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नेपाल चुनाव में बड़ा उलटफेर: रुझानों में RSP को प्रचंड बहुमत, बालेन शाह PM बनने के करीब; ओली पीछे

नेपाल चुनाव 2026 की मतगणना में बड़ा राजनीतिक बदलाव दिख रहा है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) 100 से ज्यादा सीटों पर आगे है, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली झापा-5 सीट पर पिछड़ते नजर आ रहे हैं।

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नेपाल में 5 मार्च 2026 को हुए आम चुनावों की मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी (RSP) सबसे आगे चल रही है। पार्टी अब तक 23 सीटें जीत चुकी है और 95 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जिससे वह स्पष्ट रूप से सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती दिख रही है

वहीं पारंपरिक दलों का प्रदर्शन अपेक्षा से कमजोर नजर आ रहा है। नेपाली कांग्रेस ने अब तक 5 सीटें जीती हैं और 9 सीटों पर आगे है, जबकि CPN-UML के खाते में 1 सीट की जीत और 12 सीटों पर बढ़त दर्ज है। दूसरी ओर नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) ने 2 सीटें जीती हैं और 9 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि अन्य दल फिलहाल 5 सीटों पर आगे चल रहे हैं।

इन रुझानों से संकेत मिल रहे हैं कि नेपाल की राजनीति में इस बार नई ताकत का उदय हो सकता है। हालांकि अंतिम तस्वीर मतगणना पूरी होने के बाद ही साफ होगी, लेकिन फिलहाल RSP की मजबूत बढ़त ने चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है।

3 साल पुरानी पार्टी की ऐतिहासिक बढ़त
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी, जो केवल तीन साल पहले बनी थी, इस चुनाव में चौंकाने वाला प्रदर्शन करती दिख रही है। चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पार्टी 165 प्रत्यक्ष निर्वाचित सीटों में से 100 से अधिक सीटों पर आगे चल रही है या जीत दर्ज कर चुकी है।

कई रिपोर्ट्स में आरएसपी के 110 से ज्यादा सीटों पर लीड होने की भी बात सामने आई है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी बहुमत के करीब पहुंच सकती है।

नेपाल चुनाव LIVE: शुरुआती रुझान

पार्टी    

जीत  

 बढ़त

राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी (RSP)   28 90
नेपाली कांग्रेस   5 9
CPN-UML   1 10
नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (NCP)     2 10
अन्य     0  6

युवाओं के आंदोलन का असर
यह चुनाव सितंबर 2025 में हुए जेनरेशन-Z के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के बाद हो रहा है। उन प्रदर्शनों ने भ्रष्टाचार और खराब शासन के खिलाफ बड़ा जनाक्रोश पैदा किया था और अंततः केपी ओली की सरकार गिर गई थी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, युवाओं के इसी गुस्से और बदलाव की मांग ने आरएसपी को मजबूत समर्थन दिलाया है।

प्रचंड ने रुकुम पूर्व-1 सीट जीती
पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचंड’ ने रुकुम पूर्व-1 सीट से जीत दर्ज की है। उन्हें 10,240 वोट मिले और उन्होंने 6,778 वोटों के अंतर से जीत हासिल की।

हालांकि नेपाली कांग्रेस, सीपीएन-यूएमएल और माओवादी जैसे पारंपरिक दलों में इस बार प्रचंड ही बड़े नेताओं में अकेले जीतते हुए नजर आ रहे हैं। वहीं नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन थापा सरलाही-4 सीट पर आरएसपी उम्मीदवार से पीछे चल रहे हैं।

RSP ने बदलाव का दिया संदेश
आरएसपी के प्रवक्ता मनीष झा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पार्टी का उद्देश्य देश में सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि नेताओं को सत्ता का प्रतीक बनने की बजाय जनता का मददगार बनकर काम करना चाहिए। उनके अनुसार, देश के असली दुश्मन भ्रष्टाचार, गरीबी और खराब शासन हैं और नई सरकार का लक्ष्य इन्हें खत्म करना होगा।

बालेन शाह की लोकप्रियता बनी बड़ा फैक्टर
बालेन शाह की लोकप्रियता का मुख्य कारण उनकी काठमांडू मेयर के रूप में साफ-सुथरी छवि और युवाओं से मजबूत जुड़ाव माना जा रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह चुनाव नेपाल की राजनीति में नई पीढ़ी के उदय का संकेत दे रहा है, जहां पारंपरिक दलों का प्रभाव कम होता दिख रहा है। मतगणना पूरी होने के बाद अंतिम परिणाम सामने आएंगे, लेकिन फिलहाल के रुझान आरएसपी और बालेन शाह के पक्ष में बड़ी जीत का संकेत दे रहे हैं।

नेपाल की मिश्रित चुनाव प्रणाली (Mixed Electoral System)
एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें दो अलग-अलग चुनावी प्रणालियों को जोड़कर संसद के सदस्यों का चुनाव किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य छोटे राजनीतिक दलों और समाज के विभिन्न समूहों को संसद में जगह देना है ताकि कोई एक पार्टी पूरी तरह हावी न हो सके।

​नेपाल में प्रतिनिधि सभा (निचले सदन) की कुल 275 सीटों के लिए चुनाव दो तरीकों से होता है:-

​1. प्रत्यक्ष चुनाव (फर्स्ट पास्ट द पोस्ट - FPTP)
​सीटों की संख्या: कुल 275 में से 165 सीटों पर सीधा चुनाव होता है।
​प्रक्रिया: देश को 165 निर्वाचन क्षेत्रों में बांटा गया है। प्रत्येक क्षेत्र के मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देते हैं और जिसे सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, वह विजयी घोषित किया जाता है।

​2. आनुपातिक प्रतिनिधित्व (Proportional Representation - PR)
​सीटों की संख्या: बाकी बची 110 सीटें इस प्रणाली के तहत भरी जाती हैं।
​प्रक्रिया: इस प्रणाली में मतदाता किसी उम्मीदवार को नहीं, बल्कि अपनी पसंद की राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं।
​सीटों का बंटवारा: पूरे देश में किसी पार्टी को कुल जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसी अनुपात में उन्हें संसद में सीटें दी जाती हैं।

​इस प्रणाली के लाभ
​समावेशिता: यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि अलग-अलग सामाजिक समूहों और अल्पसंख्यक समुदायों का प्रतिनिधित्व संसद में बना रहे।
​विविधता: यह छोटे दलों को भी अपनी वोट हिस्सेदारी के आधार पर संसद में पहुँचने का अवसर देती है।
​लोकतांत्रिक संतुलन: इसमें किसी एक दल के लिए पूर्ण बहुमत पाना कठिन हो जाता है, जिससे अक्सर गठबंधन सरकारों का निर्माण होता है।

​वर्तमान के चुनावों में इसी प्रणाली के कारण गणना में समय लग रहा है, जहाँ प्रत्यक्ष सीटों के नतीजे 24 घंटे में आ सकते हैं, वहीं पूरी 275 सीटों की स्थिति स्पष्ट होने में दो से तीन दिन या एक सप्ताह तक का समय लग सकता है।

अंतरराष्ट्रीय नजर: भारत, चीन और अमेरिका की सक्रियता
​नेपाल की रणनीतिक स्थिति के कारण पड़ोसी देशों सहित महाशक्तियों की नजरें इन परिणामों पर हैं।

​चीन का रुख: चीन ने अंतरिम पीएम सुशीला कार्की की सरकार के साथ संपर्क बनाए रखा है और हाल ही में 40 लाख डॉलर की सहायता भी दी थी।
​अमेरिका का संकेत: अमेरिका ने साफ किया है कि वह नेपाल में बनने वाली किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के साथ काम करने को तैयार है।
​भारत की प्राथमिकता: भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा नेपाल में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया का संपन्न होना है।



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