Jwala

Express News

जरा हट के

सुप्रीम कोर्ट बोला- MCA ने NCLT-NCLAT को हाईजैक किया: अध्यक्षों को मिले नियुक्तियों की पूरी आजादी, संविदा भर्ती पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने NCLT और NCLAT को अपने नियंत्रण में ले लिया है। CJI ने नियुक्तियों में अध्यक्षों को आजादी देने और नियमित भर्ती का सुझाव दिया।

71030102026133120supreme_court_nclt_nclat_mca_autonomy_1793349742.webp

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और इसकी अपीलीय संस्था NCLAT के कामकाज में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के दखल पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि मंत्रालय ने दोनों ट्रिब्यूनल को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया है। यह संस्थाओं की स्वतंत्रता के लिए ठीक नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि NCLT और NCLAT के अध्यक्षों को नियुक्तियों के मामले में पूरी आजादी मिलनी चाहिए। कोर्ट ने सुझाव दिया कि फिलहाल सरकारी विभागों से अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर लाया जाए। इसके साथ ही UPSC या कर्मचारी चयन आयोग (SSC) के जरिए नियमित भर्ती की व्यवस्था शुरू की जाए।

'मंत्रालय पूरी तरह नियंत्रण रखना चाहता है'
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि संविदा पर काम करने वाली कंपनियों को न्यायिक और तकनीकी सदस्यों की जरूरतों की परवाह नहीं होती। उन्होंने कहा कि दोनों ट्रिब्यूनल के अध्यक्षों के पास नियुक्तियों को लेकर पूरी स्वायत्तता होनी चाहिए।

CJI ने कहा, "कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने ट्रिब्यूनल को पूरी तरह अपने कब्जे में ले लिया है। यह संस्था की स्वायत्तता पर हमला है। मंत्रालय हर चीज पर अपना नियंत्रण रखना चाहता है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।"

संविदा कर्मचारियों की नौकरी पर संकट
सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणियां NCLT और NCLAT में काम कर रहे संविदा कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई के दौरान आईं। इन कर्मचारियों ने अदालत से अनुरोध किया है कि लंबे समय से काम कर रहे लोगों को अचानक नौकरी से नहीं हटाया जाए।

कर्मचारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने कोर्ट को बताया कि मौजूदा कर्मचारियों को 1 या 2 नवंबर से काम छोड़ने के लिए कहा जा सकता है। उनकी जगह एक निजी कंपनी के जरिए नए कर्मचारियों की नियुक्ति किए जाने की संभावना है।

अरोड़ा ने कहा कि इन कर्मचारियों ने करीब छह साल तक काम किया है। भले ही उनकी नियुक्ति संविदा पर हुई हो, लेकिन उनके भी कुछ अधिकार हैं। उन्होंने बताया कि संविदा कर्मचारी होने के कारण उन्हें HRA और DA जैसे भत्ते नहीं मिलते।

भर्ती नियमों में नियमित करने का प्रावधान होने का दावा
मीनाक्षी अरोड़ा ने दलील दी कि NCLT के भर्ती नियमों में लंबे समय से काम कर रहे संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का प्रावधान है। भर्ती के विज्ञापन में भी इसका उल्लेख किया गया था।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब नियमों और विज्ञापन में नियमित करने की व्यवस्था है, तो कर्मचारियों को नौकरी से बाहर क्यों किया जा रहा है?

अरोड़ा ने कहा कि ऐसा करना मनमाना होगा और संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन कर सकता है। उन्होंने यह भी दलील दी कि कर्मचारियों को हटाने से पहले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।

CJI बोले- मुझे संविदा पर होने वाली नियुक्तियां पसंद नहीं
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि उन्हें संविदा के आधार पर होने वाली नियुक्तियां पसंद नहीं हैं। उन्होंने अपना एक पुराना अनुभव भी साझा किया।

CJI ने बताया कि बॉम्बे में एक मामले में संविदा कर्मचारी जरूरी मूल दस्तावेज लेकर चले गए थे। इसके बाद FIR दर्ज करानी पड़ी थी।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी व्यवस्था में न्यायिक सदस्यों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। CJI ने संविदा कर्मचारियों और उन्हें उपलब्ध कराने वाली कंपनी की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

UPSC और SSC से नियमित भर्ती का सुझाव
CJI ने कहा कि NCLT और NCLAT में नियुक्तियों के लिए दोनों संस्थाओं के अध्यक्षों को स्वतंत्र अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि फिलहाल सरकारी विभागों से अनुभवी कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर लाया जा सकता है।

इसके साथ ही दोनों ट्रिब्यूनल को अपनी नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। इसके लिए UPSC या कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की मदद ली जा सकती है।

CJI ने कहा कि इस समस्या का समाधान दो स्तरों पर होना चाहिए। इसके लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक योजना बनाने की जरूरत है। कोर्ट ने व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए याचिका पर नोटिस जारी किया।



एक टिप्पणी छोड़ें

Data has beed successfully submit

553251020261222291010838759.png
215251020261218411010837320.png
336231020261223311010791831.png

Related News

Advertisement

Advertisement

Popular Post

This Week
This Month
All Time

Advertisement

Advertisement

स्वामी

संपादक- पवन देवांगन 

पता - बी- 8 प्रेस कॉम्लेक्स इन्दिरा मार्केट
दुर्ग ( छत्तीसगढ़)

ई - मेल :  dakshinapath@gmail.com

मो.- 9425242182, 7746042182

हमारे बारे में

हिंदी प्रिंट मीडिया के साथ शुरू हुआ दक्षिणापथ समाचार पत्र का सफर आप सुधि पाठकों की मांग पर वेब पोर्टल तक पहुंच गया है। प्रेम व भरोसे का यह सफर इसी तरह नया मुकाम गढ़ता रहे, इसी उम्मीद में दक्षिणापथ सदा आपके संग है।

सम्पूर्ण न्यायिक प्रकरणों के लिये न्यायालयीन क्षेत्र दुर्ग होगा।

स्वामी / संपादक : ज्वाला प्रसाद अग्रवाल

सिंधी कॉलोनी, सिंधी गुरुद्वारा के पीछे, दुर्ग, छत्तीसगढ़, पिनकोड - 491001

मो.- 9993590905

विज्ञापन एवं सहयोग के लिए इस पर भुगतान करें

बैंक का नाम : IDBI BANK

खाता नं. : 525104000006026

IFS CODE: IBKL0000525

Address : Dani building, Polsaipara, station road, Durg, C.G. - 490001

SCAN QR
qr-paytm
SCAN QR
Googlepay

Copyright 2025-26 JwalaExpress - All Rights Reserved

Designed By - Global Infotech.