भोपाल स्टेशन पर अकेले मिले कानपुर के दो बच्चे: टीटीई देवेंद्र तिवारी ने दिखाई संवेदनशीलता, परिजनों तक पहुंचाने की पहल
भोपाल। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा के साथ बच्चों की देखभाल भी रेलकर्मियों की जिम्मेदारी का अहम हिस्सा है। भोपाल रेलवे स्टेशन पर 6 नवंबर को ऐसी ही संवेदनशीलता देखने को मिली। यहां प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर टिकट चेकिंग स्टाफ के कर्मचारी देवेंद्र कुमार तिवारी को दो बच्चे मिले। दोनों उत्तर प्रदेश के कानपुर क्षेत्र के रहने वाले हैं। वे घर पर बिना बताए निकल आए थे।
बच्चों को अकेले देखकर देवेंद्र कुमार तिवारी ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता दी। इसके बाद भोपाल में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के प्रभारी को पत्र लिखा। इसमें बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन के सुपुर्द करने और उनके परिजनों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए जरूरी कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
आरपीएफ प्रभारी को पत्र लिखकर मांगी मदद
भोपाल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर दोनों बच्चों के मिलने के बाद टीटीई देवेंद्र कुमार तिवारी ने तत्काल पहल की। उन्होंने आरपीएफ प्रभारी को लिखित रूप से पूरे मामले की जानकारी दी। साथ ही बच्चों को सुरक्षित संरक्षण दिलाने के लिए जरूरी कदम उठाने का अनुरोध किया।
उनका कहना था कि बच्चों को सुरक्षित तरीके से चाइल्ड हेल्पलाइन तक पहुंचाया जाए। इसके बाद उनके परिजनों की पहचान और उनसे संपर्क कर बच्चों को सुरक्षित घर पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।
कानपुर पुलिस और परिजनों से भी किया संपर्क
बच्चों की पहचान और परिवार तक पहुंचने की प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए देवेंद्र कुमार तिवारी ने कानपुर पुलिस और बच्चों के परिजनों से भी संपर्क किया। इससे भोपाल और कानपुर के बीच समन्वय बनाने में मदद मिली।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित संरक्षण दिलाना और उन्हें उनके परिवार तक पहुंचाने की प्रक्रिया को आसान बनाना था। हालांकि, रेलवे की ओर से जारी जानकारी में बच्चों को परिजनों के सुपुर्द किए जाने की अंतिम पुष्टि नहीं की गई है।
रेलकर्मी की पहल की मंडल प्रशासन ने की सराहना
पश्चिम मध्य रेल के भोपाल मंडल ने देवेंद्र कुमार तिवारी के प्रयास की सराहना की है। मंडल रेल प्रशासन के अनुसार, रेलकर्मी यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के साथ सामाजिक दायित्वों का भी निर्वहन कर रहे हैं।
देवेंद्र कुमार तिवारी की पहल इसी मानवीय जिम्मेदारी का उदाहरण है। उन्होंने बच्चों को देखकर केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं की, बल्कि उनकी सुरक्षा और परिवार तक पहुंचाने के लिए संबंधित अधिकारियों और पुलिस से संपर्क किया।
रेलवे में बच्चों की सुरक्षा के लिए चल रहा है ‘नन्हे फरिश्ते’ अभियान
रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में अकेले, बिछड़े या संकट में मिले बच्चों की सुरक्षा के लिए रेलवे सुरक्षा बल ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ चलाता है। इसके तहत ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित संरक्षण दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर चाइल्ड हेल्पलाइन और बाल कल्याण समिति की मदद ली जाती है।
रेल मंत्रालय ने बच्चों की सुरक्षा के लिए 2024 में इससे जुड़ी मानक प्रक्रिया को भी संशोधित किया था। इसमें रेलवे परिसर में मिलने वाले बच्चों की पहचान, देखभाल, दस्तावेजीकरण और बाल कल्याण समिति तक पहुंचाने की प्रक्रिया तय की गई है। भोपाल स्टेशन पर देवेंद्र कुमार तिवारी की पहल भी बच्चों की सुरक्षा और देखभाल के इसी उद्देश्य से जुड़ी है।
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