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दुर्गा काली मंदिर के संस्थापक सुशील कहार गुरुजी जी का 1108 नारियल से हुआ दाह संस्कार..

दुर्गा काली मंदिर के संस्थापक सुशील कहार गुरुजी जी का 1108 नारियल से हुआ दाह संस्कार..

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गुरुजी से जुड़े हजारों श्रद्धालुओं में शोक की लहर, अंतिम यात्रा में मंत्री गजेंद्र यादव सांसद विजय बघेल,महापौर अलका बाघमार सहित बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल..
दुर्ग। 
उरला बायपास रोड के निचे स्थापित ख्याति प्राप्त प्रसिद्ध अखंड ज्योति महारानी जगतारण मां दुर्गा काली मंदिर के संस्थापक गुरुजी सुशील कहार के निधन ने मंदिर व गुरुजी से जुड़े हजारों अनुयाइयों के साथ साथ उन्हे जानने वाले लोगो को शोक मग्न कर दिया है। पूज्य सुशील कहार जी की अंतिम यात्रा माता दुर्गा काली मंदिर उरला स्थित निवास से निकली तब सभी के आखें नम थी और जिस गुरु के पास हमेशा अपने कष्टों के निवारण के लिए पहुंचते थे अब उन्ही से सदा के लिए विदा होने की वेदना ने लोगो की गमगीन कर दिया। फूलो से सजे स्वर्ग रथ में शिवनाथ नदी मुक्ति धाम तक जगह जगह लोग उनके पार्थिव वाहन को देखकर श्रद्धानवत हो रहे थे। सुशील गुरुजी कि अंत्योष्टि शिवनाथ नदी मुक्तिधाम में किया गया जहां उनके पुत्र सागर कहार ने 1108 नग नारियल व गोबर के कंडे से जमे चिता को मुखाग्नि दिया। इस दौरान अंतिम यात्रा में केबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव, सांसद विजय बघेल, दुर्ग ग्रामीण विधायक, पूर्व विधायक अरुण वोरा, महापौर श्रीमती अलका बाघमार प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता सच्चिदानंद उपासने, पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल, पूर्व सभापति दिनेश देवांगन,नितेश साहू सहित अनेक नेता जन प्रतिनिधि व गणमान्य नागरिक व कहार भोई समाज के लोग उपस्थित थे।
     उरला स्थित सिद्धपीठ काली मंदिर में माता रानी के सेवक के रूप में गुरुजी सुशील कहार दुर्ग शहर ही नही बल्कि संपूर्ण जिले सहित प्रदेश में भी अपनी साधना के जरिए लोगो के कष्ट निवारक के रूप में जाने जाते थे वे माता काली के अनन्य भक्त थे। उनके द्वारा विगत 3 दशक से अधिक समय से प्रत्येक गुरुवार को माता रानी की ध्यान साधना व पूजा के जरिए लगाने वाले दरबार में बड़े बड़े नेता जनप्रतिनिध अफसर व दीन हीन पीड़ित सभी आते थे और अपनी मुराद व कष्टों के निवारण की प्रार्थना करते थे। उक्त मंदिर के आसन से हजारों लोगो के भाग्य बदले है और अनेकों लोगो ने अपने कष्टों से निजात पाई है।
  पूर्व में वह एक छोटे पूजा स्थल के रूप में थे किंतु जन सहयोग के जरिए आज से 9 वर्ष पूर्व उक्त स्थल बायपास रोड के नीचे वार्ड 58 उरला दुर्ग में माता महाकाली कि 40 फीट ऊंचा 108 कलश शिखर वाला भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया जिनकी ख्याति आज दूर तक प्रसिद्ध है वे वर्षो से माता के साधक के रूप में जाने थे। उन्होंने कई वर्ष पहले अपने छाती में ज्योति कलश प्रज्वलित कर नौ दिनों तक नवरात्रि में उपासना किया था उन्ही के इच्छानुसार मंदिर परिसर में आज भी अखंड ज्योत प्रज्वलित हो रही है।
        सुशील कहार जी के निधन से मंदिर से जुड़े श्रद्धालु ही नही अपितु उन्हे जानने वाले भी स्तब्ध है और शोकाकुल हो गए है। गुरुजी सुशील कहार जी पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ्य चल रहे थे और 14 जनवरी को तबियत ज्यादा बिगड़ने पर शंकरचार्य हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया किंतु स्थिति बिगड़ने पर आनन फानन रायपुर बालाजी हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया जहां दो दिनों से चले उपचार के दौरान शुक्रवार को संध्या बेला में अंतिम सांस ली।पूज्य गुरुजी की धर्मपत्नी श्रीमती रागिनी कहार का डेढ़ वर्ष पूर्व निधन हुआ था। वर्तमान में उनके दो पुत्र आकाश, सागर पुत्र वधु बबीता व उनके सबसे विश्वस्त सेवादार अनुज गुलाब चौहान है जिसे वे निसहाय कर चले गए  उनके निधन पर निगम के एमआईसी सदस्य देवनारायण चंद्राकर,श्रीमती लीना दिनेश देवांगन,श्रीमती शशि साहू,पार्षद रेशमा सोनकर,सरस निर्मलकर सावित्री दमाहे पूर्व पार्षद शंभू पटेल,ब्रिज लाल पटेल,छत्रसाल गायकवाड भोला महोबिया नितेश साहू,गोलू सोनकर, डॉक्टर शर्मा,विजय साहू,शैलेश जैन,उत्तम साहू,प्रकाश साहू सहित अनेक नेताओं व जनप्रतिंधियो ने अंतिम यात्रा में शामिल होकर गहरा दुख व्यक्त करते हुए परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट किया।



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