भोपाल में महिला आरक्षण बिल को लेकर CM मोहन यादव ने कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला। ‘जन-आक्रोश महिला पदयात्रा’ में हजारों महिलाएं शामिल हुईं
भोपाल। भोपाल में महिला आरक्षण संशोधन बिल पास न होने को लेकर सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद सड़कों पर उतरे और हजारों महिलाओं के साथ ‘जन-आक्रोश महिला पदयात्रा’ निकाली। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर महिलाओं के अधिकार छीनने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला।
कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत कई महिला सांसद और विधायक भी मौजूद रहीं। सीएम ने कहा- “नारी अपना अपमान कभी नहीं भूलती”, और इस मुद्दे को देशभर में उठाने की बात कही।
सीएम यादव ने एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से महिलाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि, संसद में बहनों के हक पर डाका डालने के खिलाफ महिलाएं भोपाल की सड़कों पर लड़ने आईं हैं। पीएम मोदी ने कहा था कि, 'संसद में हमारे पास भले ही दो तिहाई आंकड़ा न हो लेकिन हमारे पास इच्छाशक्ति की कमी नहीं है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने महिलाओं के अधिकार का बिल गिरने पर खुशियां मनाई है।'
प्रियंका गांधी को भी सुनाई खरी-खोटी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि, प्रियंका गांधी बड़ी-बड़ी बातें करती हैं। वे कहती हैं मैं नारी हूं, लड़ सकती हूं लेकिन ये बड़ी-बड़ी बातें तब कहां गईं जब महिलाओं के अधिकारों को फांसी देने का काम किया गया। राहुल गांधी के पिता ने भी 40 साल पहले तीन तलाक लागू करके बहनों के अधिकार पर डाका डाला था।
अंदर की आग बुझने नहीं देना
'मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ये जो आपके अंदर की आग है, अपने हक की आग है, इसे बुझने नहीं देना है। कांग्रेस और उसके साथी विपक्षी दलों ने बहनों के हक पर डाका डाला है। वे अपने मंसूबों में कभी कामयाब नहीं हो सकते।'
'भारत में बहनों के हक के लिए भाइयों ने सदैव लड़ाइयां लड़ीं। राजा राम मोहन राय ने सती प्रथा के खिलाफ लड़ाई शुरू की। ज्योतिबा फुले ने नारी समानता के लिए लड़ाई लड़ी। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने बहनों को अधिकार दिलाने के लिए लड़ाई शुरू की। महात्मा गांधी से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के हक में आवाज उठाई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, नारी सब भूल जाती है, कभी अपना अपमान नहीं भूलती। यह हमको याद रखना है।'
सरकार बहनों के निर्णय के साथ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी पार्टी ने चाहा था कि सब दल मिलकर इसका समर्थन करें, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। देश की आधी आबादी की इच्छा का गला घोंटने वालों आपको कब्र से निकालकर सजा दी जाएगी। आपने बहनों के साथ अन्याय किया है। आपको ये बहनें माफ नहीं करेंगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज मन में इस बात का आक्रोश है कि हमारे बहनों के लिए जो अवसर मिला था, उसे विपक्ष ने कुचल दिया। हमारी परंपरा तो मातृ सत्ता की रही है। जब तक हम सीता नहीं बोलते, तब तक भगवान राम भी आशीर्वाद नहीं देते। जब तक राधा को याद नहीं करो, तब तक कन्हैया भी मुस्कुराते नहीं हैं।
उनका आशीर्वाद नहीं मिलता है। बिना माता के महादेव का आशीर्वाद कैसे मिल सकता है। आज भोपाल से पदयात्रा निकल रही है। इस आक्रोश को पूरे देश के सामने लाना है। बहनों ने अक्षय तृतीया पर यहां आकर लोकतांत्रिक मार्ग को अपनाया है। इस बात के लिए मैं बहनों का वंदन करता हूं। हमारी सरकार बहनों के निर्णय के साथ खड़ी है। हर जगह निंदा प्रस्ताव पारित करेंगे। विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर निंदा करेंगे।
विपक्ष की जितनी आलोचना करें, उतनी कम
कार्यक्रम में वरिष्ठ विधायक एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि, 'महिला आरक्षण बिल राजनीतिक मुद्दा नहीं था, यह बहनों का अधिकार था। विपक्ष ने इसका समर्थन नहीं किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार चाहते थे कि बहनों को उनका हक मिले। आजादी के बाद राजनीतिक दलों ने इस पर बात भी की। लेकिन, जब फैसला लागू करने का समय आया, तो विपक्ष ने रोड़ा अटका दिया।'
उन्होंने कहा कि, 'विपक्ष ने कुठाराघात किया। नारी शक्ति का योगदान भारत के इतिहास में दर्ज है। आज हम विपक्ष की जितनी आलोचना करें, उतनी कम है। विपक्ष ने संवेदनहीनता का स्वभाव बना लिया है। यह बदलाव की आंधी है। विपक्ष ने भारत के सपने को तोड़ दिया। यह आक्रोश घर-घर तक जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मैं बहनों से आह्वान करता हूं कि यह आक्रोश हर समाज में दिखना चाहिए। बहनों से आह्वान करता हूं जिसने भी उनके सपने को कुचला है समय आने पर उनका हिसाब लें। बहनें कांग्रेस से पूछे कि महिलाओं की उम्मीदें कुचलने का अधिकार उसे किसने दिया। मैं उम्मीद करता हूं बहनों के अंतर्मन में ज्वाला निरंतर जलती रहेगी।'
सीएम ने उड़ाए काले गुब्बारे
भाजपा की 'जन-आक्रोश महिला पदयात्रा' रोशहनपुरा चौराहे पर भी पहुंची। सीएम मोहन यादव भी यहां मौजूद थे। रोशहनपुरा चौराहे पर एक मंच बनाया गया था। सीएम ने यहां खड़े होकर विपक्षी दलों का विरोध करते हुए आसमान में काले गुब्बारे उड़ाए।
महिलाओं को कमिश्नर ऑफिस के पास रोका गया
बता दें कि, पंडाल में बैठने की जगह नहीं थी तो कुछ महिलाओं को कमिश्नर ऑफिस के बाहर बीच सड़क पर बैठा दिया गया था। जब महिलाओं ने पदयात्रा में शामिल होने की कोशिश की तो बैरिकेडिंग कर महिलाओं को आगे बढ़ने से रोका गया। यहां से कोई एंट्री या एग्जिट पॉइंट नहीं बनाया गया था। इसलिए पुलिस को इन महिलाओं को रोकना पड़ा।
कुछ ऐसा था नजारा
'आज मैंने सूर्य से बस जरा सा यूं कहा, आपके साम्राज्य में इतना अंधेरा क्यूं रहा?, तमतमा कर वह दहाड़ा- मैं अकेला क्या करूं? संग्राम यह घनघोर है, कुछ मैं लड़ूं कुछ तुम लड़ो।' कुछ-कुछ इसी कविता की तरह महिलाओं की लड़ाई आज राजधानी की सड़क पर दिखाई दी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव खुद पार्टी पदाधिकारियों और महिलाओं के साथ सड़क पर उतरे। इस दौरान गांव-गांव से हजारों महिलाएं भी यहां पहुंचीं। उन्होंने अपने हाथों में कई तरह के स्लोगन लिखे पोस्टर लिए हुए थे। विख्यात गायिका अंबिका जैन अंबर ने भी मंच से महिलाओं को अपने अधिकारियों के लिए जागरूक किया।
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