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कौशल से सशक्त युवा, विकसित छत्तीसगढ़ की ओर मजबूत कदम

कौशल से सशक्त युवा, विकसित छत्तीसगढ़ की ओर मजबूत कदम

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*विशेष लेख*

*विश्व युवा कौशल विकास दिवस*

*• लक्ष्मीकांत कोसरिया, उप संचालक*

"कौशल ही आज के समय की सबसे बड़ी पूंजी है। जिस युवा के पास हुनर है, उसके लिए अवसरों की कोई कमी नहीं है।" इसी सोच को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को रोजगारोन्मुखी एवं उद्योगों की मांग के अनुरूप आधुनिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की विशा में लगातार कार्य कर रही है।

विश्व युवा कौशल विकास दिवस के अवसर पर यह कहना सार्थक होगा कि छत्तीसगढ़ ने कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्य में युवाओं को केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के साथ रोजगार सुनिश्चित करने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।

*लगभग पांच लाख युवाओं को मिला कौशल प्रशिक्षण*

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के प्रारंभ से अब तक प्रदेश के 4 लाख 94 हजार 330 युवाओं को विभिन्न रोजगारपरक ट्रेडों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इनमें से 2 लाख 74 हजार 934 युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा चुका है। वर्तमान में योजना के अंतर्गत राज्यभर में 375 व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रवाता (199 शासकीय एवं 176 अशासकीय) के माध्यम से राष्ट्रीय कौशल अर्हता फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण संचालित किए जा रहे हैं।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 9 हजार 418 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 7 हजार 528 युवाओं को रोजगार प्राप्त हो चुका है, जबकि 6 हजार 679 युवा वर्तमान में विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

*बदलते दौर के अनुरूप आधुनिक पाठ्यक्रम*

राज्य सरकार ने युवाओं को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने के लिए कौशल प्रशिक्षण में व्यापक बदलाव किए हैं। अब पारंपरिक ट्रेडों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मेंटेनेंस, ड्रोन ऑपरेटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग (AI-ML), साइबर सुरक्षा, सूर्यमित्र (सौर ऊर्जा) जैसे 21 वीं सदी के अत्याधुनिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

इस वर्ष विशेष रूप से जल वितरण संचालक (Water Distribution Operator) कोर्स प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत 2,770 युवाओं को मल्टी-स्किल प्रशिक्षण देकर सीधे रोजगार से जोड़ने की कार्ययोजना बनाई गई है।

*गुणवत्ता पर विशेष जोर*

छत्तीसगढ़ में कौशल विकास केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

अब प्रत्येक प्रशिक्षक के लिए शैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव के साथ प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (Training of Trainers-TOT) प्रमाणन अनिवार्य किया गया है। इससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आया है। 

प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी के लिए मूल्यांकन से पहले कम से कम सात दिवस का ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (OJT) अनिवार्य किया गया है, जिससे उन्हें उद्योगों की वास्तविक कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके।

प्रशिक्षण केंद्रों में फेस आधारित ऑनलाइन बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है। साथ ही सभी प्रशिक्षण केंद्रों में आई.पी. आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से प्रशिक्षण गतिविधियों की सतत निगरानी की जा रही है। इन व्यवस्थाओं से पारदर्शिता बढ़ी है तथा प्रशिक्षण की गुणवत्ता और अनुशासन में सुधार हुआ है।

*प्रशिक्षण के साथ रोजगार की भी गारंटी*

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रशिक्षण के बाद युवाओं के रोजगार पर विशेष ध्यान दिया जाता है। प्रशिक्षण संचालन की अनुमति देने से पहले प्रत्येक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता द्वारा रोजगार उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं का परीक्षण किया जाता है। परीक्षण के बाद ही प्रशिक्षण संचालन की अनुमति प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त प्रशिक्षण केंद्रों को मिलने वाली राशि का 60 प्रतिशत भुगतान तभी किया जाता है, जब प्रशिक्षित युवाओं का नियोजन सुनिश्चित हो जाता है। यह व्यवस्था प्रशिक्षण संस्थानों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण देने के लिए प्रेरित करती है।

*बस्तर के युवाओं तक पहुंच रहा कौशल विकास*

प्रदेश के दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं तक कौशल विकास पहुंचाने के लिए बस्तर संभाग के प्रत्येक विकासखंड में स्किल डेवलपमेंट सेंटर (SDC) स्थापित करने की कार्यवाही की जा रही है। जिला बीजापुर में असिस्टेंट मेसन कोर्स प्रारंभ किया जा चुका है। वहीं बस्तर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, कांकेर एवं बीजापुर सहित छह पुनर्वास केंद्रों का व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता के रूप में पंजीयन किया गया है तथा अन्य केंद्रों को भी शीघ्र जोड़ा जा रहा है।

*उद्योगों के साथ साझेवारी से बढ़ रही रोजगार क्षमता*

राज्य सरकार ने उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।

महिंद्रा एंड महिंद्रा के साथ ट्रैक्टर मैकेनिक प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत अब तक 101 युवा प्रशिक्षित हो चुके हैं तथा 60 युवा प्रशिक्षणरत हैं।

साइरोनिक्स टेक्नोलॉजी प्रा. लि. के सहयोग से रायपुर के लाईवलीहुड कॉलेज में इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी के पांच जॉब रोल में प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है।

नांदी फाउंडेशन के सहयोग से सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित महिलाओं को एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 1,142 युवा प्रशिक्षित हो चुके हैं।

पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में व लॉन्ड्री बैग के साथ साझेदारी कर लॉन्ड्री सुपरवाइजर एवं अन्य रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रारंभ किए गए हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में श्री सत्य साई हेल्थ एवं एजुकेशन ट्रस्ट के सहयोग से कार्डियक एवं स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित उन्नत कौशल प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए जा रहे हैं।

*लाईवलीहुड कॉलेज बने कौशल विकास के सशक्त केंद्र*

प्रदेश के जिलों में संचालित लाईवलीहुड कॉलेज आज युवाओं के लिए कौशल विकास का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। वर्ष 2013 से अब तक इन कॉलेजों में 68 हजार 552 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इनमें से 28 हजार 820 युवाओं को रोजगार तथा 10 हजार 632 युवाओं को स्वरोजगार प्राप्त हुआ है। इस प्रकार कुल 39 हजार 452 युवा आजीविका से जुड़ चुके हैं। वर्तमान में 2 हजार 413 युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसी प्रकार पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत वर्ष 2024 से अब तक 13 हजार 188 युवाओं को लाईवलीहुड कॉलेजों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया है।

*आधुनिक अधोसंरचना का विस्तार*

राज्य के 26 जिलों में लाईवलीहुड कॉलेज भवन पूर्ण होकर संचालित हैं। नवीन जिलों में भी भवन निर्माण एवं भूमि आबंटन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रदेश में 26 बालिका छात्रावास तथा 20 बालक छात्रावास पूर्ण होकर संचालित हैं। शेष छात्रावासों का निर्माण एवं भूमि आबंटन कार्य प्रगति पर है।

*नवा रायपुर में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस*

छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।

नवा रायपुर में लाईवलीहुड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी, जहां अत्याधुनिक मशीनों, आधुनिक प्रयोगशालाओं, विशेष कार्यशालाओं तथा उद्योगों की मांग के अनुरूप इंजीनियरिंग एवं गैर-इंजीनियरिंग क्षेत्रों में विश्वस्तरीय कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भूमि लीज अनुबंध हेतु 2 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

*कौशल विकास से आत्मनिर्भरता की नई विशा*

विश्व युवा कौशल विकास दिवस पर छत्तीसगढ़ का अनुभव यह दर्शाता है कि कौशल विकास केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और रोजगारयुक्त बनाने का सशक्त अभियान है। नई तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, उद्योगों के साथ साझेदारी, रोजगार सुनिश्चित करने की व्यवस्था तथा आधुनिक अधोसंरचना के माध्यम से छत्तीसगढ़ वेश में कौशल विकास का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है। आने वाले वर्षों में यह पहल न केवल लाखों युवाओं के जीवन में परिवर्तन लाएगी, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

*राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की पहचान*

प्रदेश के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। वर्ष 2025-26 में 19 कौशल ट्रेडों में आयोजित जिला एवं राज्य स्तरीय इंडिया स्किल प्रतियोगिता में 3,327 युवाओं ने भाग लिया, जिनमें से 381 प्रतिभागी राज्य स्तर तक पहुंचे। ईस्ट जोन क्षेत्रीय प्रतियोगिता, भुवनेश्वर में छत्तीसगढ़ के 38 प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 01 स्वर्ण, 02 रजत, 05 कांस्य एवं 04 मेडल ऑफ एक्सीलेंस सहित कुल 12 पदक अर्जित किए।

वहीं राष्ट्रीय स्तर की इंडिया स्किल प्रतियोगिता में राज्य के 03 प्रतिभागियों ने प्रतिनिधित्व किया, जिनमें से 01 प्रतिभागी ने मेडल ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं सफल आयोजन के लिए भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को प्रशस्ति पत्र से भी सम्मानित किया गया।



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