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बस्तर संभाग के 130 स्वास्थ्य संस्थानों को मिला राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन

बस्तर संभाग के 130 स्वास्थ्य संस्थानों को मिला राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन

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बस्तर में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदल रही है तस्वीर

*नियद नेल्ला नार योजना से 6,816 हितग्राहियों को 8.22 करोड़ की स्वास्थ्य सहायता*

*33 विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित 450 से अधिक चिकित्सा स्टाफ की हुई नियुक्ति, 291 पदों पर भर्ती जारी*

*मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन और स्वास्थ्य योजनाओं की से नक्सल प्रभावित अंचलों तक पहुंची चिकित्सा सेवाएं*

*स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल 5 से 7 अगस्त तक करेंगे बस्तर संभाग का दौरा कर स्वास्थ्य सुविधाओं का लेंगे जायजा*

रायपुर / 1 जनवरी 2024 से 16 जून 2025 तक केवल बस्तर संभाग में ही कुल 130 स्वास्थ्य संस्थाओं को NQAS के अंतर्गत गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त हुआ है, जिनमें 1 जिला अस्पताल, 16 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 113 उप-स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 65 अन्य संस्थाओं का प्रमाणीकरण कार्य प्रक्रियाधीन है। खास बात यह है कि नक्सल प्रभावित जिलों—कांकेर, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा—के 14 संस्थानों को भी गुणवत्ता प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है, जो चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक व्यापक बनाने के उद्देश्य से नियद नेल्लानार योजना अंतर्गत आयुष्मान कार्ड के कवरेज को भी गति दी जा रही है। योजना के अंतर्गत बस्तर संभाग में मात्र एक वर्ष में ही 36,231 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। अब तक 52.6 प्रतिशत कवरेज हो चुका है, और 6,816 हितग्राहियों को 8 करोड़ 22 लाख रुपये की चिकित्सा सहायता का लाभ मिल चुका है।

इस सुगठित व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सरकार ने पिछले डेढ़ वर्षों में बस्तर संभाग में 33 मेडिकल स्पेशलिस्ट, 117 मेडिकल ऑफिसर और 1 डेंटल सर्जन की नियुक्ति की है। इसके अतिरिक्त राज्य स्तर से 75 और जिला स्तर से 307 स्टाफ व प्रबंधकीय पदों पर भर्ती पूरी की गई है, जबकि 291 पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। यह नियुक्तियाँ न केवल सेवाओं की पहुंच को सशक्त बना रही हैं, बल्कि गुणवत्ता और दक्षता में भी उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी कर रही हैं।

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय और सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित सुशासन और जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से अब बस्तर जैसे दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधाएं लोगों की पहुंच में हैं। सरकार की जन-केंद्रित सोच, ठोस रणनीति और ज़मीनी स्तर पर समर्पित क्रियान्वयन से स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच अब वहां तक संभव हो रही है, जिसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में एक समय असंभव माना जाता था।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर में स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर विस्तार और गुणवत्ता में सुधार पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि मितानिनों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और विभागीय कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी और प्रतिबद्धता के कारण ही आज यह परिवर्तन संभव हुआ है। बस्तर के लिए हमारी सरकार का विशेष फोकस है और हम इसे निरंतर मजबूत करते रहेंगे।

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जानकारी दी कि सरकार का लक्ष्य पूरे छत्तीसगढ़ में समान रूप से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। बस्तर में चलाए जा रहे मलेरिया मुक्त अभियान के तहत घर-घर जाकर जांच, त्वरित उपचार और जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से मलेरिया के प्रसार को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया गया है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के अंतर्गत पूरे राज्य में, विशेषकर बस्तर क्षेत्र में, स्वास्थ्य संस्थानों ने अनुकरणीय उपलब्धियाँ दर्ज की हैं।

राज्य सरकार की यह स्पष्ट प्राथमिकता रही है कि नक्सल प्रभावित इलाकों—कांकेर, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जैसे जिलों—में स्वास्थ्य सेवाओं का जमीनी विस्तार हो। आज इन अंचलों में भी लोग गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। यह परिवर्तन श्री विष्णु देव साय के सुशासन और स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर उनके विशेष फोकस का प्रमाण है।

इन उपलब्धियों की गहराई से समीक्षा और ज़मीनी प्रगति के प्रत्यक्ष अवलोकन हेतु स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल 5 अगस्त से 7 अगस्त 2025 तक तीन दिवसीय बस्तर दौरे पर रहेंगे। उनके साथ स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं तकनीकी दल भी रहेगा। इस दौरान वे बस्तर संभाग के प्रमुख जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों का निरीक्षण करेंगे, स्वशासी समिति की बैठकें लेंगे, मलेरिया मुक्त अभियान की समीक्षा करेंगे तथा बीजापुर और सुकमा जैसे दूरस्थ जिलों के अंतिम छोर पर बसे गांवों में जाकर भी स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति का मूल्यांकन करेंगे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में हो रहा यह परिवर्तन सिद्ध करता है कि जब सरकार की नीयत स्पष्ट हो, योजना व्यावहारिक हो और सिस्टम में प्रतिबद्धता हो—तो किसी भी दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र की तस्वीर बदली जा सकती है। बस्तर अब पिछड़ेपन और असुविधा की छवि से निकलकर विकास और सशक्तिकरण की पहचान बन रहा है। स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय में जो क्रांतिकारी बदलाव बस्तर में हो रहा है, वह पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।



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