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3500 किलो वजनी तोप चोरी: शिवपुरी के नरवर किले में कैसे हुई इतनी बड़ी वारदात, पुलिस भी हैरान

शिवपुरी के नरवर किले से सिंधिया काल की 400 साल पुरानी 3500 किलो वजनी तोप चोरी हो गई। बदमाश ट्रॉली की मदद से तोप ले गए, पुलिस जांच में जुटी है।

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शिवपुरी जिले के ऐतिहासिक नरवर किले से सिंधिया रियासतकाल की करीब 400 साल पुरानी तोप चोरी हो गई। 15-16 जुलाई की रात 25 से 30 बदमाश किले की ओपन कचहरी में रखी 16वीं शताब्दी की करीब 3500 किलो वजनी तोप को चोरी कर ले गए। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि, इस ऐतिहासिक तोप की कीमत अंतरराष्ट्रीय एंटीक ब्लैक मार्केट में करोड़ों रुपए हो सकती है। चोरी की वारदात सामने आने के बाद पुलिस और पुरातत्व विभाग की टीम हैरान है।

बदमाशों ने वारदात को पूरी प्लानिंग के साथ अंजाम दिया। उन्होंने पहले तोप को गद्दों और अन्य सामान से ढका, इसके बाद बैरिंग लगी लोहे की ट्रॉली की मदद से उसे करीब 3000 फीट नीचे उतारा। फिर भारी वाहन में लादकर मौके से फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और पुरातत्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।

पहले भी की गई थी चोरी की कोशिश
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने चोरी की तैयारी पहले से कर रखी थी। करीब 10 दिन पहले 4-5 जुलाई की रात भी बदमाशों ने इसी तोप को उसके स्थान से नीचे गिराने की कोशिश की थी। हालांकि, भारी वजन के कारण वे उसे ले जाने में सफल नहीं हो सके।

इस घटना के बाद सुरक्षा गार्डों ने नरवर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके बाद आरोपी दोबारा पूरी तैयारी के साथ लौटे और इस बार ट्रॉली की मदद से तोप को नीचे उतारकर वाहन में भरकर ले गए।

किले में अब बचीं सिर्फ 13 ऐतिहासिक तोपें
नरवर किले की ओपन कचहरी में सिंधिया राजवंश काल की कुल 14 दुर्लभ ऐतिहासिक तोपें रखी हुई थीं। चोरी के बाद अब यहां केवल 13 तोपें बची हैं। चोरी हुई तोप की लंबाई करीब 5 फीट 10 इंच और चौड़ाई लगभग 30 इंच बताई जा रही है।

इतिहास के अनुसार, नरवर किले की कचहरी महल का निर्माण 16वीं शताब्दी में कछवाहा राजाओं ने कराया था। बाद में 1925 में महाराजा माधवराव सिंधिया के आदेश पर इसका जीर्णोद्धार कराया गया। यहां रखी गई तोपें पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु जैसी मिश्रित धातुओं से बनी हैं। इन पर फारसी और देवनागरी लिपि में शिलालेख भी अंकित हैं।

मौके से मिले कई अहम सुराग
राज्य पुरातत्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान मौके से गद्दे, रजाई, लोहे के पाइप और तोप को घसीटकर ले जाने के निशान मिले हैं। इसके अलावा किले के पिछले दुर्गम रास्ते पर भारी वाहन के टायरों के निशान भी मिले हैं। पुलिस को शक है कि इस वारदात में ऐतिहासिक वस्तुओं की तस्करी से जुड़े लोग शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक आरोपियों की पहचान नहीं हो पाई है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
नरवर किले में सुरक्षा के लिए छह गार्ड तैनात हैं। इनमें चार दिन और दो रात की ड्यूटी करते हैं। घटना वाली रात दोनों रात के गार्ड मौके पर मौजूद नहीं थे और अपने घर चले गए थे।

पुलिस और पुरातत्व विभाग की जांच जारी
राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने बताया कि, ऐतिहासिक तोप चोरी होने के पर्याप्त प्रमाण मिले हैं। पुलिस के साथ मिलकर मामले की जांच की जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की जाएगी।

नरवर थाना प्रभारी विनय यादव ने बताया कि, जांच में सुरक्षा गार्डों की लापरवाही सामने आई है। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश की जा रही है। पुलिस चोरी में इस्तेमाल वाहन और आरोपियों तक पहुंचने के लिए घटनास्थल से मिले सभी सुरागों की जांच कर रही है।



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