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पीएम राहत योजना एवं ई-डार प्रणाली के क्रियान्वयन के लिए संभाग स्तरीय दिया गया प्रशिक्षण

पीएम राहत योजना एवं ई-डार प्रणाली के क्रियान्वयन के लिए संभाग स्तरीय दिया गया प्रशिक्षण

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 योजना के तहत सड़क हादसे के पीड़ितों को 1.50 लाख रूपए तक का दिया जाएगा कैशलेस उपचार

दुर्ग/ कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह की अध्यक्षता में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित और प्रभावी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में पीएम राहत योजना एवं ई-डार प्रणाली के क्रियान्वयन के लिए संभाग स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का संचालन राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के तकनीकी निदेशक श्री अमित देवांगन, स्टेट मैनेजर श्री सारांश ने किया। 

सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों को समय पर और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा ’पीएम राहत योजना’ लागू की गई है। इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना के प्रत्येक पीड़ित को दुर्घटना की तिथि से 7 दिनों तक अधिकतम 1.5 लाख रूपए तक का निःशुल्क एवं कैशलेस उपचार प्रदान किया जाएगा। इसका उद्देश्य दुर्घटना के बाद उपचार में होने वाली देरी को रोकना तथा पीड़ितों की जान बचाना है। योजना को 112 आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे दुर्घटना की सूचना मिलते ही निकटतम अस्पताल की पहचान करने अथवा एम्बुलेंस उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। इसके माध्यम से पीड़ितों को शीघ्र चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित की जा सकेगी। योजना के अंतर्गत सामान्य मामलों में दुर्घटना के बाद प्रारंभिक 24 घंटे तथा गंभीर एवं जीवन रक्षक उपचार की आवश्यता वाले मामलों में 48 घंटे तक तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे गंभीर रूप से घायल मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा। पीएम राहत योजना का संचालन पूरी तरह डिजिटल माध्यम से किया जा रहा है। 

इस अवसर पर कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद पहला घंटा जिसे गोल्डन आवर’ कहा जाता है, घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। समय पर सही इलाज मिलने से सड़क हादसों में होने वाली अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि देश की बढ़ती आबादी के साथ यातायात का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है, जिसके कारण सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में वृद्धि हो रही है। सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस विभाग द्वारा विभिन्न जागरूकता अभियान और आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही है। सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को त्वरित उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री राहत योजना संचालित की जा रही है। कलेक्टर ने कहा कि क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी, थाना प्रभारी, चिकित्सा अधिकारी और परिवहन अधिकारी को अपनी-अपनी जिम्मेदारियों और भूमिका की विस्तृत जानकारी होना आवश्यक है, ताकि दुर्घटना की स्थिति में समन्वित एवं त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।  

प्रशिक्षण में प्रधानमंत्री राहत कैशलेस उपचार योजना के उद्देश्य और प्रमुख प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी दी गई। इसके तहत पीड़ितों को सूचीबद्ध चिकित्सालयों में कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाता है। योजना के डिजिटल क्रियान्वयन में डेटा प्रबंधन, सत्यापन और उपचार प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने पर विशेष जोर दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान आईआरडी एवं ई-डार प्रणाली, डेटा एंट्री वर्कफ्लो और दुर्घटना डेटा प्रबंधन से संबंधित तकनीकी और कार्यात्मक पहलुओं पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। साथ ही प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।



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