होम / मध्य प्रदेश / 70 फर्जी पासपोर्ट में से 57 बौद्ध मठ के पते पर बने, बांग्लादेशी कनेक्शन की जांच असम तक पहुंची
मध्य प्रदेश
मध्यप्रदेश के फर्जी पासपोर्ट मामले में STF की जांच असम तक पहुंच गई है। 70 फर्जी पासपोर्ट में से 57 भोपाल और ग्वालियर के बौद्ध मठों के पते पर बनाए गए थे। मुख्य आरोपी रियाल चौधरी के बांग्लादेशी कनेक्शन और असम में तैयार दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
भोपाल: मध्यप्रदेश के फर्जी पासपोर्ट मामले में जांच का दायरा अब कई राज्यों तक पहुंच गया है। बांग्लादेशी कनेक्शन सामने आने के बाद मध्यप्रदेश STF की छह टीमें अलग-अलग राज्यों में जांच कर रही हैं। जांच में सामने आया है कि 70 फर्जी पासपोर्ट में से 57 पासपोर्ट बौद्ध मठों के पते पर बनाए गए थे। इनमें 40 पासपोर्ट भोपाल और 17 ग्वालियर के डबरा स्थित बौद्ध मठ के पते पर बने हैं।
मामले के मुख्य आरोपी रियाल चौधरी से पूछताछ के बाद STF को कई अहम सुराग मिले हैं। इसी आधार पर STF की एक टीम असम के कामरूप जिले में पहुंची है। टीम आरोपी के दस्तावेज, उसके निवास और भारत में तैयार किए गए दस्तावेजों के बीच संबंध की जांच कर रही है
बांग्लादेश से असम और फिर मध्यप्रदेश तक नेटवर्क
STF के मुताबिक, रियाल चौधरी के मूल रूप से बांग्लादेशी होने के सबूत मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि उसने असम के कामरूप जिले में अपने निवास से जुड़े कथित जाली दस्तावेज तैयार कराए थे। इसके बाद वह मध्यप्रदेश के बैतूल पहुंचा और फर्जी पासपोर्ट तैयार करने वाले नेटवर्क से जुड़ गया। STF ने उसे बैतूल से गिरफ्तार किया था।
अब टीम यह पता लगाने में जुटी है कि असम में दस्तावेज तैयार कराने में उसकी मदद किसने की और भारत आने के बाद वह किन लोगों के संपर्क में आया। STF बांग्लादेश से असम और फिर मध्यप्रदेश तक नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है।
बौद्ध मठों के पते का इस्तेमाल
जांच में सामने आया है कि भोपाल के एक बौद्ध मठ के पते पर 40 और डबरा स्थित बौद्ध मठ के पते पर 17 पासपोर्ट बनाए गए। इनसे जुड़े दस्तावेजों में संबंधित लोगों को बौद्ध अनुयायी बताया गया था।
STF अब यह जांच कर रही है कि मठों के पते आरोपियों तक कैसे पहुंचे और इन पतों के इस्तेमाल के लिए किसने मदद की। आवेदन में लगाए गए दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
इसके अलावा बैतूल के 11, छिंदवाड़ा के 1 और पांढुर्णा के 1 पासपोर्ट भी जांच के दायरे में हैं। ये सभी पासपोर्ट 2021 से 2023 के बीच बनाए गए थे।
चार आरोपी गिरफ्तार
STF DIG के मुताबिक, मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मुख्य आरोपी रियाल चौधरी के अलावा विप्लव अधिकारी, जॉय चौधरी और प्रियंक चौधरी को भी गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने की प्रक्रिया और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
20 से 25 हजार रुपए में बनता था पासपोर्ट
STF के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने बताया कि एक फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने के बदले 20 से 25 हजार रुपए तक लिए जाते थे। अब जांच एजेंसी यह पता कर रही है कि इस रकम में किस-किस व्यक्ति की हिस्सेदारी होती थी और फर्जी दस्तावेज तैयार कराने से लेकर पासपोर्ट जारी होने तक नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।
सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच
STF दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया में सरकारी कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका की भी जांच कर रही है। DIG राहुल कुमार लोढ़ा के मुताबिक, अगर सत्यापन में आपराधिक साजिश सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लापरवाही सामने आने पर भी मामला दर्ज किया जा सकता है।
STF यह भी पता लगा रही है कि इन फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल कर किसी व्यक्ति ने विदेश यात्रा की थी या नहीं। जांच के आगे बढ़ने के साथ नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और फर्जी दस्तावेजों के स्रोत का खुलासा होने की संभावना है।
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