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कर्णेस्वर मेला 31 जनवरी से

कर्णेस्वर मेला 31 जनवरी से

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नगरी। सिहावा में श्रृंगी ऋषि पर्वत के नीचे महानदी के पावन तट पर ग्राम छिपली पारा का आश्रित ग्राम देउर पारा स्थित है यहाँ महानदी व बालका नदी का संगम होता है  माँघ पूर्णिमा पर यहा हज़ारो श्रद्धालु आस्था की डुबकी  लगाते है। समीप ही 11वी शताब्दी में राजा  कर्णराज द्वारा निर्मित  शिव मंदिर,राम जानकी मंदिर ,नन्दी,गणेश मन्दिर,विष्णु के मंदिर है इस स्थान को  लोग कर्णेश्वर धाम के नाम से जानते है कर्णेश्वरधाम मे माघ पूर्णिमा के अवसर पर 31 जनवरी से 5 फरवरी तक विशाल मेला का आयोजन प्रति वर्ष अनुसार किया जा रहा है। कर्णेश्वर धाम मे सोमवंशी राजाओं द्वारा निर्मित भगवान शिव एवं राम जानकी का मंदिर है।
मंदिर में लगे सोलह पंक्तियों की आयताकर भीतर शिलालेख कांकेर के सोमवंशी राजा कर्णराज के शासनकाल में शक् सम्वत 1114 में उत्कीर्ण कराया गया। शिलालेख संस्कृत भाषा के देवनागरी लिपि में लिखी गयी है।शिलालेख से विदित होता है कि महराज कर्णराज ने अपने वंश की कीर्ति को अमर बनाने के लिए कर्णेश्वर देवहद मे छह मंदिरों का निर्माण किया।
एक अपने नि संतान भाई कृष्णराज के नाम, दूसरा मंदिर प्रिय पत्नी भोपालादेवी के नाम निर्मित कराया। कर्णराज ने त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की आराधना कर प्रतिष्ठा किया। कर्णराजद्वारा निर्मित मंदिर मे शिव के अलावा मर्यादा पुरुषोत्तम राम जानकी मंदिर प्रमुख है।भगवान शिव को बीस वर्ग फुट आयताकार गर्भ गृह में प्रतिष्ठित किया गया ही। गर्भगृह का शीर्ष भाग कलश युक्त है। मंदिर का अग्रभाग मंडप शैली मे बना है, जिसकी छत आठ कोडीय प्रस्तर स्तंभों पर टिक़ी है। मंदिर का पूरा भाग पाषाण निर्मित है।जनश्रुति है कि कांकेर के सोमवंशी राजाओं के पूर्वज जग्गनाथपूरी उड़ीसा के मूल निवासी थे। सोमवंशी राजाओं ने पहले पहल नगरी मे अपनी राजधानी बनायी। 

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असाध्य रोगों के लिये  अमृत कुण्ड                    कर्णेश्वर धाम मे एक प्राचीन अमृतकुण्ड है किवदंती ही कि इस कुंड के जल के स्नान से कोड जैसे असाध्य रोग ठीक हो जाता था।सोमवंशी राजाओ ने इसे मिट्टी से भर दिया। अमृतकुंड से लगा हुआ छोटा सरोवर मोती तालाब राजा के दो पुत्रियां सोनई-रूपई के नाम से जाना जाता है। सोनई रूपई कांकेर के राजा धर्म देव की पुत्रियाँ थी ।मन्दिर परिसर में विविध देवी देवताओं की प्रतिमा है सोम वन्शीय राजाओ का विजय स्तम्भ है  माघपुर्णिमा के पावन  अवसर पर हजारों श्रद्धालु  बालका व महानदी के  संगम में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य के भागीदार बनेगे।
लुप्त हो जाती है अस्थियां
बालका व महानदी संगम स्थल से दक्षिण दिशा में महानदी पर पचरी घाट पर स्थित कुण्ड में अस्थियां विसर्जित की जाती है मान्यता है कि यहाँ ढाई पहर में विसर्जित अस्थिया लुप्त हो जाती है।
माता कर्मा व हनुमान जी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा
कर्णेश्वर मन्दिर परिसर में नव निर्मित भक्त माता कर्मा व हनुमान मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम 30 व 31 जनवरी को होगा। मन्दिर का निर्माण जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा द्वारा अपने परिजनों की स्मृति में कराया गया है।वहीं भक्त माता कर्मा की मूर्ति गिरधारी लाल साहू साकरा व उनके परिवार द्वारा प्रदान की गई है तथा हनुमान जी की प्राचीन मूर्ति लक्ष्मन प्रसाद पांडेय नगरी द्वारा उनके परिजनों की स्मृति में दी गई थी
विकास के कार्य होने से कर्णेश्वर धाम की शोभा बढ़ेगी
ट्रस्ट अध्यक्ष विकल गुप्ता ने बताया कि कर्णेश्वर धाम के विकास में राज्य सरकार पूरी तरह ध्यान दे रही   है,जनभागीदारी से भी कार्य हो रहे है भव्य प्रवेश द्वार के लिये 11 लाख व शौचालय के लिये 7 लाख रुपए की स्वीकृति पर्यटन विभाग से प्राप्त हो गई है आने वाले समय मे मां अभियान के तहत करोड़ों रुपये के कार्य होने है जिसके लिये सी एस आर  फण्ड की राशि जिला प्रशासन के  प्रयास से स्वीकृति मिली है इससे कर्णेश्वर धाम की शोभा बढ़ेगी । 
मेला के दिन रंग झरोखा की प्रस्तुति होगी
  सांस्कृतिक कार्यक्रम अंतर्गत
2 फरवरी को दुष्यंत हरमुख  कृत रंग झरोखा भिलाई ,3 फरवरी को स्वरागनी डांस ग्रुप रतनपुर की प्रस्तुति मेला महोत्सव के दौरान होगी

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-मेला की ढाई परिक्रमा करेंगे देवी देवता
 
मेला में इलाके भर से पारम्परिक रूप से देवी देवताओं का आगमन होगा। बस्तर, उड़ीसा के देवी देवता भी पुन्नी स्नान व कर्णेश्वर महादेव का दर्शन कर  बाबा बालगीर के अगुवान व छिपली पारा के टिकरी वाली के मार्गदर्शन में माता खम्बेस्वरी से जोहार भेंट कर मड़ाई की परिक्रमा करेंगे जिसके तैयारी में प्रशासन व ट्रस्ट जुटा हुआ है पदेन संरक्षक व विधायक अम्बिका मरकाम,संरक्षक कैलास पवार,ट्रस्ट अध्यक्ष विकल गुप्ता, उपाध्यक्ष रवि ठाकुर, रवि दुबे,सचिव भरत निर्मलकर,कोशाध्यक्ष निकेश ठाकुर,सह सचिव दय  मोहन पुजारी  राम भरोसा  साहू,वरिष्ठ ट्रस्टी प्रकाश बैस, नागेन्द्र शुक्ला,शिव कुमार परिहार, ललित शर्मा कमल डागा ,राम प्रसाद मरकाम,गगन नाहटा,नोहर साहू,छबि ठाकुर,राम लाल नेताम,मोहन पुजारी,योगेश साहू अमर सिंह पटेल,अंजोर निषाद,रवि भट्ट, दीपक यदु,सचिन भंसाली, महेंद्र कौशल,प्रताप सुरेशा,मिलेश साहू बबलू गुप्ता,ललित निर्मलकर,ईश्वर जांगड़े,अनिरुद्ध साहू,दुर्गेश साहू, कैलाश प्रजापति,दीपक यदु,प्रकाश सार्वा ,राकेश चौबे,हनी कश्यप,नरसिंह मरकाम,मोहन नाहटा, बंटी जैन,होरी लाल पटेल,के आर बोरघरिया,टेस्वर ध्रुव मदन साहू,सन्तु साहू डोमार मिश्रा ,मनोज गुप्ता, प्रेमजीत छाबड़ा आदि जुटे  है।



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