में गंगाजल से अभिषेक करें, तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें।
फूल और दीपक अर्पित कर आरती करें। पहले शिव आरती, फिर काल भैरव आरती।
समय हो तो शिव चालीसा और भैरव चालीसा का पाठ भी लाभकारी है।
क्या चढ़ाएं काल भैरव को?
पूजा में काला उड़द, सरसों का तेल, कच्चा दूध और मीठी रोटी अर्पित करना शुभ माना जाता है। काले कुत्ते को भोजन कराना भी विशेष फलदायी है, क्योंकि काल भैरव की सवारी कुत्ता मानी जाती है।
दान का महत्व
कालाष्टमी के दिन दूध, काले कपड़े, सरसों का तेल, जूते-चप्पल और भोजन सामग्री का दान करना शुभ होता है। दान हमेशा अपनी क्षमता अनुसार करें।
कालाष्टमी के लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत और पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं, रोगों में राहत मिलती है, मानसिक शांति मिलती है और भय समाप्त होता है। इसके अलावा, शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में मदद मिलती है और जीवन सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता है।
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