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भीड़भाड़ वाले इलाके में पटाखा दुकानों को अनुमति: दुर्ग नगर निगम ने सुरक्षा नियमों को ठोकर मारकर आम जनता की जान जोखिम में डाली

दुर्ग नगर निगम की लापरवाही ने बढ़ाया खतरा: भीड़भाड़ वाले इलाके में पटाखा दुकानों को मिली विवादित अनुमति। राजनीतिक दबाव में दुर्ग निगम ने दी पटाखा दुकानों की अनुमति, फायर सेफ्टी नियम धरे रह गए। सुरक्षा नियम ताक पर, राजनीतिक सिफारिश हावी: गंजमंडी के सामने पटाखा दुकानें लगीं। आग से खेलने की तैयारी! निगम ने भीड़भाड़ वाले इलाके में पटाखा दुकानों को दी खुली छूट। फायर गाइडलाइन की उड़ाई धज्जियां, निगम की अनुमति बनी खतरे की घंटी। जनता की जान से खिलवाड़: निगम ने ट्रैफिक जोन में पटाखा दुकानों को दी मंजूरी। राजनीतिक दबाव में सुरक्षा से समझौता: निगम की अनुमति से बढ़ा आगजनी का खतरा। ‘धमाका’ दिवाली से पहले: निगम की मनमानी से जनता में बढ़ी चिंता। ज्वाला एक्सप्रेस न्यूज पर विज्ञापन एवं समाचार के लिए 9993590905

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राजनीतिक दबाव में दुर्ग निगम ने जारी की अनुमति, ट्रैफिक जाम और आगजनी का बढ़ा खतरा

ज्वाला एक्सप्रेस न्यूज 9993590905

दुर्ग।शहर में पहली बार नगर निगम दुर्ग ने सारे नियम-कायदों को ताक पर रखकर पुरानी गंजमंडी के सामने जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में अस्थाई पटाखा दुकानों की अनुमति दे दी है। सबसे व्यस्त जीई रोड पर पाँच दुकानों को अस्थाई रूप से दुकान लगाने की अनुमति दी गई है, जो न केवल फायर सेफ्टी नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि आम जनता की जान के साथ भी खुला खिलवाड़ है।

सूत्रों के अनुसार, नगर निगम अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव डालकर यह अनुमति जारी कराई गई है। जब इस बारे में निगम अधिकारियों से जानकारी ली गई, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि “दुकानों का आवंटन गलत तरीके से हुआ है” — लेकिन राजनीतिक दबाव का हवाला देते हुए कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं हुआ।

ट्रैफिक और फायर सेफ्टी की अनदेखी

जहां अनुमति दी गई है, वह क्षेत्र न केवल भीड़भाड़ वाला है बल्कि शहर को राजनांदगांव और बालोद से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग भी है, जहां 24 घंटे वाहनों की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद नगर निगम ने बिना सुरक्षा व्यवस्था और फायर सेफ्टी की परवाह किए अनुमति जारी कर दी।

इन दुकानों में बिजली की आपूर्ति अस्थाई रूप से मंडी क्षेत्र से ली गई है, जबकि नियमों के अनुसार जनरेटर का उपयोग अनिवार्य है। बांस, बल्लियों और कपड़े से टेंट बनाकर पटाखों की बिक्री की जा रही है — जो कि फायर सेफ्टी गाइडलाइन का सीधा उल्लंघन है। न स्थानीय निकाय, न पुलिस विभाग और न ही अग्निशमन विभाग ने अब तक कोई कार्रवाई की है। नतीजा, इस क्षेत्र में लगातार ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है।

फायर सेफ्टी विभाग की गाइडलाइन हवा में,फायर सेफ्टी विभाग द्वारा जारी स्पष्ट निर्देश हैं कि —

पटाखा दुकानें अज्वलनशील सामग्री से बने टिन शेड में ही लगाई जाएं।

एक दुकान से दूसरी दुकान की दूरी कम से कम 3 मीटर हो।

50 मीटर के दायरे में आतिशबाजी प्रतिबंधित हो।

हर दुकान में 5 किग्रा क्षमता का डीसीपी फायर एक्सटिंग्विशर मौजूद रहे।

दुकान के पास किसी भी प्रकार की वाहन पार्किंग पूरी तरह से प्रतिबंधित ।

जिला अग्निशमन अधिकारी नागेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि “ये सभी नियम सुरक्षा की दृष्टि से अनिवार्य हैं”, लेकिन शहर में इनका तनिक भी पालन नहीं किया जा रहा है। दुकानों के सामने बाइक और चारपहिया वाहनों की लंबी कतारें लगी हैं। यह स्थिति किसी भी समय भयावह हादसे को जन्म दे सकती है।

जेआरडी मैदान से हटाकर सड़क पर दुकानें लगाने की मिली अनुमति

नगर निगम प्रतिवर्ष जेआरडी स्कूल मैदान में अस्थाई पटाखा दुकानों के लिए जगह उपलब्ध कराता है। इस बार भी करीब 30 दुकानें मैदान में लगी हैं। मगर जिन पाँच दुकानों को पुरानी गंजमंडी के सामने अनुमति दी गई है, वे सभी पहले जेआरडी मैदान में ही थीं। बाद में सड़क किनारे दुकान लगाने के लिए आवेदन देकर इन्हें शिफ्ट कर दिया गया — वो भी राजनीतिक सिफारिश के आधार पर।

शहर में इस वर्ष कुल 100 अस्थाई लाइसेंस जारी किए गए हैं और करीब 20 स्थायी हैवी लाइसेंस वाले पटाखा गोदाम संचालित हैं। गंजमंडी क्षेत्र में अस्थाई दुकानें लगाए जाने पर शहरवासियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कई नागरिकों ने इसकी शिकायत प्रशासन से की है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

इंदिरा मार्केट में भी नियमों की अनदेखी

इसी तरह इंदिरा मार्केट परिसर में भी कई जगहों पर अवैध रूप से पटाखा दुकानें संचालित हैं। नगर निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल सहित पूरा प्रशासन हालात से वाकिफ होने के बावजूद कार्रवाई से बच रहा है। शहर के प्रमुख बाजारों में अग्नि सुरक्षा के बिना संचालित दुकानों ने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है।

आम जनता की जान खतरे में

राजनीतिक दबाव में निगम द्वारा जारी की गई इन अस्थाई अनुमतियों ने शहरवासियों की जान जोखिम में डाल दी है। पटाखों के धुएं और भीड़भाड़ से जहां ट्रैफिक प्रभावित हो रहा है, वहीं अग्निकांड की आशंका किसी भी समय गंभीर रूप ले सकती है।

शहरवासियों ने मांग की है कि जिला प्रशासन और फायर सेफ्टी विभाग तुरंत हस्तक्षेप कर इन दुकानों को जेआरडी मैदान या सुरक्षित स्थल पर स्थानांतरित करे — ताकि दिवाली की खुशी किसी दुर्घटना में न बदल जाए।

 

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