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23 दिन बाद अतिथि शिक्षकों की हड़ताल स्थगित, 5 सितंबर तक सरकार को दिया समय

23 दिन बाद अतिथि शिक्षकों की हड़ताल स्थगित, 5 सितंबर तक सरकार को दिया समय मांगें पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की दी चेतावनी

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दुर्ग। संविलियन, समान कार्य समान वेतन, सेवा सुरक्षा सहित अन्य मांगों को लेकर पिछले 23 दिनों से आंदोलनरत प्रदेशभर के अतिथि शिक्षकों ने शुक्रवार को अपनी हड़ताल 5 सितंबर (शिक्षक दिवस) तक स्थगित करने की घोषणा की। राज्य अतिथि शिक्षक संघ (विद्या मितान) छत्तीसगढ़ ने बताया कि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव और स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह से मांगों के संबंध में मिले सकारात्मक आश्वासन के बाद यह निर्णय लिया गया है।

मीडिया से चर्चा करते हुए संघ के संरक्षक धर्मेन्द्र दास वैष्णव ने स्पष्ट किया कि हड़ताल स्थगित करने का निर्णय शासन द्वारा ज्वाइनिंग के लिए दिए गए अल्टीमेटम के दबाव में नहीं, बल्कि मांगों पर सार्थक पहल और सकारात्मक आश्वासन मिलने के कारण लिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि 5 सितंबर तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है तो आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा।

इस अवसर पर संघ के कार्यकारी अध्यक्ष राज यादव, दुर्ग जिला अध्यक्ष मुकेश वर्मा सहित अन्य अतिथि शिक्षक उपस्थित रहे।

संघ के संरक्षक धर्मेन्द्र दास वैष्णव ने बताया कि वर्ष 2016 में राज्य सरकार ने आदिवासी एवं वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की थी। वर्तमान में प्रदेश के 24 जिलों में 1,538 अतिथि शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियुक्ति के समय अतिथि शिक्षकों का मानदेय 15 हजार रुपये था, जो 10 वर्षों बाद बढ़कर केवल 20 हजार रुपये हुआ है। जबकि वे नियमित शिक्षकों के समान कार्य करते हैं, इसके बावजूद उन्हें वेतन और अन्य शासकीय सुविधाओं में समानता नहीं मिल रही है। इससे अतिथि शिक्षकों में असंतोष और भेदभाव की भावना उत्पन्न हो रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार ने अतिथि शिक्षकों को नियमित शिक्षकों के समान सुविधाएं देने के लिए सेवा शर्तों में संशोधन किया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने उसे अब तक लागू नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि "मोदी की गारंटी" में भी अतिथि शिक्षकों की मांगों को शामिल किया गया था, लेकिन आज तक उसका लाभ नहीं मिल पाया है, जिससे आर्थिक और सामाजिक समस्याएं लगातार बनी हुई हैं।

संघ के संरक्षक धर्मेंद्र दास वैष्णव ने दावा किया कि प्रदेश में शिक्षकों के लगभग 33 हजार पद रिक्त हैं। यदि इन पदों पर अनुभवी अतिथि शिक्षकों का समायोजन किया जाता है तो सरकार को प्रशिक्षित और अनुभवी शिक्षक मिलेंगे तथा अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं बढ़ेगा।

उन्होंने आंदोलन के दौरान प्रशासनिक कार्रवाई की भी आलोचना की। श्री वैष्णव ने कहा कि अतिथि शिक्षक जिला शिक्षा कार्यालय दुर्ग के पास शांतिपूर्ण ढंग से धरना दे रहे थे, लेकिन प्रशासन ने बुधवार की शाम आंदोलन स्थल से टेंट हटवा दिए और कई शिक्षकों को धरना स्थल पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस हिरासत में लिया। साथ ही 13 अतिथि शिक्षकों के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई भी की गई, जिसे उन्होंने अन्यायपूर्ण बताया।

अब अतिथि शिक्षकों की नजर 5 सितंबर तक सरकार द्वारा लिए जाने वाले निर्णय पर टिकी है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को पुनः शुरू करते हुए उसे और व्यापक बनाया जाएगा।



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