वॉशिंगटन/नई दिल्ली। 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के मुख्य आरोपी तहव्वुर राणा को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (6 मार्च) को उसकी वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने भारत प्रत्यर्पण को रोकने की मांग की थी। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, जस्टिस कगन ने राणा की अर्जी (24A852) को अस्वीकार कर दिया है। इस फैसले के बाद अब तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो गया है।
मुंबई हमले के मास्टरमाइंड से सीधा कनेक्शन
पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक तहव्वुर राणा (64) को अमेरिका के लॉस एंजिल्स महानगरीय हिरासत केंद्र में रखा गया है। वह 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड और पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली का सहयोगी है। जांच में सामने आया कि राणा ने आतंकी हमले की योजना में मदद की थी, जिसके चलते भारत ने उसके प्रत्यर्पण की मांग की थी।
अमेरिकी कोर्ट में क्या थी राणा की दलीलें?
तहव्वुर राणा ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में एक आपातकालीन याचिका दाखिल कर प्रत्यर्पण पर स्थगन की मांग की थी। उसने दावा किया कि भारत में उसका प्रत्यर्पण अमेरिकी कानून और यातना के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का उल्लंघन करेगा। राणा ने यह भी तर्क दिया कि भारतीय हिरासत में उसे प्रताड़ना झेलनी पड़ सकती है, क्योंकि वह पाकिस्तानी मूल का मुस्लिम है।
गंभीर बीमारियों का दिया हवाला
राणा ने अदालत में अपनी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए कहा कि भारत प्रत्यर्पण उसके लिए “मौत की सजा” के समान होगा। उसके मेडिकल रिकॉर्ड (जुलाई 2024) के अनुसार, उसे हृदय रोग, पार्किंसंस, मूत्राशय कैंसर, स्टेज-3 क्रोनिक किडनी रोग, अस्थमा और कोविड-19 संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियां हैं।
अब क्या होगा आगे?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में कोई कानूनी अड़चन नहीं बची है। भारत सरकार जल्द ही उसे हिरासत में लेकर मुंबई हमलों से जुड़े मामलों में मुकदमा चला सकती है। भारत की एजेंसियां पहले से ही इस मामले में पूरी तैयारी कर रही हैं, ताकि उसे कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।